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विचार

कांग्रेस महाधिवेशन तथा नेतृत्व में पीढ़ी हस्तान्तरण का प्रश्न

person access_timeAug 08, 2021 chat_bubble_outline0

मणिकुमार श्रेष्ठ ‘सिजन’

अभी नेपाली राजनीति की सबसे पुरानी और समाजवादी राजनीति की परिपक्व पार्टी नेपाली कांग्रेस के 14वें महाधिवेशन के होने की चर्चा चल रही है। परिपक्व विचार और स्पष्ट नेतृत्व के अभाव में नेपाली कांग्रेस विभिन्न समयों में पार्टी के अंदर तथा पार्टी से बाहर भी आलोचना को सह रही है। नेपाल के इतिहास में सबसे पुरानी राजनीतिक दल की तपन में स्थापित पार्टी तथा नेपाल की हरेक प्रजातान्त्रिक तथा लोकतान्त्रिक आंदोलन के नेतृत्व को सम्भालनेवाली पार्टी के 14वें महाधिवेशन की सरगर्मी के वक्त अभी दल के अंदर के विभिन्न खेमों में रस्साकसी की सुगबुगाहट है।

कांग्रेस के नेतृत्व में हुए विभिन्न प्रकार के आंदोलन तथा विगत से अभी तक के इतिहास को देखते हुए जनता की जीत होने पर भी पार्टी की हार ही हुई है। कांग्रेस में आनेवाले नेतृत्व के कारण से विभिन्न समयों में हुए निर्वाचनों में कांग्रेस को पराजय का मुह देखना पड़ा है। इसका कारण नेतृत्व का दूरदर्शी तथा पारदर्शी न हो सकना है। नेपाली भूमि में नेपाली जनजीविका के मामले से जुड़कर नेपाली कांग्रेस के द्वारा अपनी यात्रा शुरू करने के 7 दशक बीत चुके हैं। ऐसे में नेपाली कांग्रेस के संस्थापकों के योगदान का उच्च मूल्याङ्कन करके हम कांग्रेस के राजनीतिक दृष्टिकोण और परिवर्तनशील नेतृत्व की स्थापना कर सकते हैं। 

बीपी कोइराला के नेतृत्व के 2006 साल चैत 27 गते स्थापित नेपाली कांग्रेस ने नेपाल के राजनीतिक आंदोलन के महत्वपूर्ण समय का नेतृत्व किये जाने का प्रमाण हमारे पास स्पष्ट है। अगर हम देखना है तो नेपाल के प्रथम जन निर्वाचित प्रधानमंत्री होने का अवसर पानेवाले बीपी कोइराला ने वास्तव में युवावस्था में ही नेपाल सरकार का नेतृत्व किया था। इसी तरह कांग्रेस का नेतृत्व में होनेवाली सरकार के युवा नेतृत्व की सहभागिता उल्लेखित रूप में है।

नेपाली कांग्रेस के वर्तमान सभापति शेर बहादुर देउवा पहली बार प्रधान मंत्री होते समय वे 50 वर्ष से भी कम उम्र के थे। अभी भी देउवा ही देश के प्रधान मंत्री हैं तथा उनकी उम्र 75 वर्ष हो चुकी है। प्रधानमंत्री देउवा ने ही युवावस्था में देश का संचालन किया था तो अभी आकर नेपाली कांग्रेस के 14वें महाधिवेशन का दायित्व भी उनके ही कन्धों पर हैं।

इस तरह नेपाली कांग्रेस में अभी मुख्य नेतृत्व की बात की जाये तो सभापति देउवा 75 वर्ष उम्र के हैं इसी तरह बिमलेंद्र निधि 64 वर्ष, प्रकाशमान श्रेष्ठ 65 वर्ष, रामचंद्र पौडेल 76 वर्ष, विजय कुमार गच्छदार 67 वर्ष, कृष्णप्रसाद सिटौला 72 वर्ष, शशांक कोइराला 62 वर्ष, सुनील बहादुर थापा 62 वर्ष, सुजाता कोइराला 67 वर्ष, राम शरण महत 70 वर्ष, प्रकाश शरण महत 62, मीनेन्द्र रिजाल 63, अर्जुन नरसिंह केसी 73 वर्ष,  नारायण खडका 72 वर्ष, ज्ञानेंद्र बहादुर कार्की 63 वर्ष, आनंद प्रसाद ढुङ्गाना 71, कुल बहादुर गुरुंग 85, सीता देवी यादव 66, चित्रलेखा यादव 56 वर्ष के हो चुके हैं। परन्तु फिर भी पार्टी का नेतृत्व अभी भी इन्हीं लोगों के इर्द गिर्द घूम रहा है। साथ ही साथ नेतृत्व को युवा पीढ़ी को हस्तांतरण करने की बात भी उच्च स्वर में उठ रही है। नेतृत्व हस्तान्तरण मामले का नेतृत्व करनेवाले कांग्रेस के नेता गगन थापा, प्रदीप पौडेल, विश्व प्रकाश शर्मा की पीढ़ी भी 50 के इर्द गिर्द हो रही है। गगन थापा की पीढ़ी को अभी तीसरी पीढ़ी के रूप में जाना जाता है। इस तरह ये भी भान होता है कि पहली और दूसरी पीढ़ी के नेता बड़े सहज ढंग से तीसरी पीढ़ी को नेतृत्व हस्तांतरित नहीं कर देंगे।

होने को तो नेपाली कांग्रेस के महाधिवेशन को 2078 साल भाद्र 16 गते के लिए निश्चित क्यों न किया गया हो परन्तु अभी भी इसके स्थगन होने के अवसर अधिक दिखाई पड़ रहे हैं। जो हो नेपाली कांग्रेस में महाधिवेशन करने की कानूनी बाध्यता है। अभी महाधिवेशन करने पर कांग्रेस को स्थानीय श्रेणियों से अधिवेशन की शुरुवात करके परिपक्व नेतृत्व तथा स्पष्ट विचार को स्थापित करना होगा क्योंकि ये देश के संघीयता में जाने के बाद का कांग्रेस का भी पहला महाधिवेशन होगा। अभी कांग्रेस के 14वें महाधिवेशन की सरगर्मी चल रहे समय में स्थानीय श्रेणियों से ही पीढ़ी हस्तान्तरण की बात जोर शोर से उठ रही है। कांग्रेस को केंद्रीय महाधिवेशन करने से पहले ही वार्ड अधिवेशन, स्थानीय श्रेणियों के अधिवेशन, प्रदेश निर्वाचन क्षेत्र अधिवेशन, संघीय निर्वाचन क्षेत्र अधिवेषन करना होगा।

महाधिवेशन जितना जितना नजदीक आता जा रहा है उतना ही अधिक युवाओं की भूमिका का प्रश्न भी उठ रहा है। परन्तु जहाँ तक युवाओं के नेतृत्व की बात है तो दिखाई ये दे रहा है कि ये युवा पुरानी पीढ़ी के नेतृत्वकर्ताओं के वचनों का भी उलंघन नहीं कर पा रहे हैं। कम्युनिष्ट राजनीतिज्ञ कार्लमार्क्स ने युवाओं के सम्बन्ध में जो परिभाषा दी है उसके अनुसार- ''युवा वह व्यक्ति है जिसके कामों को उम्र का कोई बंधन नहीं होता, उसके विचारों को जुझारू तथा युवा मैत्री के अनुरूप होना चाहिए।' इसी तरह नेपाली कांग्रेस के संस्थापक नेता विश्वेश्वर प्रसाद कोइराला ने युवाओं के सम्बन्ध में कहा था- 'युवा का तात्पर्य उम्र से भी अधिक शारीरिक रूप से तंदरुस्त, मानसिक रूप से स्फूर्त और सामाजिक रूप में स्वस्थ, वैचारिक रूप में स्पष्ट व्यक्ति को व्यक्त करता है।'

नेपाली कांग्रेस के विगत नेतृत्व की बात की जाय तो बीपी कोइराला, गणेशमान सिंह, कृष्ण प्रसाद भट्टराई, गिरिजा प्रसाद कोइराला, टंक प्रसाद आचार्य, डॉ डिल्ली रमण रेग्मी, सुशील कोइराला तक के नेतृत्व की अगर समीक्षा की जय तो मिलेगा कि सभापति सुशील कोइराला के समय में नेतृत्व कुछ असफल ही रहा था। उनके नेतृत्व के समय कांग्रेस को सत्ता संचालन का अवसर मिलने पर भी वह कार्यकाल कुछ खास सफल नहीं जो सका। जिसका प्रतिफल अभी भी शेर बहादुर देउवा के नेतृत्व की कांग्रेस को भी भोगना पड़ रहा है। नेतृत्व ऐसा विषय है जिसे किसी भी विषय पर स्पष्ट और जुझारू नेतृत्व के लिए समझौता नहीं करना चाहिए।

आसन्न नेपाली कांग्रेस के 14वें महाधिवेशन में कांग्रेस किस ढंग से आगे बढ़ेगी, कौन कौन नेतृत्व में पहुंचेगा ये वास्तव में अभिरूचि का विषय है। कांग्रेस नेपाल का पहला लोकतान्त्रिक तथा प्रजातान्त्रिक दल है। आज के समय में जबकि सारा विश्व ही दो अलग अलग ध्रुबो में विभजित हो रहे हैं ऐसे में नेपाली कांग्रेस का महाधिवेशन होना है। नेपाली कांग्रेस स्वाभाव से ही समाजवादी पार्टी है। इसे नेपाल के समस्त विकास और प्रगति के पक्ष में खड़े होनेवाले जुझारू, प्रतिभाशील तथा अडिग नेताओं का चयन करना ही होगा। इस विषय पर नेपाली कांग्रेस के चूक जाने की अवस्था में कांग्रेस द्वारा अभी तक बनाया गया इतिहास ही इसे धिक्कारेगा।

जहानियाँ राणाशासन, पंचायती व्यवस्था को ध्वस्त करके लोकतान्त्रिक गणतंत्र की स्थापना करनेवाली कांग्रेस अपनी ही पार्टी के अंदर होनेवाले तानाशाही प्रवृत्ति का अंत करके सहभागितामूलक लोकतंत्र और समाजवादी विचार का अनुशरण करते हुए देश के विकास के लिए नेतृत्वदायी तरीके से पार्टी तथा देश के उत्थान में लगनेवाले नेतृत्व की स्थापना करने की जरुरत है।

जनता के छोटे से छोटे विषय पर कांग्रेस को स्पष्ट विचार तथा न्यायोचित रूपान्तरण आज की आवश्यकता है। इस लिए 2003 साल के प्रथम महाधिवेशन से शुरू होनेवाले नेपाली कांग्रेस के अभी का 14 वां महाधिवेशन मात्र एक प्रक्रिया न होकर सम्पूर्ण रूपांतरण की कसौटी बनना चाहिए। हमें इतिहास को नहीं भूलना चाहिए, नेपाली कांग्रेस के  पहले महाधिवेशन में स्व नेता विश्वेश्वर प्रसाद कोइराला मात्र 33 वर्ष की उम्र के थे। उसी वक्त वे अपनी पार्टी के कार्यकारी सभापति बने थे।

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