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अन्तर्वार्ता

वर्तमान परराष्ट्र सम्बन्ध वैक्सीन कूटनीति और विकास कूटनीति पर केंद्रित करना होगा

person access_timeJul 19, 2021 chat_bubble_outline0

रातोपाटी संवाददाता
नेपाली कांग्रेस के सभापति शेरबहादुर देउवा के नेतृत्व में नई सरकार का गठन किया गया है। इस सरकार द्वारा राजनीतिक क्षेत्र में विगत लम्बे समय से मचे कोलाहल को शांत किया जा सकेगा। आम नेपाली जनता ने ऐसी धारणा ली है। इतना ही नहीं इसके साथ ही देश के पडोसी राष्ट्रों तथा मित्र राष्ट्रों के साथ मधुर सम्बन्ध बनाने की भी आशा ली गई है। परन्तु अब प्रधान मंत्री शेर बहादुर देउवा किस तरह से मित्र राष्ट्रों के साथ अपने सम्बन्ध सुधरेंगे इसका चारों तरफ कोतुहल है। भले ही ये समय बहुत कठिन है परन्तु इस समय प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउवा के पास मित्र राष्ट्रों तथा पडोसी राष्ट्रों से सम्बन्ध सुधारने की एक ओर चुनौतियाँ हैं तो दूसरी ओर अवसर भी हैं। इसी किस्म के विषयों पर आधारित होकर न्यूज एजेंसी नेपाल द्वारा पूर्व राजदूत तथा परराष्ट्रविद शम्भुराम सिंखडा से की गई बातचीत...

नई सरकार का गठन हुआ है। वैदेशिक कोतुहल का विषय भी जैसा का तैसा है अब इस सरकार के वैदेशिक सम्बन्ध और उसकी प्राथमिकताएं कैसी कैसी होंगी ?

इसमें दो पक्ष बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं। एक वैदेशिक सम्बन्ध अथवा कूटनीति को आंतरिक राजनीति का प्रतिबिम्ब कहा जाता है। आंतरिक राजनीति का सम्बन्ध कूटनीति में अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। दूसरे नेपाल की परराष्ट्र नीति के कुछ मूलभूत आधार हैं। परराष्ट्र नीति निरंतरता पर चलनेवाली विधा है। दूसरी सरकार के आते ही नीति में परिवर्तन नहीं होता है। परंपरागत परराष्ट्र नीति के मूलभूत आधारों पर टेक कर अभी की सरकार को सबसे पहले कूटनीति को दो क्षेत्रों में केंद्रित करना होगा। एक को वैक्सीन कूटनीति ही कहें। अभी के समय में सभी जनता की मांग तथा आवश्यकता भी यथाशीघ्र वैक्सीन लगाकर स्वयं को सुरक्षित महसूस करना है। ये पहली प्राथमिकता है। दूसरी को विकास कूटनीति कहें अथवा आर्थिक कूटनीति। कोरोना महामारी के कारण अत्यंत पीड़ित जनता और चकनाचूर हुई अर्थव्यवस्था। जनता को भी राहत चाहिए हैं। जनता को राहत देने के लिए आर्थिक पक्ष को सबल और सक्रिय बनाने की जरूरत है। इन दोनों बातों के लिए एकदम सक्रिय और प्रभावकारी कूटनीति की आवश्यकता है। व्यापार, रेमिटेंस पर निर्भर हमारी कूटनीति द्वारा वैदेशिक रोजगार को प्रभावकारी बनाने के साथ ही यथासंभव शीघ्र वैक्सीन को उपलब्ध करना होगा। अर्थव्यवस्था को सक्रिय करने के लिए आवश्यक होने वाले अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की उपलब्धता भी उतनी ही आवश्यक है। यु तो सरकार द्वारा कोरोना विरुद्ध की वैक्सीन अपनी पहली प्राथमिकता कहकर घोषणा भी की है।

ये तो तत्काल की बात है। इससे पहले हमारी स्थिति में आंतरिक राजनीति में अस्थिरता थी। हम लोगों के द्वारा भोगे जा रहे राजनीतिक संक्रमण का व्यवस्थापन उत्तेजित इमोशनल, पोलराइज और राजनीतिक शक्तियों के बीच टकराव होने से संभव नहीं होगी। इसके लिए एक ऐसे व्यक्ति की जरुरत है जो कोलेशन बीड कर सके। जो माइल्ड किस्म का व्यवहार कर सके। आज एक बात, कल दूसरी बात, एक स्थान में जाने पर एक किस्म की बात दूसरे स्थान में जाने पर दूसरी किस्म की बात इस किस्म के आचरण से आज के संसार में प्रभावकारी कूटनीति नहीं हो सकती। परंपरागत रूप में पहले राजदूतों को अपने देश के राष्ट्रीय हित और राष्ट्रीय स्वार्थ के विषय में झूठ बोलने के लिए बाहर भेजे जाने का प्रचलन था। परन्तु अब इस किस्म के आचरण से अभी के संसार में कूटनीति नहीं चल सकती। अब की कूटनीति विश्वास और विश्वसनीयता के आधार पर चलती है। उस किस्म से अगर देखा जाय तो वर्तमान प्रधानमंत्री अन्य कमी कमजोरियों की बात को छोड़कर अत्यंत उत्कृष्ट हैं। प्रधान मंत्री नियुक्त होने के बाद सामाजिक संजाल में देखी गई प्रतिक्रियाओं को देखकर ऐसा लगता है कि विगत के अनुभवों के कारण हममे काफी चिंता तथा शंकाएं हैं। परन्तु फिर भी उनका स्वाभाव परराष्ट्रनीति में उपयोगी होने की किस्म का है। अधिक बोलते नहीं हैं, आवश्यकतानुसार दक्ष तथा अनुभवी व्यक्तियों पर निर्भर करते हैं। वैसे अगर देखा जाय तो तत्काल की दो प्राथमिकताओं के होते हुए भी अन्य प्राथमिकताएं भी हैं। इन प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए इस अनिश्चितता के परिवेश से एक किस्म की निश्चितता का नेतृत्व उनमें है। इस कारण भी वर्तमान सरकार में परराष्ट्र नीति की सहजता का माहौल है।

लगभग रास्ता भटकने की सी अवस्था में पहुँच चुकी कूटनीति को शांत स्वभाव का व्यक्ति किस तरह समन्वय करेगा ? इस सम्बन्ध में कोई सुझाव है क्या ?

हैं। पहली बात तो हमारा मूलभूत आधार ही सबसे मिलता है। इस आधार पर टेककर कुछेक प्राथमिकताओं को निर्धारित किया गया है। इनमें से पहली प्राथमिकता दो विशाल तथा अत्यंत शक्तिशाली राष्ट्रों के बीच में होने के कारण उन लोगों के साथ विश्वसनीयता की कूटनीति है। विश्वसनीयता के आधार पर हमारे मूलभूत आवश्यकताएं क्या क्या हैं, हमारी चाहते क्या क्या है, उन लोगों की आवश्यकता क्या क्या है ? उन लोगों की चाहते क्या क्या है ? इन दोनों के बीच में सामंजस्य किस तरह स्थापित किया जाय ? ताकि हमारे राष्ट्रीय हित और राष्ट्रीय स्वार्थ उन लोगों के सम्बन्ध से उन लोगों के भी हितों की पूर्ती होगी हमारी भी हित पूर्ती होगी। मूल बात बात है कि पड़ोसियों के साथ के सम्बन्ध में उच्च स्तर में एक किस्म का विश्वास का वातावरण बनाना पड़ता है। दूसरी बात उसके बाद नेतृत्व द्वारा निर्धारण किया गया वृहत मार्गदर्शन है। उस मार्गदर्शन के अंतर्गत अत्यंत प्रभावकारी किस्म से उसका संचालन कर सकने वाली उनकी टीम है। परराष्ट्र मंत्री, परराष्ट्र सलाहकार, परराष्ट्र की टीम, अत्यंत सक्रिय तथा मजबूत किस्म की है। अभी का संसार राजनीतिक तथा रणनीतिक बदलती अवस्था में इस क्षेत्र का महत्व, उस पर भी हमारे हिमालय का दक्षिण भाग नेपाल की परंपरागत भूराजनीतिक संवेदनशीलता और उस संवेदनशीलता के आधार पर परिवर्तित बातें क्या क्या हैं? उनका भली भांति नेतृत्व कर सकनेवाली टीम चाहिए। ये दूसरी बात है।  

तीसरी बात, हमारी जितने भी राष्ट्रों के साथ मूल विषय हैं। वैक्सीन की ही बात की जाये तो भारत से आएगी कहा गया था अब तक नहीं आई। कूटनीतिक स्तर पर प्रभावकारी रूप से भारत को सुरक्षित होने के लिए नेपाल का भी सुरक्षित होना अनिवार्य है। नेपालियों को भी वैक्सीन मिलनी चाहिए। भारतीयों को भी मिलनी चाहिए। नेपाल को वैक्सीन की प्राथमिकता में रखना भारत स्वयं के ही हित में है। चीन अभी विश्व व्यापी रूप में इतनी अधिक वैक्सीन उपलब्ध करा चुका है। अगर कल ही हमारी प्रभावकारी कूटनीति होती तो चीन जैसे बड़े देश को हमारे जैसे छटे से देश को वैक्सीन उपलब्ध करा देना कोई भी बड़ी बात नहीं थी। पहले तो हम इसी दुविधा में बने रहे की चीन से वैक्सीन ली जाए की नहीं। अब अभी बाध्य होकर चीन के साथ समझौता हुआ है। वैक्सीन को समय पर पाने के लिए उस विषय पर बातचीत होनी चाहिए। इसके अलावा और व्यापार घाटे जैसी बातें भी हैं, सीमा के विषय हैं। अब अभी तो बाढ़, बारिश का मौसम है पानी बरसता है, बाढ़ आती है, उधर भी क्षति होती है। इन समस्त विषयों पर प्रभावकारी रूप से पहले नेतृत्व द्वारा मार्ग निर्देशन किया जाता है। सहयोगी टीम द्वारा अच्छा तथा प्रभाकरी गृहकार्य किया जाता है। जिसके आधार पर दो देशों के बीच का कूटनीतिक सम्बन्ध संचालित होता है। इस तरह हमारे संबंध को प्रभावकारी रूप में संचालित किया जा सकता है।

शेर बहादुर देउवा अपने आप में कोई नए व्यक्ति नहीं है। पांचवी बार प्रधानमंत्री बने हैं। उनके पास व्यक्तिगत रूप में भी अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध हैं इसका किस तरह से विश्लेषण किया जा सकता है।

उनकी विश्वसनीयता है। वे जो भी कुछ कहते हैं उसे करते भी है न हो सकनेवाली बात कहते ही नही है। झूठ मुठ के पनिशमेंट देते नहीं जाते हैं कि जो छाप पड़ी है वो कूटनीति के लिए अत्यंत आवश्यक सकारात्मक है। अब दूसरी बात अभी संसार में चर्चित इतिहासकार युवाल न्हो होरारी हैं। उनकी तीनों पुस्तके संसार की ही सबसे उत्कृष्ट पुस्तकें हैं। छेपियंज़, ट्वेंटी वन फार्मूला फॉर द ट्वेंटी वन सेंचुरी दूसरी और तीसरी होमो ड्यूज नामक है। इसका तात्पर्य प्रविधि से किस तरह व्यक्ति भगवान बनना चाह रहा है। नामक पुस्तक में लिखा है कि व्यक्ति इतिहास क्यों पढ़ता है उसका बंदी होने के लिए नहीं बल्कि उससे मुक्ति पाने के लिए, लिखा है। इसका तात्पर्य पहले की ही बाते तो नहीं दुहरेगी, विगत की कमी कमजोरियों के कारण व्यक्ति में चिंता-शंका है। इसका मतलब है कि इतिहास हमें पाठ सिखाता है।

सम्माननीय प्रधानमंत्री शेर बहादुर में प्रथमतः तो अनुभव है, अनुभव का तात्पर्य स्वयं भोगने के बाद ही पता चलता है। दूसरी बात ये समय इतिहास में क्या क्या अच्छा हुआ क्या क्या कमी कमजोरियां हुई इनका अनुभव करने का समय भी है।

यदि आप प्रधानमंत्री के सलाहकार की टीम में आए तो आपकी कार्यसूची में क्या क्या होगा ?

एक नंबर में तत्काल वैक्सीन दूसरे नंबर पर विकास कूटनीति। हमारा पूरा ध्यान देश तथा जनता के विकास पर केंद्रित होगा। तीसरे में हमारा ये जो छोटा सा देश दो विशाल राष्ट्रों के बीच अवस्थित है इसमें विश्वास की कूटनीति है। कभी कभी अपने पड़ोसियों को मदद करने पर अन्य मित्र राष्ट्रों में ये भाव कदापि नहीं पहुँचाना चाहिए की हमारी अवमानना हुई है। सबसे पहले हमने ब्रिटेन को उसके बाद अमेरिका को मैटर राष्ट्र बनाया था। अपने इन परंपरागत मित्रों को भी आप लोगों की मित्रता तथा सहयोग से हम अत्यंत महत्व के साथ आगे बढ़ाना चाहते हैं ये चौथा नंबर है। इसमें संयुक्त राष्ट्र संघ है जिसका विधान और संलग्नता हमारी कूटनीति का आधार है।

इन सिद्धांतों के कारण राष्ट्र संघ में अगर हमारी प्रभावकारी भूमिका होती है तो बहुत हद तक कूटनीति सफल हो जाएगी।

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