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अन्तर्वार्ता

मैं, विमलेंद्र और प्रकाशमान में से कोई एक सभापति का उम्मीदवार होना चाहिए

अपना-पराया करनेवाला स्वभाव होने के कारण शेर बहादुर देउवा सफल सभापति नहीं बन सके

person access_timeJul 15, 2021 chat_bubble_outline0

रातोपाटी संवाददाता
नेपाली कांग्रेस के महामंत्री शशांक कोइराला ने पार्टी का आगामी नेतृत्व दूसरी पीढ़ी के नेताओं द्वारा किये जाने की बात बताई है। पार्टी सभापति शेर बहादुर देउवा तथा वरिष्ठ नेता रामचन्द्र पौडेल को अब अभिभावकत्व की भूमिका का निर्वहन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा- 'वे इन दोनों नेताओं से इस विषय पर बात भी करेंगे। अपना और पराये की भावना के कारण सभापति देउवा पार्टी के सफल सभापति नहीं बन सके।

आसन्न अधिवेशन, क्रियाशील सदस्यता तथा नए नेतृत्व के सम्बन्ध में नेपाली कांग्रेस के महामंत्री शशांक कोइराला के साथ न्यूज एजेंसी नेपाल द्वारा किये गए अन्तर्वार्ता का सम्पादित अंश...

आसन्न महाधिवेशन की तैयारी कहाँ तक पहुंची है ?
सबसे पहले मैं पार्टी की ही तैयारी की ही बात करूँगा। अभी तक क्रियाशील सदस्य का ही निश्चय नहीं हो पाया है। ये अंत अंत तक आ गया है मुझे लगता है कि इस महीने के अंत तक क्रियाशील सदस्यता का अंतिम फैसला हो चुकेगा तथा अंतिम खाका बनेगा। जिसके बाद हम लोग अधिवेशन की तरफ जायेंगे। अभी पार्टी का ध्यान की क्रियाशील सदस्यता की ओर हैं। क्रियाशील सदस्यता में क्या करना है विषय पर बात हुई थी। केंद्रीय सदस्य रामचंद्र दाई, शेखर डॉक्टर साहब, मिनेंद्र रिजाल तथा अन्य सदस्य भी थे। हम क्रियाशील सदस्यता का कैसे पार लगाया जाये विषय पर बात कर रहे थे। इसे पार लगाए बिना तो हम महाधिवेशन में नहीं जा सकते। ये ही अवस्था है।
क्रियाशील सदस्यता का तत्काल पार लग सकने की अवस्था तो दिखाई नहीं दे रही है। ये महाधिवेशन को प्रभावित कर सकता है जैसी आशंका पैदा हो रही है या वो आशंका गलत है ?

यदि इस महीने के अंदर इस समस्या का समाधान किया न जा सका तो आशंका तो होगी ही। ये समस्या काफी जटिल है, हरेक जिले में कुछ न कुछ तो समस्या है ही। कहा जा रहा है कि 46 जिलों में काम हो चुका परन्तु वहां से ही शिकायतें आ रही हैं। उन्हें भी देखना होगा। इस लिए अभी की अवस्था में ये कहा भी नहीं जा सकता की समय पर महाधिवेशन हो भी सकेगा या नहीं। प्रश्न चिह्न है। परन्तु हमारा ध्यान उसी तरफ गया है। हम क्रियाशील सदस्यता को जल्द ही समाधान करेंगे को लेकर भर मुगदर प्रयास में लगे हैं।
अभी शीर्ष नेताओं के 3 पुत्र नेताओं की संयुक्त भेट को लेकर विभिन्न किस्म के विश्लेषण हो रहे हैं। दूसरा गुट आना चाहता है अथवा शक्ति केंद्रित करने का प्रयास किया गया कहकर भी टिप्पणी की जा रही है। वास्तव में आप लोगों की बैठक में था क्या ?

वास्तव में बिमलेंद्र निधि ने ही इनीशिएट किया है सबसे पहले तो उनके विवाह के 35 वर्ष हुए थे। उस दिन मुझे तथा प्रकाशमान  सिंह को बुलाया था। दूसरी बात यहीं मीटिंग की और तीसरी बार प्रकाशमान जी के घर पर। हमारा कहना क्या था की हम लोगों को भी एक ही स्थान पर खड़े होना चाहिए। सभापति के लिए हममे से अगर कोई उम्मीदवार बनेगा तो ठीक ही है हमारे बीच एकता होनी चाहिए ये बात हुई। इसमें बहुत सी बातें है । पहली-बिमलेंद्र निधि जी ने शेरबहादुर जी को छोड़ दिया ऐसा संकेत भी मिलता है। दूसरी बात हम तीनों में से कोई एक व्यक्ति ही उम्मीदवारी देगा। रामचंद्र पौडेल हैं, शेखर कोइराला हैं, प्रकाशमान  और मैं भी हैं उधर बिमलेंद्र निधि भी हैं। मेरा कहना था कि हम तीन लोगों से 5 लोग बनाये, फिर 5 से 7 लोग बनाये जिससे हम एक ही सूत्र में बँध सके। परन्तु इधर आकर हमारी इस विषय पर कोई बात नहीं हुई है।  जो पार्टी के लिए भी सहायक होगा अच्छा भी होगा। नकारात्मक पक्ष भी हैं परन्तु बाबजूद इन सबके हम तीन (नेता पुत्र) अगर एक ही स्थान पर खड़े हुए तो नेपाली कांग्रेस एक ही स्थान पर आएगी का संकेत भी स्पष्ट रूप में मिलेगा।

देश की राजनीतिक अवस्था प्रतिकूल होने के कारण अभी नेतृत्व परिवर्तन न करें की आवाज भी आ रही हैं, फिर आप सब नेतृत्व परिवर्तन के लिए पहल भी कर रहे हैं। तो क्या अब नेतृत्व परिवर्तन का सही समय आया ही है ?

हाँ, समय तो आया है। मेरा कहना है कि महाधिवेशन आ रहा है और इस समय नेतृत्व परिवर्तन करना चाहिए। क्योंकि अभी की अवस्था में हमारी दुर्दशा हो रही है। इस अवस्था को देखकर नेतृत्व परिवर्तन करना होगा की सोच पर हम तीन नेता आ पहुंचे हैं। कैसे होगा परिवर्तन ? कौन करेगा परिवर्तन ? ये प्रश्न तो आजतक यथावत ही हैं। इसी लिए हम 3 लोग 5 लोग होते हुए, 7 लोग बनाते हुए समूह को यदि विस्तृत करते गए तो एक ही स्थान पर खड़े हो सकने की संभावना होगी। इससे पार्टी भी मजबूत बनेगी। एक ही स्थान पर खड़े होने पर शक्ति संचय भी होगा। एक व्यक्ति ही अगर उमीदवार हुआ तो पीढ़ी हस्तान्तण भी सरल होगा के ध्येय से हम ये प्रोग्राम संचालित कर रहे हैं।
तीनों लोग नेतृत्व के आकांक्षी हैं या तो उचित व्यवस्थापन होना चाहिए अथवा तीनों लोगों को लड़ना चाहिए। क्या व्यवस्थापन किया जा सकेगा ? कोई उपाय हैं ?

ये तो हमारे बीच की वार्ता से ही समाधान हो सकेगा। अन्यथा तो तीनों लोगों को ही लड़ना होगा। वार्ता में बैठकर किसी निष्कर्ष पर तो पहुँचना ही होगा। हमें लगता है कि नेतृत्व परिवर्तन जरुरी है हम इस बात पर गंभीर भी हैं इसी लिए तो एक ही व्यक्ति को ही उठना है। अगर तीनों लोग उठते हैं तो फिर वही बात परिवर्तन नहीं होगा।
तो फिर ऐसे समय में शेरबहादुर तथा रामचंद्र पौडेल का व्यवस्थापन कैसे करेंगे ?
शेरबहादुर जी की तो उम्र भी काफी हो चुकी है। रामचंद्र पौडेल परिपक्व व्यक्ति हैं। उनकी राजनीति में उतर चढाव भी बहुत हुए हैं। मुझे लगता है  कि उन्हें भी आगे आकर अभिभावक का स्थान लेना चाहिए परन्तु वे भी प्रत्याशी हैं। हमें उन्हें समझाना होगा कि अब आप अभिभावक की भूमिका का निर्वहन करते हुए हमें गाइड करें। मुझे लगता है कि शेरबहादुर जी की भी वही अवस्था है। काफी वृद्ध हो चुके हैं। ये लोग अब कितने लम्बे समय तक राजनीति कर सकेंगे ?अभिभावक बनाकर दूसरी पीढ़ी का मार्गदर्शन करने के समय में भी ये लोग खुद ही लड़ने के विचार में है। यही तो समस्या है।
अभी महामंत्री हैं आपकी अपनी तैयारी कैसी है ? अपनी उम्मीदवारी को कैसे स्थापित करेंगे।

सर्वप्रथम तो मैं देश भर के कांग्रेस नेता कार्यकर्ताओं के साथ भेट कर रहा हूँ। उन लोगों की राय-सलाह-सुझाव। दूसरी बात नेताओं के बीच भी संवाद होना जरूरी है। होने को तो बातचीत हो रही है शेखर दाई, प्रकाशमान जी, बिमलेंद्र निधि रामचंद्र जी से भी बातचीत हो रही है। अगर हम इसी आधार पर आगे बढे तो हम अवश्य ही एक निश्चय पर पहुँच सकेंगे। मैं हूँगा अथवा कौन होगा ? जो भी हो एक व्यक्ति को उठना चाहिए अभी का मेरा दृष्टिकोण यही है।

अपने कार्यकाल में जब शशांक को बोलना चाहिए था नहीं बोले और जब न बोलने का समय था धर्मनिरपेक्षता आदि के विषय में तब तो खूब बोले क्यों ??
मैं कहना चाहता हूँ कि प्रथमतः तो शेरबहादुर हमारे सभापति हमारी इतनी बड़ी हार हुई। चुनाव में हरेक ने उनका विरोध किया। मैं ही मात्र ऐसा व्यक्ति था जिसने उन्हें डिफेंड किया। मैंने क्या कहा कि केबल उनकी गलती नहीं है। हम सब भी पदाधिकारी हैं हमारी भी उतनी ही गलती है।
आपने कहा कि मैं नहीं बोला ? मैं उसका उत्तर आपको दे रहा हूँ- अगर मैं उस समय बोलता तो मुझे शेर बहादुर के विरोध में बोलना होता। अगर मैं उनके विरोध में बोलता तो पार्टी के अंदर की अवस्था कैसी होती ? इसी लिहाज से मैं नहीं बोला।

परन्तु इधर पार्टी का विधान के, संविधान के बाहर जाने पर क्यों बोले ? एक बार नहीं तीन तीन बार धर्म के बारे में बोल दिया जबकि तब समय ही नहीं था...।

हमारा संविधान बन रहा था। तब मैंने सुशील दा से कहा था कि देखिये दादा बीपी द्वारा बनाये गए इस चार तारे झंडे में एक तारा धर्म स्वतंत्रता का प्रतीक है। आप धर्मनिरपेक्षता क्यों कर रहे हैं ?वे जल्दबाजी में थे। 5-7 दिन ही बांकी बचे थे। उन्होंने कहा ये प्रेशर है मुझे क्या करेगा। इसे बाद में चेंज करेंगे। 'इतनी बात होने के बाद तो मेरे बोलने की बात नहीं हुई। क्योंकि अगर संविधान नहीं दिया तो सुशील दा भी फेलियर हो जायेंगे। वे अंत में संविधान देने में तो सफल हुए ये तो नेपाली कांग्रेस के लिए एक बड़ी उपलब्धि है न ! इस उपलब्धि के जाने की संभावना को देखते हुए मैंने उस समय उन्हें अधिक प्रेशर नहीं किया।

सभापति की उम्मीदवारी देने पर आपके प्रमुख मुद्दे क्या क्या होंगे ?
सबसे पहले तो पार्टी को ही एकजुट बनाना है। हमारे धराशायी होने का मुख्य कारण है हमारा विश्रृंखलित होना गुटबंदी उपगुटबंदी ने इसे ध्वस्त बनाया है। शेर बहादुर देउवा आज की तारीख में भी तेरा आदमी मेरा आदमी कहते हैं। होने को तो वे सभी के सभापति हैं। अगर वे अपनी धारना बदल लेते तो वे ही सफल सभापति हो सकते थे। मैं चाहता हूँ की पार्टी की एकता हो। हमें बीपी कोइराला की सभापतीय पद्धति में जाना होगा।

शासकीय स्वरूप को भी सत्तारूढ़ दल द्वारा बहस में लाना होगा कहा है। प्रत्यक्ष निर्वाचित राष्ट्रपति की बात हो रही है। इस पर आपकी टिपण्णी क्या है ?
प्रत्यक्ष निर्वाचित राष्ट्रपति की बात बहुत पहले से उठ रही है। मैं तो बेस्ट मिनिस्टर सिस्टम में ही विश्वास करता हूँ। पहले दल का नेता होगा, हाउस में अपना बहुमत लाएगा। तदनुरूप ही हमें जाना होगा। प्रेसिडेंटियल सिस्टम में ही विश्वास करता हूँ, प्रेसिडेंट का प्रत्यक्ष चुनाव हमारे लिए वो अच्छी बात नहीं होगी।
अंत में, अब महाधिवेशन का ही प्रसंग, क्रियाशील सदस्यों की सहभागिता, उम्मीदवार आदि का निर्णय महाधिवेशन की दूसरी कार्यतालिका कब तक आएगी ?

सबसे पहले तो क्रियाशील सदस्यता को इस महीने तक निष्कर्ष पर पहुँचाना होगा। उसमें हम लगे हुए भी है। समितियां बनाकर उन्हें जिम्मेदार हाथों में सौंपा भी जा चुका है। और पार्टियों से आये लोगों का भी समावेश होना चाहिए। विजय गच्छदार की पार्टी, सुनील थापा जी की पार्टी के क्रियाशीलों का भी समावेश होना चाहिए। उसके बाद हमारे अपने आतंरिक भी समाबिष्ट होने चाहिए। मुझे लगता है कि ये शीघ्र ही संपन्न होगा। इसमें अगर फिर से विवाद हुआ तो ये सब हमारे महाधिवेशन को भी प्रभावित करेगा। 

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