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अन्तर्वार्ता

नरोत्तम वैद्य कहते हैं- 'ओली प्रवृत्ति से आजिर आकर आवेग में आ गया, समझे न!'

‘मैं तो अहिंसावादी हूँ, ओली को सशरीर ख़त्म करूँगा ये नहीं कहा है'

person access_timeJun 20, 2021 chat_bubble_outline0

रातोपाटी संवाददाता

नेपाली कांग्रेस के प्रदेश सांसद नरोत्तम वैद्य द्वारा बागमती प्रदेश सभा में बोलते हुए प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के विरुद्ध नाथूराम बनने के लिए तैयार रहने की अभिव्यक्ति दी जिससे अभी नेपाल में राजनीतिक वातावरण तरंगित हुआ है। शुक्रवार बागमती प्रदेश सभा की बैठक में वैद्य ने प्रधानमंत्री ओली के द्वारा देश को ही खाया जाने लगा ऐसे में किसी न किसी के नाथूराम गोडसे होने की जरूरत है। अगर और कोई तैयार नहीं है तो इस काम के लिए मैं खुद ही तैयार हूँ, की अभिव्यक्ति दी। नाथूराम वह व्यक्ति है जिसने भारत में महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या की थी। इसी विषय पर वैद्य जी से की गई बातचीत का संपादित अंश :

आपने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का नाम ही लेकर 'नाथूराम गोडसे' बनूँगा की धमकी क्यों दी ?

मैंने केपी शर्मा ओली को व्यक्तिगत रूप में सशरीर ख़त्म करूँगा ऐसा नहीं कहा, ऐसा मेरा आशय नहीं है। परन्तु उनकी उन प्रवृत्तियों को समाप्त करना होगा, कहा है। प्रधानमंत्री पद को टिकाए रखने के लिए जो मन में आया करने लगे हैं। नागरिकता अध्यादेश लाया गया। संविधान संशोधन के लिए कार्यदल बनाया गया, अपनी ही पार्टी के लोगों को दरकिनार करके मधेश के मित्रों को मंत्री बना डाला। प्रधानमंत्री के पद को बचाये रखने के लिए किसी भी किस्म का हथकंडा वे अपनाने लगे हैं। इस बातों के प्रति मेरी आपत्ति है। यदि ये प्रधानमंत्री ही बने रहेंगे तो राष्ट्रीयता को बहुत खतरा है। देश के लिए ही बड़ा खतरा है। मेरा तात्पर्य है कि उन्हें किसी भी हालत में प्रधान मंत्री पद से बिदाई दी जानी चाहिए।

प्रधानमंत्री ओली पर भौतिक आक्रमण किया जाना चाहिए था मैं खुद करूँगा, ऐसा आपने नहीं कहा ऐसा आपका दावा है ?

क्लियर कट बात है। मैंने कहा न कि मैं तो अहिंसा वादी हूँ। मैं तो महात्मा गाँधी से अत्यंत प्रभावित व्यक्ति हूँ। मैं तो शब्दों से भी हिंसा का पक्षधर नहीं हूँ। मेरे बोलने से अगर किसी का मन दुखता है तो मैं रात भर सो नहीं पाता। परन्तु खड्ग ओली की प्रवृत्ति से मैं वाकई ही आजिर होकर आवेग में आ गया ! यदि वे खुद को परिमार्जित नहीं करते हैं तो समझो कि ये देश गया।

महात्मा गांधी की हत्या का आपने मिथक बनाया है इसे कैसे ठीक करेंगे ?

महात्मा गांधी को मारने से पहले नाथूराम महात्मा गांधी के प्रति अत्यधिक श्रद्धा रखनेवाले व्यक्ति थे। वे गान्धी का चरण बंदन करते थे। गोली मारने से पहले भी उन्होंने उन्हें प्रणाम करके गोली मारी थी। परन्तु नाथूराम का कहना था कि यदि गाँधी और कुछ समय जीवित रहे तो देश के और भी टुकड़े कर देंगे। देश को इस किस्म के टुकड़े होने से बचने के लिए गाँधी को गोली मारी गई ऐसा देखने में आता है। अभी के इस देश के परिप्रेक्ष्य में भी अगर ओली प्रवृत्ति इस देश में बनी रही तो ये देश को ही बेच देगी। ये प्रवृत्ति खुद को इस महत्वपूर्ण कुर्सी पर टिकाए रखने के लिए जैसा भी समझौता करेगी। इस कारण इस महत्वपूर्ण कुर्सी से ओली जी की विदाई की जाय। अगर ऐसा न हुआ तो इस देश में अनर्थ होगा।

आपकी इस अभिव्यक्ति के बाद ओली पक्ष के कार्यकर्ताओं द्वारा आप पर कानूनी और भौतिक कार्रवाही करने की चेतावनी भी दी है ?

संविधान की धारा 187 के अधीन में रहकर प्रदेश सभा में पूर्ण वाक् स्वतंत्रता का प्रयोग किया जा सकता है। उसने प्रदेश सभा सदस्य को पूर्ण स्वतंत्रता की सुविधा दी है। मैंने उस पूर्ण वाक् स्वतंत्रता का उपयोग किया है। प्रदेश सभा में व्यक्त किया गया कोई भी विचार अथवा टकरा गए किसी मत को लेकर किसी भी सदस्य को पकड़े जाने, जेल में रखने अथवा उस व्यक्ति पर किसी भी अदालत के कार्रवाही किये जाने का रिवाज नहीं है। प्रदेश सभा में पूर्ण वाक् स्वतंत्रता होती है। मैं व्यक्तिगत रूप से अहिंसावादी हूँ।

कांग्रेस ने ही आपको अपनी अभिव्यक्ति पर आत्मालोचना करने का निर्देशन दिया। आत्मालोचना करते है नहीं?

खड्ग ओली के सम्बन्ध में मैंने जो कुछ भी बोला है उसके संबंध में आत्मालोचना करने की जरुरत नहीं हैं। परन्तु नाथूराम गोडसे के साथ जोड़कर की गई भौतिक कार्रवाही की बात पर मैं आत्मालोचना करता हूँ। नाथूराम गोडसे बनने के लिए यदि कोई भी तैयार यहीं हैं तो मैं बनने को तैयार हूँ की अभिव्यक्ति पर आत्मलोचना के साथ  मैं उन शब्दों को वापस लेने को भी तैयार हूँ। परन्तु मैंने खड्ग प्रसाद ओली सशरीर ही ख़त्म कर दूंगा, ऐसा मैंने कहा ही नहीं हैं।

परन्तु आपको प्रदेश सभा सदस्य से निलंबित करके गिरफ्तार किये जाने की मांग उठ रही है ? आप क्या कहना चाहेंगे

मैं पहले भी संविधान की धारा 187 में पूर्ण वाक् स्वतंत्रता की बात को स्पष्ट किया है। मैं अपने मित्रों से उसे देखने का अनुरोध करता हूँ।

आप वाक् स्वतंत्रता की बात करते हैं पिछले साल संघीय सदस्य में विवादित अभिव्यक्ति दिए जाने पर जनता समाजवादी पार्टी की संसद सरिता गिरी का पद चला गया था !

मैंने तो देश के टुकड़े करने की बात नहीं की सरिता गिरी ने तो देश के ही टुकड़ाये जाने की की थी। उनके वक्तव्य के कारण उनकी पार्टी द्वारा उन पर कार्रवाही की गई। 

तो इस अभिव्यक्ति के बाद कांग्रेस द्वारा कोई भी कार्रवाई नहीं होगी की बात पर आप आश्वस्त हैं ?

पार्टी को आत्मालोचना करनी होगी। वाक् स्वतंत्रता और अराजकता एक साथ नहीं चल सकते। उस बात पर मैं आत्मालोचना करूँगा। उसे मैं परिमार्जन के साथ पुनः उपस्थित करूँगा। आज मैं प्रदेश सभा से ही अपने शब्दों को वापस लेकर आत्मालोचना के लिए सभामुख से समय भी माँगा है।

अंत में आपकी अभिव्यक्ति के प्रति हो रहे विरोध के सम्बन्ध में आप क्या कहना चाहेंगे?

आलोचना और टीका टिप्पणियों की सकारात्मक बातों को आत्मसात करूँगा। नकारात्मक बातों के प्रति मेरा कहना कुछ भी नहीं है। अगर इससे मेरी कमी कमजोरियों के प्रति संकेत होता है तो उन्हें स्वीकार करूँगा तथा ठीक भी करूँगा।

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