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अन्तर्वार्ता

उपप्रधानमंत्री राजेंद्र महतो- अब नेपाल को बहुल राष्ट्रीय राज्य की ओर ले जाने के लिए मुक्ति आंदोलन की तैयारी करेंगे

लम्बी अवधि तक के लिए मंत्री पद पर रहने के लिए नहीं गया हूँ- जब तक रहेगा रहेगा

person access_timeJun 10, 2021 chat_bubble_outline0

नव नियुक्त उपप्रधानमंत्री राजेंद्र महतो ने कहा- अब नेपाल को बहुल राष्ट्रीय राज्य की और ले जाने के लिए राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलन की तैयारी करनी है। जनता समाजवादी पार्टी के द्वारा उठाये जाते रहे पहचान की मांग और मुद्दे को पूरा करने के लिए स्वयं के सरकार सहभागी होने की बात महतो ने रातोपाटी को बताई।

उप प्रधानमंत्री महतो ने कहा- 'हमारे सम्मुख दो कार्यभार हैं। एजेंडा को सम्बोधित करने का एक कार्यभार है तो भविष्य का कार्यभार मतलब इस देश को बहुल राष्ट्रीय राज्य के रूप में ले जाने के लिए राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलन की तैयारी करना है।'

जनता समाजवादी पार्टी (जसपा) के महंथ ठाकुर तथा राजेंद्र महतो पक्ष एमाले अध्यक्ष केपी शर्मा ओली के नेतृत्व की कामचलाऊ सरकार में अपने 10 लोगों की टोली के साथ सहभागी हुआ है। नेता राजेंद्र महतो के नेतृत्व में उपप्रधानमंत्री के साथ 8 मंत्री तथा 2 राज्य मंत्री कुल मिलाकर 10 लोगों की टोली ओली सरकार में सहभागी बनी है।

जसपा नेतृत्व सत्ता समीकरण में विभाजित होने पर पार्टी भी विभाजन की दहलीज पर आ खड़ी हुई है। पार्टी के ही विभाजन के दाव तक पहुंचकर काम चलाऊ सरकार में जसपा क्यों सहभागी हुई तो ? इसका रहस्य क्या है ?
इस विषय पर हमने नव नियुक्त उपप्रधानमंत्री महतो के साथ संक्षिप्त बातचीत की थी।

 

कल आप अब मंत्री नहीं होंगे कह रहे थे आज फिर ओली सरकार में सहभागी हो गए। उपप्रधानमंत्री पद पाने के कारण गए हैं क्या ?

(हँसते हुए) ऐसा ही कहना पड़ता है। परन्तु हमारी प्राथमिकता मांग और हमारे मुद्दे हैं। अपनी मांगों-मुद्दों के कारण ही हम सरकार में गए है। मांगो का सम्बोधन हुआ परन्तु अभी भी हमारी कुछ मांगें बांकी ही है। उन्हीं मांगों के लिए हम सरकार में गए हैं। मधेश में 6 महीनों इतना घनघोर आंदोलन हुआ था। दर्जनों आं दोलनकारियों ने शहादत पाई थी। सैकड़ों घायल हुए थे। तीसरे मधेश आंदोलन की मांगें और मामले हमारे कन्धों पर हैं। उन्हें पूरा करना हमारा दायित्व है। जिसके लिए हमने सरकार से निरंतर रूप में वार्ता भी की। जिनमें से कुछ मामले तो पूरे हो गए। मुकदमे की वापसी से लेकर संविधान संशोधन के लिए कार्यदल बना है। नागरिकता का विषय तो सुलझ गया। अब अपनी और मांगों को सरकार में रहकर पूरा करते जायेंगे।

संविधानतः काम चलाऊ सरकार द्वारा मंत्रिपरिषद का विस्तार नहीं किया जा सकता। प्रधानमंत्री ओली द्वारा संविधान विपरीत तरीके से मंत्री परिषद का पुनर्गठन करने पर उस सरकार में जाकर मंत्री होने की ऐसी कौन सी परिस्थिति आ गई ?

मुख्य रूप में जनता समाजवादी पार्टी की कुछ मांगों तथा मुद्दों को सम्बोधित किये जाने के कारण हमारे लिए सरकार में सहभागी होने की स्थिति आई है। इसी कारण हम सरकार में आए हैं। हम जो भी काम कर रहे है अपनी मांगों तथा मुद्दों के मध्य नजर कर रहे हैं। कल तक हमारी मांगें-मुद्दों में संबोधित नहीं किये गये थे। अभी आकर कुछ और काम हुआ है। अब बांकी काम हम करते जायेंगे। हमारे प्रयास जारी हैं।

इस देश में अधिकार और पहचान के एजेंडे को आगे बढ़ाना जनता समाजवादी पार्टी का मुख्य लक्ष्य है। इसी तरह सुशासन तथा समृद्धि को आगे बढ़ाना भी है। बहुल राष्ट्रीय राज्य के रूप में नेपाल को स्थापित करना है। नेपाल एकल राष्ट्रीय राज्य नहीं है। बहुल राष्ट्रीय राज्य है। हमारी पार्टी का मूल लक्ष्य यही है।

हमारे सम्मुख दो कार्यभार हैं। एजेंडा को सम्बोधित करना तथा भविष्य के कार्यभार यानि देश को बहुल राष्ट्रीय राज्य के रूप में ले जाने के लिए राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलन को तैयार करना है।

ये देश समस्त नेपालियों का बने। सभी नेपालियों को नेपाल की पहचान, अधिकार, सम्मान और शासन में प्रतिनिधित्व मिले। उसी अनुरूप संविधान तथा शासन बने। इस लक्ष्य पर जनता समाजवादी पार्टी सरकार में होने पर भी न होने पर ही आगे बढ़ती रहेगी। अपने लक्ष्य तथा जनता की सेवा के लिए अभी सरकार में जाकर हम अपनी भूमिका का निर्वाह करेंगे।

संसद विघटन का निर्णय सर्वोच्च में सुनवाई की प्रक्रिया में है। इसका हल न होते ही सरकार में जाने के लिए इतनी जल्दबाजी क्यों की ?

सरकार में जाने की बैठक बहुत लम्बे समय से हो रही थी। हम सरकार के साथ बातचीत में थे। अभी सरकार में जाना हमें उपयुक्त लगा। और फिर प्रधानमंत्री जी ने भी इसी समय मंत्री परिषद का पुनर्गठन किया।
ये कोई जल्दबाजी किया गया विषय नहीं है।

पौष 5 गते प्रधानमंत्री द्वारा संसद विघटन किये जाने पर विरोध में सड़क संघर्ष पर उतरनेवाले आप सब अभी दूसरी बार संसद विघटन होने पर सरकार में शामिल हो गए। जसपा के एक पक्ष को असंवैधानिक तथा अलोकतांत्रिक लगे निर्णय के समर्थन करने के स्थान पर पहुँच गए। इसका कारन क्या है ?

संसद विघटन अपने स्थान पर है ही। अदालत में मुक़दमा चल रहा है। इस पर ज्यादा बोलना जरुरी नहीं है। निर्वाचन में जाने की बात मुख्य है। नए जनादेश के लिए जनता में जाने की बात से कोई भी राजनीतिक दल नहीं भागेगा। हम भी नहीं भागेंगे। बांकी विघटन का मामला अदालत से निष्कर्ष पर पहुंचेगा, देखते चलिए।

अगर कल को संसद की पुनर्स्थापना हो जाती है तो आप सबके तो मियादी मंत्री होने का खतरा भी है। अब प्रश्न है कि आखिर मियादी मंत्री बनने के लिए क्यों कमर कसी ?

लम्बे समय तक मंत्री बने रहने, यहाँ टिके रहने, सत्ता के लिए हम सरकार में शामिल ही नहीं हुए हैं। सत्ता के लिए न होकर हम अपनी मांगों तथा मुद्दों को पूरा करवाने के लिए सरकार में आये हैं। जब तक सरकार रहेगी हम सरकार में रहेंगे। अपनी मांगों तथा मुद्दों के लिए प्रयासरत रहेंगे। जब तक सरकार चलेगी चलेगी।
हमेशा के लिए कोई भी सरकार नहीं होती है। किस सरकार की आयु कितनी होगी क्या इसका कोई निश्चय होता है ? जितने दिन, जितने समय, जितने वर्ष हम सरकार में रहेंगे हम अपने सवालों, अपनी मांगों और मुद्दों के लिए ही कार्यरत रहेंगे।

अभी पार्टी एकता का एक वर्ष भी पूरा नहीं हुआ था, पार्टी को विभाजन की दहलीज पर पहुँचाकर भी सरकार में शामिल हो गए है न ?

पार्टी विभाजन की बात नहीं है। हम अपनी मांगों और मुद्दों के लिए आगे बढे हैं। अगर कोई सरकार तथा सत्ता के लिए पार्टी विभाजन करना चाहता है तो ये उसका मामला है। हम उससे प्रेरित नहीं हैं। हम अपने मामलों पर काम कर रहे हैं। सरकार में भी हम अपनी इन्हीं वजहों से शामिल हुए हैं। और हम इसी पर केंद्रित होकर काम करेंगे। हम शासन सत्ता के लिए कभी भी प्रेरित नहीं हुए। आगे नहीं बढे। आरम्भ से ही हमने इस बात को कहा है। बल्कि हमारे दूसरे मित्रजन विपक्षी समीकरण बनाकर सरकार बनाने के काम में लगे हैं। उन लोगों के पास मधेश का एजेंडा ही कहाँ है ? कौन सा एजेंडा है ?

एकीकृत होती जा रही पार्टी तथा आंदोलन को विगत में भी सत्ता के लिए ही विसर्जित करते आ रहे थे। इस बार भी उसकी पुष्टि हो गई है न ?

कुछ नेता इधर-उधर होते हैं। परन्तु पार्टी विभाजित नहीं होती। जनमत तथा कार्यकर्ता एक ही स्थान पर रहते हैं।

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