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इतने अधिक भारतियों के काठमांडू आने का अनुमान ही नहीं था

'आ चुकनेवालों को मानवीय नाते से तीसरे देश जाने दिया जा रहा है'

person access_timeMay 21, 2021 chat_bubble_outline0

रातोपाटी संवाददाता
काठमांडू। जिस समय भारत में कोरोना की दूसरी लहार भयावह होकर उमड़ रही थी उस समय साउदी अरब ने भारत से उसके देश होते हुए आनेवाली उड़ानों पर रोक लगा दी थी। साउदी द्वारा भारत की उड़ानों को रोके जाने पर वैदेशिक रोजगारी के लिए जानेवाले भारतीय नागरिक तीब्र गति से नेपाल आने लगे। नेपाल सरकार द्वारा ख़ुशी मन से इन भारतीय नागरिकों का स्वागत किया गया तथा तीसरे देश भेजने के लिए ट्रांजिट उपलब्ध करने का निर्णय भी किया गया।

'जिस समय हमारे यहाँ संक्रमण कम भी था एक किस्म से अगर कहा जाय तो उस समय हम सब खुश ही हुए थे,' परराष्ट्रमंत्री ज्ञवाली ने रातोपाटी से कहा। थोड़ा बहुत पर्यटन व्यवसायियों को तथा होटल व्यावसायियों को भी कुछ राहत होगी, सोचकर हमने इसे ढीला किया था।'

एक तरफ भारत में कोरोना बढ़ता जा रहा था दूसरी तरफ काठमांडू प्रवेश करनेवाले भारतीयों की संख्या भी द्रुत गति से बढ़ी। 'इस लेबल तक भारतीय आएंगे ऐसा अनुमान नहीं था।' मंत्री ज्ञवाली कहते हैं 'भारत में संक्रमण एकदम ज्यादा बढ़ने लगा, हमने सड़क मार्ग से आनेवालों को रोका उसके बाद हवाई मार्ग से आनेवालों को भी अब यहाँ से नया ट्रांजिट नहीं होगा कहते हुए रोका। उस समय तक तकरीवन 12-13 हजार भारतीय काठमांडू में प्रवेश कर चुके थे।'

काठमांडू आनेवाले 10ओं हजार भारतीयों से नए किस्म का वेरिएंट यहाँ फैला की नहीं इस सम्बन्ध में अनुसन्धान या विश्लेषण नहीं किया गया है। परन्तु अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें बंद किये जा चुकने के बाद काठमांडू में रहे वे 10ओं हजार भारतीय नेपाल के लिए समस्या बन गए।

'समस्या क्या हुई कि उन लोगों को यही रखे रखा नहीं जा सकता, दिल्ली वापस करने के लिए भी उधर उनके पास साउदी का टिकट है,' मंत्री ज्ञवाली कहते हैं- 'न तो वे होटेक क्वारेन्टीन में रहते हैं, भारत में इस बुरी तरह से संक्रमण फैला है।'

काठमांडू प्रवेश करनेवाले भारतीयों को लेकर रातोपाटी की मंत्री ज्ञवाली से हुई संक्षिप्त बातचीत-


नेपाल में हवाई उड़ानों के बंद होने के बाद काठमांडू में अटके भारतीय नागरिकों का उद्धार करके उन्हें दिल्ली पहुँचाना ठीक ही होता। परन्तु भारतीय अभी साउदी अरब की ओर जा रहे हैं। काठमांडू के होटेल्स में अभी भी हजार से भी अधिक भारतीय हैं। इससे क्या कोरोना का जोखिम बढ़ने का खतरा नहीं है ?

इस बीच हुआ यूँ कि साउदी अरब ने भारत की उड़ानों को रोक दिया जिसके बाद बाहर जानेवाले भारतीयों ने नेपाल को ट्रांजिट बनाया। उस समय कि परिस्थिति में नेपाल होकार जानेवालों पर मनाही नहीं थी। नेपाल की उड़ाने हो ही रही थीं। इससे एयरलाइन्स को मुनाफा ही होगा। फिर सामान्य अवस्था होने पर उन लोगों को रोकने की बात भी नहीं हुई।
तत्पश्चात भारत में एकाएक कोरोना संक्रमण की मात्रा अति तीब्र गति से बढ़ी और हमने सड़क मार्ग को बंद किया। फिर हवाई मार्ग वालों को भी अब नेपाल से नया ट्रांजिट नहीं होसकेगा कहा।

उस समय तक यहाँ 12 हजार 13 हजार भारतीय आ चुके थे। उसके बाद हम लोगों ने 4-5 दिन का गैप रखा। अब नए ट्रांजिट को भी अनुमति नहीं दी जाएगी। हाँ यहाँ आ चुके भारतियों को हम लोगों ने 5-7 दिनों तक वापस जाने की अनुमति दी। विमान चार्टर्ड करके वे जाने को तत्पर हुए किन्तु इतना सब कुछ करने के बाद भी कोई 1500 से 2 हजार तक भारतीय रुके हुए हैं। अर्थात ये भारतीय उस समय तक की अवधि में जानेवालों की लिस्ट में न पड़ सके।

अब मुसीबत क्या है कि उन लोगों को यहीं रखे रखा भी नहीं जा सकता तथा दिल्ली भेजने पर भी इनके पास उधर का टिकट है। उन लोगों के पास वीजा है, आर्थिक लगानी भी वे ही करेंगे। ये मामला कुछ मानवीय संवेदनशील भी हुआ। अंततः ये कामदार ही है बेचारे दुःख प्राप्त लोग हैं। कभी कभी हम लोगों को भी रेस्क्यू कर दीजिये कहना पड़ता यही। कभी कभार हम लोगों ने भारत से रेस्क्यू मदद ली भी है। इसी कारण यहाँ आ चुके लोगों को मानवीयता के सम्बन्ध से खाली कर देने के लिए कहा गया है।

अभी काठमांडू में रह रहे भारतीय अब कब तक तीसरे देशों को जा सकेंगे ?
अब कुछेक दिनों में जा चुकेंगे। इन्हें भेजने लगने के तीन-चार दिन हो गए होंगे। अब दो हजार से कम ही लोग होंगे। किसी की रिपोर्ट के अनुसार अब 1400-1500 बांकी हैं ऐसे में अब अधिकतम 10 उड़ाने होने पर तो ये चले ही जायेंगे।

परन्तु साउदी सहित अन्य खाड़ी देशों के कामदार जो छुट्टी में नेपाल आये हैं वे तो अपने काम पर नहीं लौट पाए हैं साथ ही उधर खाड़ी देशों में वीजा ख़त्म होनेवाले लोग भी नेपाल नहीं आ पा रहे हैं ?
वो हमारा अलग ही प्रबंध है।
भारतीयों को साउदी लेकर गए विमान उधर से रिक्त ही वापस आ रहे हैं क्या उधर से नेपालियों को नहीं लाया जा सकता था ?

नहीं, वैसा तो नहीं किया जा सकता। ऐसा करने से क्या होगा कि पिछले साल भी हम लोगों पर जगह जगह से दबाव पड़ा था। यहाँ से हमने ऑट्रेलिया भेजा। विभिन्न स्थानों पर भेजा। हमारे द्वारा अंतररष्ट्रीय उड़ानों को रोके जाने के बाद ये उड़ाने तो एक किस्म से आपातकालीन उड़ानें हैं अभी हम रेगुलर उड़ाने तो कर ही नहीं रहे हैं। ऐसा करने पर क्या होगा कि रिक्त स्थान पर तो लोग आ सकेंगे लेकिन इसी में लोगों के बीच मारामार होगी। प्राथमिकता में किसे रखा जाये इसका निर्णय भी कठिन।

कितने ही लोगों का कहना है कि भारत के साथ किये गए एयर बबल समझौते के कारण उन लोगों को नहीं रोका जा सका ?
ऐसा नहीं है। एयर बबल तो बस नेपालियों के भारत जाने तथा भारतीयों के नेपाल आने तक सीमित है। तीसरे देश का ट्रांजिट इस समझौते के अंतर्गत शामिल नहीं है। बस इतना ही कहें कि बीच में हम लोगों ने थोड़ी ढील दी।
भारत सरकार अथवा भारतीय दूतावास के दबाव में पर्यटन मंत्रालय द्वारा उन लोगों को तीसरे देश जाने की अनुमति नहीं दी ?
नहीं। दबाव की बात नहीं। उन लोगों द्वारा रिक्वेस्ट किया जाना स्वाभाविक है। उन लोगों द्वारा रिक्वेस्ट की गई उसके बाद हम लोगों ने किया। दबाव की कोई भी बात ही नहीं। ये हमारा अपना निर्णय है।

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