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हवा में 10 मीटर तक फैल सकता है कोरोना :  ड्रॉपलेट से 5 गुना अधिक दूरी तक फैलता है एयरोसोल

person access_timeMay 20, 2021 chat_bubble_outline0

एजेंसी। कोरोना संक्रमित व्यक्ति के एयरोसोल 10 मीटर की दूरी तक फैल सकते हैं जबकि ड्रॉपलेट्स 2 मीटर तक ही जाते हैं। भारत में कोरोना के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन के ऑफिस से जारी गाइडलाइंस में कहा गया है कि जिन लोगों में कोरोना के लक्षण नजर नहीं आते, वे भी संक्रमण फैला सकते हैं। इसलिए लोग कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करें।

जिन जगहों पर वेंटिलेशन की अच्छी सुविधा होती है, वहां किसी संक्रमित से दूसरे में संक्रमण फैलने का खतरा कम रहता है। साथ ही कहा गया है कि खिड़की-दरवाजे बंद रखकर AC चलाने से कमरे के अंदर संक्रमित हवा इकट्ठी हो जाती है और दूसरे लोगों को संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

संक्रमित व्यक्ति की नाक से ड्रॉपलेट्स और एयरोसोल के रूप में निकलने वाले सलिवा और डिस्चार्ज संक्रमण फैलने की मुख्य वजह होते हैं, लेकिन बाहर की हवा अंदर आ रही है तो संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।

संक्रमित के ड्रॉपलेट्स अलग-अलग सतहों पर लंबे समय तक रह सकते हैं। इसलिए दरवाजों के हैंडल, लाइट के स्विच, टेबल-कुर्सी और फर्श को ब्लीच और फिनाइल जैसे डिसइन्फेक्टेंट्स से साफ करते रहें।

क्या है एयरोसोल ? ड्रॉप्लेट्स और एयरोसोल में क्या है फर्क ?
एयरोसोल भी ड्रॉपलेट्स ही हो हैं और ड्रॉपलेट्स भी एयरोसोल। आकार के सिवा दोनों में कोई फर्क नहीं होता। वैज्ञानिक पांच माइक्रोन से कम आकार के ड्रॉपलेट्स को एयरोसोल कहते हैं। इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि रेड ब्लड सेल के एक सेल का डायमीटर पांच माइक्रोन होता है, जबकि इंसान के एक बाल की चौड़ाई 50 माइक्रोन होती है।

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