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सम्पादकीय

राजनीति बहुत हो गई, अब महामारी की तरफ ध्यान जाये

person access_timeMay 14, 2021 chat_bubble_outline0

रातोपाटी

काठमांडू। नए वर्ष 2078 के आने के साथ ही इस छोटे से देश में कोरोना महामारी का प्रकोप एकाएक चरम पर पहुंच गया। अभी देश में चारों तरफ से ऑक्सीजन के हाहाकार की खबरे ही मिल रही हैं। बीमारों को अस्पताल में उपचार न मिल पाने के कारण उन्हें अकाल में मृत्यु का वरन करना पड़ रहा है। अब तो दैनिक दो सौ से भी अधिक लोगों की जानें जाने लगी हैं। 73 जिलों में निषेधाज्ञा की घोषणा किये जाने के कारण आर्थिक गतिविधियां ठप्प हैं। निम्नवर्गीय लोगों के भूखें मरने की स्थिति आने जा रही है। महामारी के ऐसे विकराल रूप में देश भर फैले होने की अवस्था में भी देश के अगुवा कहलानेवाले लोग पूरे महिने सत्ता के जोड़-घटाव में उलझे रहे जिससे देश की जनता में एक किस्म की निराशा ने घर बना लिया है। मात्र केंद्रीय नहीं प्रदेश सरकार भी महामारी की फ़िक्र ही न करके सत्ता के ही खेल में उलझी हैं। इन लोगों के ऐसे क्रियाकलापों ने जनता में एक गंभीर सवाल पैदा कर दिया है कि क्या इस देश में सरकार नाम की चीज है भी...

आज वैशाख मासांत का दिन। आज ही प्रधानमंत्री ओली फिर से अल्पमत की सरकार के प्रधानमंत्री के रूप में फिर से शपथ लेने जा रहे हैं। अब जेठ महीने तक संसद में जोड़ घटाव के किसी खेल की जरुरत नहीं है।

संभवतः मंत्री बनने की दौड़ धूप की भी आवश्यकता न होगी। इस कारण अब से एक महीने सरकार को राजनीति को भूलकर कोरोना नियंत्रण पर ध्यान देने की जरुरत है। ऑक्सीजन के अभाव तथा अस्पतालों को बचाने की ओर आज के दिन से ही ध्यान देना चाहिए।

सत्ता को गिराने और बचाने के खेल के कारण जनता की सुरक्षा पर ध्यान ही नहीं जा पा रहा है। इस गलती को अब तुरंत ही संभाला जाना चाहिए। वर्तमान में सरकार को जो काम सबसे पहले करना चाहिए वो है ऑक्सीजन का बंदोवस्त। इसके साथ ही संक्रमितों के उपचार हेतु अस्पताल तथा शैयाओं की व्यवस्था करना। अगर इस ओर अब भी ध्यान न पहुंचाया गया तो वह भयावह स्थिति आ सकती है जो विज्ञान द्वारा पहले से ही अनुमानित है।

मात्र सरकार ही नहीं विपक्षी दलों को भी आज से ही सत्ता के जोड़ घटाव को छोड़कर जनता की सेवा में लगना जरुरी है। अब दल के नेताओं को रिसोर्ट में बैठकर सुस्वादु भोजन करके बैठने की वजाय अस्पतालों का निर्माण करने की अवस्था आ गई है। ऐसे संकट के समय में सरकार की आलोचना से भरी एक विज्ञप्ति निकालकर विपक्षियों की जिम्मेवारी पूरी नहीं हो जाती। पार्टी के देश भर के कार्यकर्ताओं को जनता की सेवा में परिचालित करना होगा। प्रतिनिधियों द्वारा अपने निर्वाचन क्षेत्र की जनता द्वारा भोगे जा रहे कष्टों की तरफ ध्यान देना होगा। इस काम में एमाले, कांग्रेस, माओवादी, जसपा, राप्रपा, जनमोर्चा, नेमकिपा, विवेकशील साझा आदि सभी दलों को आज से ही ठोस रूप में जनता की सेवा में लगना होगा।

ऑक्सीजन का हाहाकार आखिर क्यों हो रहा है तथा इसका समाधान कैसे किया जा सकता है के विषय पर पूरे राष्ट्र का ही ध्यान जाना चाहिए। इसमें अगर जनशक्ति का अभाव हो रहा है तो राजनीतिक दलों को इसके लिए सामूहिक प्रयत्न करने की जरुरत है। इसी तरह बाजार में हो रही कालाबाजारी के नियंत्रण के लिए सुरक्षा-कर्मियों तथा दलों को सहयोग करना जरुरी है।

पिछले लॉकडाउन के समय काठमांडू घाटी तथा बाहरी जिलों में मजदूर तथा विपन्न वर्ग के लिए राहत वितरण के  कार्यक्रम हुए थे ऐसी राहत वितरण कार्यक्रम में स्थानीय सरकारें तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्त्ता भी सहभागी हुए थे। परन्तु इस बार निषेधाज्ञा की मार में पड़े छटपटा रहे लोगों की चीत्कार की तरफ कहीं किसी का भी ध्यान नहीं जा रहा है। केंद्र, प्रदेश तथा स्थानीय सरकारों के साथ राजनीतिक दल तथा उनके भ्रातृ संगठनों को तत्काल ही ऐसे समुदाय की पहचान करके उन लोगों के लिए राहत का प्रबंध करने की ओर अग्रसर होना चाहिए। गरीब जनता के चूल्हे तक सरकार का पहुँचना जरुरी है।

महामारी के समय जनता की सुरक्षा तथा उनका बचाव करना सरकार का प्रथम कर्तव्य है। ऐसे समय में  अंतर्राष्ट्रीय समुदायों से टीकों की मांग करके जनता को बचाने के काम में जुटने की आवश्यकता के वक्त सरकार सत्ता बचाने की जद्दोजहद में लगना, ऐसी परिस्थिति का निर्माण करना वास्तव में ही विडम्बनापूर्ण है। परन्तु अब से एक महीने तक ओली सरकार को सेवा करने का मौका मिला है। इस अवसर का सदूपयोग करते हुए टीका तथा अन्य स्वास्थ्य सामग्री के आयात के लिए कूटनीतिक पहल करने की सख्त जरुरत है।

ऐसे कार्य के लिए सरकार को पक्षी दलों से भी आवश्यक सहयोग लेना चाहिए साथ ही सभी संयंत्रों को परिचालित करके पहल को आगे बढ़ाना चाहिए।

देश के अंदर चल रहे ऑक्सीजन के अभाव को आखिर कैसे पूरा किया जा सकता है, अस्पतालों का उचित प्रबंधन कैसे किया जाय तथा संक्रमितों की संख्या घटाने के लिए सरकार को आज से ही सभी दलों के साथ मिलकर, अवश्यक पड़ने पर केंद्र से लेकर वार्ड तक सर्वदलीय संयंत्र बनाकर काम करे। अगर ऐसा किया जा सका तो राष्ट्रीय एकता भाव के साथ अपने साझा शत्रु कोरोना के साथ लड़ा जा सकता है। ऐसा करने पर आम जनता में भी सरकार और दल हमारे साथ है की भावना का विकास होगा। वे सोच सकेंगे की अंततः हमारे देश में भी सरकार है। जनता  में उत्साहबर्धन होगा तथा जीवित रहने के आत्मविश्वास का सृजन होगा।

महामारी के समय जनता की सुरक्षा को पहली प्राथमिकता का विषय बनाया जाना चाहिए। यदि देश में मनुष्य (जनता) ही न रहे तो राजनीति किसके लिए, काहे के लिए ? ऐसा नहीं कि इस कोरोना ने मात्र सर्व साधारण को अपना ग्रास बनाने का चयन किया है बल्कि अभी पिछले कुछ दिनों से कोरोना के कारण जन प्रतिनिधियों की भी मौत होने लगी है।

अब नवगठित सरकार द्वारा अगर इस एक महीने अच्छी तरह काम किया गया, महामारी को जीता जा सका अथवा अगले महीने भी महामारी से लड़ने की जरुरत हुई तो इसी अल्पमत की सरकार को विपक्षियों द्वारा भी विश्वास का मत देने से कोई भी फर्क नहीं पड़ेगा।

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