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खाने में नमक का प्रयोग करें सीमित- विश्व स्वास्थ्य संगठन

डब्ल्यूएचओ का कहना है कि लोगों को प्रतिदिन 5 ग्राम से कम सोडियम का प्रयोग करना चाहिए, यदि ये 2 ग्राम से कम है तो और भी बेहतर है।

person access_timeMay 07, 2021 chat_bubble_outline0

खाने और पीने की चीजों में नमक का ज्यादा इस्तेमाल हृदय रोग और स्ट्रोक का कारण बन रहा है। इसकी वजह से लोगों में हृदय रोग और स्ट्रोक के मामले ज्यादा आ रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बुधवार को खाने में सोडियम सामग्री को सीमित करने के लिए नए दिशा निर्देश जारी किए हैं।

ज्यादा नमक के सेवन से होती हैं इतनी मौतें

एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर अनुमानित 11 मिलियन मौतें हर साल खराब आहार यानी खराब डाइट की वजह से होती हैं।
इनमें से 3 मिलियन ऐसे मामले हैं जो अपनी डाइट में सोडियम (Sodium) की मात्रा ज्यादा ले रहे थे।

निर्मित खाद्य सामग्री में होता है ज्यादा सोडियम का प्रयोग

डब्ल्यूएचओ ने बताया कि कई अमीर देश और ज्यादातर कम आय वाले देशों में लोग निर्मित खाद्य सामग्री यानी मैन्यूफैक्चर्ड फूड का प्रयोग करते हैं, जैसे ब्रेड, सेरियल, प्रोसेस्ड मीट और चीज जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स। इनमें अधिक मात्रा में सोडियम (Sodium) का इस्तेमाल किया जाता है। डब्ल्यूएचओ का कहना है- सोडियम क्लोराइड (Sodium Chloride) नमक का रासायनिक नाम है और सोडियम एक खनिज है, जो शरीर में पानी की मात्रा को नियंत्रित करता है।  

सोडियम के सेवन के बारे में डब्ल्यूएचओ के डायरेक्टर-जनरल टेड्रोस एडनॉम घेब्येयियस ने कहा, 'नमक के सेवन को कम करने और लोगों को सही भोजन के विकल्प उपलब्ध कराने के लिए नीतियां बनाई जानी चाहिए।'

टेड्रोस ने आगे कहा, 'खाद्य और पेय उद्योग को प्रोसेस्ड फूड में सोडियम के स्तर को कम करना होगा।' खाने और पीने की 64 चीजों के लिए डब्ल्यूएचओ ने एक नया बेंचमार्क तैयार किया है। इसके माध्यम से 194 सदस्य देशों के अधिकारियों को जागरूक किया जाएगा, ताकि वे खाद्य और पेय पदार्थ बनाने वाली कंपनियों को मॉनीटर कर सके।

इस अनुपात में लेना चाहिए नमक

उदाहरण के तौर पर प्रति 100 ग्राम पोटेटो क्रिस्प में 500 मिली ग्राम सोडियम (Sodium) होना चाहिए। बेंचमार्क के अनुसार पाईज और पेस्ट्री में 120 मिलीग्राम और मीट में 360 मिली ग्राम सोडियम होना चाहिए। डब्ल्यूएचओ ने कहा, 'खाने में जरूरत से ज्यादा सोडियम सेवन करने से रक्तचाप बढ़ता है। हृदय रोग का खतरा बढ़ जाना इसका ही एक नतीजा है।

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