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पश्चिम बंगाल जनादेशः ममता की सरकार तीसरी बार

person access_timeMay 03, 2021 chat_bubble_outline0

एजेंसी। भारत के पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के चुनाव नतीजों ने साबित कर दिया कि लालच, पैसे, झूठे वादों, ताकत या धमका कर सत्ता हासिल नहीं की जा सकती। सत्ता में वही आ पाएगा जिसे जनता चाहेगी। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी तीसरी बार सरकार बनाएंगी। वैसे तो चुनाव चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में थे, लेकिन निगाहें सबकी बंगाल के नतीजों पर ही थीं। साल भर से राज्य में जिस तरह से चुनावी तैयारियां चल रही थीं, उससे इस राज्य की राजनीतिक अहमियत का पता चलता है।

गौरतलब है कि बंगाल की सत्ता हासिल करने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने सारे संसाधन झोंक डाले। लेकिन उस हिसाब के नतीजे नहीं आए। बंगाल की जनता ने कांग्रेस और वामदलों को भी लगभग शून्य कर दिया। किसके वोट किधर गए या ध्रुवीकरण के गणित ने कैसे काम किया, इन सवालों में अब ज्यादा उलझने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर तीसरी बार जनता ने ममता बनर्जी को सत्ता सौंपी है तो निश्चित ही उसके ठोस कारण हैं।

तृणमूल की इस बार की जीत ने ममता के लिए राष्ट्रीय राजनीति के दरवाजे खोल दिए हैं। भविष्य में वे विपक्ष का बड़ा चेहरा बन सकती हैं। इस जीत का यह संदेश गया है कि ममता बनर्जी के दस साल के शासन को लेकर राज्य में कोई सत्ता विरोधी कारक नहीं रहा। इसे भी देखना चाहिए कि आम जनता, खासतौर से गरीब तबके से ममता का सीधा जुड़ाव रहा। उनकी छवि शानो-शौकत वाली नहीं रही। वे जमीन से जुड़ी और एक जुझारू नेता मानी जाती हैं।

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