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सर्वदलीय संयंत्र के सम्बन्ध में चर्चा की जा सकती है : मंत्री ज्ञवाली

अभी बैठक करना कठिन है सभी अपने अपने स्थानों से जुटें

person access_timeMay 02, 2021 chat_bubble_outline0

काठमांडू। नेकपा माओवादी केंद्र द्वारा कोरोना महमारी के विरुद्ध लड़ने के लिए सर्वदलीय राजनीतिक संयंत्र बनाने की मांग करने पर भी सरकार ने इस सम्बन्ध में औपचारिक धारणा को सार्वजनिक नहीं किया है। परन्तु परराष्ट्रमंत्री प्रदीप ज्ञवाली ने महामारी साझा लड़ाई होंने के कारण इस सम्बन्ध में सोचे जा सकने की बात की है।
सर्वदलीय संयंत्र बनाने की मांग की जा रही है इस सम्बन्ध में सरकार की धारणा क्या है ? रातोपाटी के इस प्रश्न पर मंत्री ज्ञवाली ने कहा- आवश्यकता के पुष्ट होने पर इस बात पर बातचीत की जा सकती है।
क्योंकि ये साझा लड़ाई है सभी राजनीतिक दलों को इस में संलग्न होने के लिए हम लोगों ने आवाह्न भी किया है। 'परन्तु अभी की अवस्था में बैठक तथा भौतिक रूप से विचार विमर्श करना कठिन होने के कारण सरकार ने इस बारे में नहीं सोचा है, बताया। उन्होंने कहा- इस किस्म के संयंत्र को बनाने के लिए अभी बैठक आदि का करना एक स्थान पर एकत्रित होना कठिन है। इसी कारण सरकार ने जो जो जहाँ जहाँ है वही से राजनीतिक दल और सामाजिक संस्थाएं सब अपने अपने संयंत्र आरम्भ करें। अभी ही अलग से किसी संयन्त्र को बनाने के निष्कर्ष पर सरकार नहीं पहुंची है। परन्तु हम आवश्यक परामर्श करेंगे।'

सरकार का नेतृत्व करनेवाली पार्टी एमाले ने कोरोना नियंत्रण कैसे किया जाय सोचा है तो ? इस सम्बन्ध में रातोपाटी ने एमाले प्रवक्ता एवं परराष्ट्र मंत्री ज्ञवाली से की गई बातचीत को संक्षिप्त रूप में यहाँ प्रस्तुत किया गया है।

सत्तारूढ़ नेकपा एमाले पार्टी की हैसियत में कोरोना के नियंत्रण के सम्बन्ध में क्या कर रही है ?
अभी अभी संपन्न दशवां महाधिवेशन आयोजक कमेटी की बैठक द्वार विशेष निर्देशन जारी किया गया है। इसमें हमारी पार्टी के अंतर्गत की सभी पार्टी, कमेटी और जनसंगठन, जन प्रतिनिधि तथा कार्यकर्त्ता आदि को भी सरकार द्वार जारी किये गए स्वास्थ्य मापदंडों का अनिवार्य रूप में पालन करने के लिए कहा गया है।

दूसरी बात- खुद सुरक्षित रहते हुए स्वास्थ्य जनचेतना को बढ़ाने के लिए निर्देशन दिया गया है। उसमें खास करके ग्रामीण क्षेत्रों में बाहर से आनेवाले लोगों को अनिवार्य रूप से क्वारेंटीन में रहने की व्यवस्था करना, क्वारेंटीन में व्यक्ति के रह रहे होने को सुनिश्चित करना, स्वास्थ्य समस्या दिखाई पड़ने पर स्वास्थ्य चौकी में ले जाने की व्यवस्था करना, स्वयं सेवक के रूप में काम करना जैसे कुछ विशेष निर्णय किये हैं। इन निर्णयों के अनुसार साथी लोग इस कार्य में लगे भी हैं।  
पार्टी का ये निर्णय तथा निर्देशन क्या क्रियान्वित भी हुआ है ?
ये निर्णय कार्यान्वयन में जा चुका है। नीचे नीचे की पार्टी कमेटी की इकाइयों के मित्र इस निषेधाज्ञा का पालन करवाने मास्क अनिवार्य लगाने, दूरी कायम कराने के लिए परिचालित हो चुकने के समाचार हम लोगों तक पहुँच चुके हैं।  
आप तो सत्तारूढ़ दल के प्रवक्ता के साथ ही सरकार के मंत्री भी हैं। सरकार द्वार लगभग 20 जिलों में निषेधाज्ञा लागू की गई है परंतू लोगों को उपचार हेतु अस्पताल तथा शैया न पा सकने के कई समाचार भी आ रहे हैं। इसी तरह कॉन्ट्रैक्ट ट्रेसिंग का काम भी न होने के भी समाचार है। सरकार क्या कर रही है ?
हमने पिछले साल से ही इस काम को निरंतरता दे रखी है। पिछले समय में जिस अनुपात में संक्रमण बढ़ा है। इसके लिए हमारी तैयारी तथा संक्रमण के बीच रिक्तता दिखी जरूर है।
पिछले समय कुछ जल्दी ही लॉकडाउन होने के कारण हमें कुछ अनुकूलता हुई थी। लॉकडाउन के दो महीनों के बाद बीमारों को अस्पताल लाने की स्थिति आई थी उस समय अन्य किस्म के बीमार अस्पताल में मानों नहीं के बराबर ही थे। परंतू अभी के समय में इस सम्बन्ध में कुछ जटिलता है। क्योंकि अभी कुछ दिनों पहले तक अवस्था एकदम सामान्य थी। अभी अन्य किस्म के बीमार अस्पतालों में बहुतायत से हैं जिसके कारण शैया तथा ऑक्सीजन का आभाव दिखाई दे रहा है। परंतू फिर भी हम ऑक्सीजन जैसी क्रिटिकल केयर में प्रयोग की जानेवाली औषधियों के लिए मित्र राष्ट्रों से संपर्क कर रहे हैं।
अभी की स्थिति को देखते हुए अवसरः भयावह होगी जैसा दृश्य दिखाई दे रहा है। ऐसी अवस्था में अकेले सरकार के बलबूते कुछ भी नहीं हो सकेगा। ये स्पष्ट है कि सर्वदलीय संयंत्र की मांग भी हो रही है। सरकार द्वारा सर्वदलीय राजनीतिक संयंत्र के गठन की कोई तैयारी नहीं की गई है ?

आवश्यकता के पुष्ट होने पर उस पर बातचीत की जा सकती है। क्योंकि ये साझा लड़ाई है। सभी राजनीतिक दलों को इसमें लगाने के लिए हम लोगों ने आवाह्न भी किया है। परंतू इस किस्म के संयंत्र को बनाने के लिए अभी भौतिक रूप से बैठक करना, भेट करना संभव नहीं है। इस लिए जो जहाँ है वहीं से इसके लिए काम करे।  
स्थिति बिकराल बनती जा रही है। कॉन्ट्रैक्ट ट्रेसिंग नहीं है, सीमा नाके खुले हैं, ऐसा लगता है निषेधाज्ञा लगाने के बाद सरकार की जिम्मेदारी ख़त्म हो गई। आपको लगता है कि ऐसी परिस्थिति में कोरोना की जंग जीती जा सकेगी, क्या आपको लगता है?
आपकी बात आंशिक मात्र सत्य है। कॉन्ट्रैक्ट ट्रेसिंग नहीं हुई है ये बात गलत है टेस्टिंग हो रही है। हमारी पूरी क्षमता दैनिक 20 हजार है उसमें 13 हजार से 14 हजार की ट्रेस्टिंग हो रही है।
सीमा की बात पर अहम- अपने ही नागरिकों से तुम लोग भारत से स्वदेश न आओ नहीं कह सकते हैं। हाँ जो निश्चित किये गए नाके हैं उन्हीं से आने का अनुरोध जरूर किया है। सीमा नाकों पर स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जा रहा है। हम इन सब चीजों के लिए स्वयं नागरिकों का सहयोग अपेक्षित है। 

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