हिंदी संस्करण

'गाईजात्रा' (नेपाल का एक त्यौहार) देखिये तो ! प्रधानमंत्री प्रदेशों के मंत्रियों का व्यापार कर रहे हैं- चित्र बहादुर केसी

गण्डकी प्रकरण में पार्टी द्वारा चेक जाँच करके सत्य तथ्य जनता को बताया जायेगा

person access_timeApr 30, 2021 chat_bubble_outline0

रातोपाटी संवाददाता
काठमांडू। राष्ट्रीय जनमोर्चा के अध्यक्ष चित्र बहादुर केसी ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली पर मंत्रियों के व्यापार करने का आरोप लगाया है। गण्डकी प्रदेश में 'सांसदों के गायब होने का प्रकरण' के सम्बन्ध में रातोपाटी से बातचीत करते हुए केसी ने अपने दल के सांसदों के पार्टी के अनुशासन में रहने का दावा किया है।  

केंद्र तथा प्रदेश सरकार दोनों को मिलकर इस कोरोना की महामारी के विषम काल में यहाँ मंत्रियों का व्यापार हो रहा है देखिये ये 'गाईजात्रा'। जनमोर्चा के अध्यक्ष केसी ने रातोपाटी से बातचीत करते हुए कहा- देश के प्रधानमंत्री ने स्वयं ही प्रदेश के मंत्रियों का व्यापार किया है।'

केसी ने आगे कहा- 'राष्ट्रीय जनमोर्चा 2051 साल से संसद में गंदे खेलों को देखती आ रही है। परन्तु ऐसे गंदे खेलों से हमारी पार्टी सुरक्षित ही दिखती है।'

गण्डकी में जनमोर्चा पर लगा दाग
गण्डकी प्रदेश के मुख्य मंत्री पृथ्वी गुरुंग के विरुद्ध अविश्वास के प्रस्ताव पर बुधवार सांसद में मतदान करने की कार्यसूची थी। प्रदेश सरकार का बहिर्गमन निश्चित हुए समय पर अविश्वाश के प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करनेवाले राष्ट्रीय जनमोर्चा के एक सांसद कहीं बिक्रम शाही एकाएक लापता हो गए।

उनके लापता होने पर प्रदेश में खलबली मची बहुत किस्म के अटकलपच्चू लगाए गए। सांसदों  की बैठक ही अनिश्चित काल के लिए स्थगित की गई। फिर पार्टी के सांसद शाही की खोज में लगे।  

खोज करते जाने पर शाही पोखरा के ही एक अस्पताल में आईसीयू में भर्ती होने की बात शाम को पता चली। परन्तु अस्पताल प्रशासन द्वारा जनमोर्चा केही प्रतिनिधियों को भी शाही से मिलने नहीं दिया। इस वारदात के बाद और अधिक शंकाएं-उपशंकाएं पैदा होने लगी। बहुत से लोगों तथा राष्ट्रीय जनमोर्चा के ही जिम्मेदार नेताओं ने सांसद शाही को सत्ता पक्ष द्वारा गड़बड़ी करने की प्रतिक्रियाएं आने लगी।
और भी अधिक मजेदार बात तो क्या है  उसी समय शाही के कोरोना परीक्षण की दो अलग अलग रिपोर्ट सार्वजनिक हुई। जिसने शंका करनेवालों को और भी अधिक बल पहुँचाया।  

फर्क फर्क रिपोर्ट्स का सार्वजनिक होना, बीमार कहे जानेवाले शाही को किसी से मिलने न देना जैसे रहस्यमय क्रियाकलापों के हो रहे होने के वक्त सांसद शाही ने खुद ही गुरुवार सवेरे खुद ही राजमो गण्डकी के प्रदेश इंचार्ज को फोन करके खुद के अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी दी।

सांसद शाही कैसे पार्टी के संपर्क में आये ? क्या वे बीमार हुए हैं या कोई नाटक का मंचन हो रहा है आम जनता के द्वारा शंका किये गए रूप में की सांसद खरीद फरोख्त में राजमो भी तो सनी नहीं है ? अब गण्डकी प्रकरण में पार्टी क्या करेगी से जुड़े सवालों को लेकर रातोपाटी ने राजमो के अध्यक्ष चित्र  बहादुर केसी से पूछा-

यहाँ हम दे रहे हैं उनके साथ हुई बातचीत का संक्षेपीकरण

गुरुवार अचानक लापता हुए सांसद शाही के साथ क्या आपका संपर्क हुआ है ?
मुझसे तो संपर्क नहीं हो सका है परन्तु वे पार्टी के संपर्क में आये ऐसी मुझे खबर मिली है।  

कैसे और कब आये ?
आज सवेरे उन्होंने खुद ही हमारे इंचार्ज को फोन किया। मेरे फोन करने पर पहले तो फोन व्यस्त आया बाद में करने पर फोन बंद निकला।
इंचार्ज को फोन करके उन्होंने क्या कहा ?
मैं बीमार हुआ हूँ। अभी अस्पताल में हूँ। इसी बात की जानकारी मुझे वहां के इंचार्ज ने कराई।

उनके खुद के बीमार होने की बात कहने पर विश्वास करने की बाध्यता ही है। परन्तु एक ही समय में उनकी दो अलग अलग रिपोर्ट्स का सार्वजनिक होना क्या उनके वास्तव में बीमार ही होने या अन्य कोई गड़बड़ी होने जैसा आपको नहीं लगता ?

यदि वे संपर्क में न आते तो और भी अधिक शंका होती। संपर्क में आकर अस्पताल गया हूँ कहने पर तो बात को अन्यथा लेने का भी प्रश्न नहीं उठता। अपनी बीमारी का हबाला देते हुए अपने इंचार्ज से संपर्क बनाये रखने पर किसके मन में क्या है को लेकर अधिक सोच भी तो नहीं करनी चाहिए।

जहाँ तक बात रिपोर्ट की है भैरहवा में टेस्ट करने पर नेगेटिव तथा काठमांडू में टेस्ट कराने पर पॉज़िटिव रिपोर्ट आई है कहा गया है। पर ऐसा नहीं हो सकता ये भी तो नहीं कहा जा सकता।  हाँ उस अस्पताल को बीमार से मिलने न देना, अस्पताल को ही घेरकर नहीं रखना चाहिए था। इस सम्बन्ध में हमारे साथी शंकर बराल की सीडीओ के साथ कहासुनी भी हुई।  

गण्डकी प्रकरण में गुरुवार जो भी हुआ उससे अच्छा सन्देश नहीं गया कि राजनीतिक वृत्त में चर्चा है क्या आपको ऐसा नहीं लगता ?
इस विषय को दो ढंगों से देखा जाना चाहिए। एक उन्होंने खुद के बीमार होने, खुद को कोरोना होने की बात कही है साथ ही पार्टी के निर्णय में मैं कुछ भी दाएं-बाएं नहीं करूँगा, कहा है। इस कारण और शंकाएं अभी ही न करें। परन्तु नेपाल की राजनीति में 2046 साल के बाद ऐसी घटनाओं में हम डरे हैं इसलिए विभिन्न शंकाओं का उठना स्वाभाविक भी है।

सिंह दरबार  में सांसदों की खरीद फरोख्त, पार्टी अदल-बदल, केंद्र से केलर प्रदेश तक मंत्रियों का व्यापर होना- ऐसे क्रियाकलापों से सभी के मन में दर तरस और शंका होना स्वाभाविक है। स्वयं प्रधानमंत्री ने प्रदेश के मंत्रियों का व्यापार किया है। इतना ही नहीं नेता अपनी पार्टियों के साथ विश्वासघात करके पद तथा प्रतिष्ठा के लिए दूसरी पार्टी में चले जाना कोई बड़ी बात ही नहीं रह गई। इस कारण इस किस्म के दूषित वातावरण का शिकार कहीं राष्ट्रीय जनमोर्चा भी तो नहीं हो रही है का डर सभी लोगों के मन में उठ रहा है।  
क्या राष्ट्रीय जनमोर्चा द्वारा अब इस प्रकरण का सत्य तथ्य खोजकर सार्वजनिक किया जायेगा अथवा इस काम को ऐसे ही छोड़ दिया जायेगा ?
खोजबीन होगी, यूँ ही नहीं छोड़ा जायेगा। खोजबीन करके सत्य तथ्य नेपाली जनता के सामने रखा जायेगा। खोजबीन की प्रक्रिया आगे भी बढ़ चुकी है। अपनी पार्टी के बीमार सांसद को मिलने जाने पर आखिर क्यों मिलने नहीं दिया गया ? पुलिस के क्यों घेराबंदी करके रखा? ऐसा खेल हुआ तो आखिर हुआ क्यों ? इसकी तो खोज तलाश करके सत्यतथ्य को बहार लाना ही होगा। ये काम हम करेंगे।

किसी के दबाब में वास्तविकता को कहीं छिपाया तो नहीं जायेगा ?

नहीं, ऐसा नहीं होगा। इस घटना के सम्बन्ध में जनता में जिज्ञासा जाग रही है हमें इसकी वास्तविकता ये है कहकर जनता को बताना ही होगा। केंद्र तथा प्रदेश सरकार को जिस समय मिलकर कोरोना महामारी के साथ मुकावला करना चाहिये उस समय ये मंत्रियों का व्यापार करते हैं देखे ये कैसी गाईजात्रा ! राष्ट्रीय जनमोर्चा 2051 साल से संसद में है। इस गंदे-भद्दे काम को देखती भी आ रही है। परन्तु ऐसे गंदे खेलों से हमारी पार्टी सुरक्षित ही दिखाई दे रही है।

हमारे पुराने सांसदों द्वारा पार्टी को छोड़कर जाने पर भी जब तक वे पार्टी में रहे पार्टी के निर्णयों तथा आदेशों का उलंघन कभी नहीं किया। परन्तु अभी जो दृश्य दिखाई दे रहा है उससे जनमोर्चा भी अन्य पार्टियों की ही तरह ही तो नहीं है का भ्रम पैदा हुआ है। इसीलिए किधर से, कैसे, क्या गलती हुई है हम जनता को बताएँगे।

कमेन्ट

Loading comments...