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क्या साल 2020 होगा पृथ्वी के अंत का समय : नासा की आशंका

person access_timeMar 19, 2020 chat_bubble_outline0

क्या साल 2020 पृथ्वी के अंत की शुरुवात है क्योंकि पहले कोरोना और अब अप्रिल में आनेवाला है एक बहुत बड़ा प्रलयकारी अस्वाराइड (धूमकेतु, उल्कापिंड) जो पृथ्वी के बहुत करीब से गुजरनेवाला है। इस अस्वाराइड का आकार हिमालय पर्वत श्रंखला से भी बड़ा बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि ये वैसाही अश्वाराइड है जो तब गिरा था जब पृथ्वी से डायनासोरों का अंत हुआ था तो क्या इस बार मानवों की बारी है? क्या ये इसबार पृथ्वी पर से मानवों की प्रजाति को समाप्त कर देगा ? पुराने रिकार्ड्स और खगोलविदों की मानें तो ये ऐसा अश्वराइड है कि अगर ये पृथ्वी से टकराया तो तीन बार तक जीवन समाप्त हो सकता है। एक ऐसा ही अश्वराइड आज से 6 करोड़ वर्ष पहले पृथ्वी से टकराया था और एक दशक तक के लिए पृथ्वी हिमयुग में चली गए थी। जो भी उस समय जीव और जीवन थे वे सभी समाप्त हो गए थे, उसी से भीमकाय विशाल डायनासोरो का अंत हो गया था ।.....तो क्या इस साल अप्रैल 29 तारिख को पृथ्वी का समूल नाश हो जायेगा? क्या पृथ्वी पर से मनुष्यों की आवादी हमेशा हमेशा के लिए शून्य हो जाएगी?

…नासा के द्वारा एक बेहद खास जानकारी जारी की गई है ये जानकारी खास होने के साथ ही बड़ी भयावह भी है जिससे खुद संसार के सुपर पावर कहे जानेवाले देश भी डरे हुए हैं जैसे कि रूस, अमेरिका, चीन में भी खलबली मची हुई है नासा  की इस रिपोर्ट से। 30 अप्रैल को एक विशालकाय, विशालकाय यानि हिमालय से भी बड़ा एक धूमकेतु (उल्कापिंड) पृथ्वी की कक्षा के बेहद करीब आनेवाला है। विदित है कि हमारी मनाव जाति ने, नासा के वैज्ञानिकों ने एक कैटेगिरी तय की है हजादर्स हैवनली बॉडी की। ऐसे धूमकेतु जो पृथ्वी के 75000 किलोमीटर के रेंज के समीप से होकर निकलते हैं जिनका आकार 100 मीटर से अधिक होता है उन्हें घातक सावित किया जाता है, उन्हें केटेगिरी 4 में रखा जाता है ; ऐसे उल्कापिंड, ऐसे धूमकेतु समग्र पृथ्वी को समूल नष्ट कर सकते हैं, पृथ्वी पर से समस्त जीवन को समाप्त कर सकते हैं पर यहाँ बात इससे बहुत आगे की है, बहुत ही गंभीर है। बताया जा रहा है कि जो उल्कापिंड, जो धूमकेतु अब 29 अप्रैल को पृथ्वी के नजदीक से गुजरनेवाला है उसका आकार चार किलोमीटर का है ; तो कहाँ 100 मीटर और कहाँ 4 किलो मीटर तो आकाश का 4 किलों मीटर का विशाल खंड, विशाल उल्का या कहें धूमकेतु पृथ्वी की और बड़ी द्रूतगति से बढ़ रहा है, नासा ने बताया है कि इसकी गति इतनी तीव्र है कि साधारणतः हम उस गति की कल्पना भी नहीं कर सकते। बताया है कि ये विशालपिंड 31 हजार प्रति किलोमीटर प्रति घंटे की गति से ये उल्कापिंड अंतरिक्ष की सैर कर रहा है और पृथ्वी की कक्षा के बहुत नजदीक तक जा रहा है।

नासा के वैज्ञानिको ने इसके आकार और गति की पुष्टि की है परन्तु नासा के वैज्ञानिक भी सटीक आंकलन और विश्लेषण नहीं कर पा रहे हैं कि सच में ही ये विशाल अश्वाराइड पृथ्वी की कक्षा से टकरा ही जायेगा। 75000 की दूरी का रेंज जिससे ये पिंड गुजरेगा बहुत ही कम है क्योंकि जब हम ब्रह्मांडीय दूरी के परिप्रेक्ष्य में बात करते हैं तो ये दूरी बहुत कम हो जाती है। तब 75000 किलोमीटर 75 इंच के बराबर हो जाता है। कहा है कि अगर बाल से भी बारीक़ फर्क इसकी दिशा में (रुट में) हो गया जरा सा भी फर्क हो गया इसके रुख में, इसकी दिशा में तो ये पृथ्वी की ओर रुख कर लेगा और तब जो भी करना होगा पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण को करना होगा और तब इसकी गति और भी तीब्र होने की बात बताई गई है।

तब ये पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण और भी तीब्र गति से खिंचा चला आएगा और जहाँ भी
इसका प्रभाव होगा वो पूरा देश, वह पूरा महादीप बर्बाद हो सकता है और वहां से उठनेवाले धूल के गुबार से पूरी पृथ्वी हिमयुग में जा सकती है
और समूची पृथ्वी से जीवन समाप्त हो सकता है। आज से 6.6 करोड़ वर्ष पहले ऐसा ही एक उल्कापिंड टकराया था पृथ्वी से और तब युकोटक नामक जो जगह है झील की जो मैक्सिको में है, वहां टकराया था इससे वहां कई मील लम्बा और कई मील चौड़ा एक गड्ढा हो गया था वो झील आज भी है आज भी वैज्ञानिक उस उल्का पिंड का अध्ययन करने के लिए इस झील का सहारा लेते हैं। उस समय एक दशक तक पृथ्वी पर धूल का गुबार बना रहा उससे पृथ्वी हिमयुग में चली गई थी। सूर्य की रौशनी पृथ्वी तक नहीं पहुँच पा रही थी ऐसे में कोल्ड ब्लडेड
 (ठन्डे रक्त वाले जानवर) उस वातावरण से अपने आप को बचा नहीं पाए थे उसी समय पृथ्वी के विशालकाय जीव डायनासोर का अंत हो गया था तो क्या अब 29 अप्रैल को होनेवाले इस उल्कापिंड से विचरण के खतरे में आने से हम गर्म रक्तवालों की भी मृत्यु हो जाएगी क्योंकि 30 अप्रैल को एक बहुत ही बड़ा अश्वाराइड पृथ्वी के बेहद करीब से गुजरने जा रहा है जिसे क्लास 4 डिक्लेयर कर दिया गया है। तो क्या साल 2020 पृथ्वी के अंत का वर्ष होगा ??? - एजेंसी

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