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एनआरएन में हुए भ्रष्टाचार के ऊपर छानबिन चल रही है

person access_timeFeb 05, 2020 chat_bubble_outline0

कुमार पंत, पिछले अक्टूबर में काठमांडू में आयोजित गैरअवासीय नेपाली संघ (एनआराएन) के विश्व सम्मेलन से अध्यक्ष में चुने गए थे । उनके पास संगठन की गिरती हुई साख से निपटने और साथ ही बढ़ती आर्थिक अराजकता को नियंत्रित करने के लिए अवसर हैं । एनआरएन को विश्व सम्मेलन में हुवे अस्वस्थ्य कम्पीटिशन र कमजोर परस्थितियाें से लेकर आम पब्लिक में नकारात्मक संदेश जारहे वक्त पन्त ने किस तरह काम कर रहे हैं ? एनआरएन किस तरह अपनी मार्यादा कायम करेगी ? इस विषय पर रातोपाटी के लिए एनआरएनए का अध्यक्ष कुमार पन्तको साथराजकुमार सिग्देल ने किए कुछ बातचित अंशः 

एनआरएनए काम करने से ज्यादा नेपाल में व्यस्त लगता है, सरकार से एनआरएनए की क्या उम्मीदें हैं ?

–गैरअवासीय नेपाली एसोसिएशन (एनआरएनए) विशेष रूप से, एनआरएनए द्वारा निर्धारित एजेंडा को पूरा करने के लिए राज्यका एजेंसियों के साथ चर्चा आवश्यक हैं । कुछ ऐसे एजेंडा हैं, जिस के लिए राज्य से चर्चा करना ही परेगा । नेपाल में सब से बडी समस्या कर्मचारी हैं, उस से हम लोगोका समस्यायें समाधान नही होसकता हैं । इसके लिए  उच्च निकाय के लोग से बात करना ही परेगा । चुनाव से नेतृत्व में आने के बाद हाल ही में मैने प्रधानमंत्री मिला हुँ । उनसे मिलने के बाद मैं उत्साहित हुँ । १० अर्ब बराबर के जो फन्ड हम लोग ला रहे हैं, उसका फाइल अभि भी उद्योग मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय में पडे हुए हैं । इसके बारे में प्रधानमंत्री जीको जानकारी भी नही हैं । उन्हों ने उस फाइल को तुरन्त आगे बढाने के लिए निर्देश दिए हैं, एनआरएनए से आने बाले लगानी को मत रोकों कहके अपने अधिकारीयों को मेरे सामने में निर्देश दियें हैं । इसि तरह एनआरएनए के लिए जो नागरिकताका व्यवस्था संविधान में किया गया हैं । उसके लिए अभि ऐन बनाना बाँकी हैं और निर्माण के पाइपलाइन में हैं । काम के शिलशिला में जो नेपाली विदेश में उसमें बहुतों नेपाली श्रमिक घाइते हैं, कितने को तो मौत भी हो गया हैं लेकिन उसका शब नेपाल तक नहीं ला पारहे हैं । उस घाइते के कैसे उपचार कराया जाए और मृतक को नेपाल कैसे लाया जाए इस पर सरकार के साथ एनआरएनए काम करना चाहते हैं । इस में भी प्रधानमंत्री पोजेटिभ हैं ।

आपका ये कहना चाहते हैं कि एनआरएनए ने जिन परियोजनाओं को आगे बढ़ाया है, वे संगठन के बजाय सरकार द्वारा विलंबित हैं ?
–हम लोग के तरफ सें कही विलंम्व नही हुवा हैं । हमे लगता है कि राज्य के जो प्रोसेस हैं वो थोरा झन्झट हैं । जदी करना हैं तो फास्टट्रयाक से जाना चाहिए । एनआरएनए बाले यहां सब दिन नहीं रह सकते हैं । सब दिन यहां आके प्रेसर नहीं दे सकते हैं न । इसि लिए एनआरएनए के विषय में राज्य गम्भीर हों इस के लिए मैं परराष्ट्र मंत्री से मिलके आग्रह किया हुँ । प्रधानमंत्री से भी बात किया हुँ । मंत्रालय के सचिवों से भी मै बात किया हुँ । अब आप लोगों काम नही रुकेगा प्रतिबद्धा जाहेर की हैं । 

आप लोग के उपर आरोप हैं कि एनआरएन बाले ज्यादा बोलते और काम कम करते हैं क्या ये सही हैं ?
–अब हम लोग ज्यादा बात नही करेगें, काम करके देखाएगें । इसके लिए हीं काठमांडु आके दिनरात मेहनत करता हुँ । लोक से मिलके अपना फाइल आगे बढा रहा हुँ । १० अर्ब लगानी के फन्ड के लिए आवश्यक नीति निर्माण करने हेतु मै खुद मंत्रालय में दौर लगा रहा हुँ । लाप्राक के वस्ती हस्तान्तर करवाने के लिए मै खुद सम्बन्धित लोगों से मिलता जुलता हुँ । रिजल्ट देखाने के लिए हीं मै काम में लगा हुँ । फन्ड को आगे बढाने के लिए राष्ट्र बैंक के डेपुटी गभर्नर से लेकर सिनियर अफिसर तक से मैले चर्चा किया हुँ । 

आप लोग पोखरा में फेस टु फेस मिटिङ किए हैं लेकिन आप लोगों के संघ में जो विवाद था वा अभितक समाधान नही हुवा हैं इसके बारेमा आप क्या कहना चाहते हैं ?
–पोखरा में जो बैठक हुवा हैं वो अर्गानाइजेशनका आन्तरिक मामला हैं । वो आन्तरिक बैठक था । वो बैठक में हम लोगों ने खलके बहस किए हैं । पहिले हम लोग तीन महिना में एक बार अनलाइन (स्काइप) के जरिए आइसीसी के मिटिङ करते हैं । इधर दो वर्ष से हम लोग फेस टु फेस बैठक करते बहुत सारे मुद्दों पर चर्चा करते हैं । अनलाइन मिटिङ मे सब बाट खुलके नही कर पाते हैं जितने खुलके फेस टु फेस मिटिङ में करते हैं । फेस टु फेस मिटिङ में बहुत अच्छे तरह से बातचित हुवा, कोई विवाद नही था । 

चुनाव मे जो आपका प्रतिद्वन्द्वी थे कुल आचार्य, उन्हो ने आप पर आरोप साधे हैं कि अर्गानाइजेशन में धाँधली हो रहे हैं क्या ये सही हैं ?
–पहला बात तो एनआरएन में आप ने जो प्रतिद्वन्द्वी बोले हैं वो नही होता हैं । राजनीतिक दल के जैसा पक्ष विपक्ष भी नही होते हैं । चुनाव के समय थोरा समय के लिए पक्ष विपक्ष देखा जाता है, वो सीर्फ चुनाव तक सिमित हैं । कुल आचार्य जी ने कौन सा प्रेसर में आएके धाँधली बाला आरोप लगाए हैं मुझे नही पता । लेकिन मै आपको बतादु । चुनाव जितने के बाद मै नै कुलजी से बारबार बात किया हुँ । वो समय उन्हो ने साथीयों के बुराइयाँ बताते रहते हैं । उसी के बारे में सायद आपका जिज्ञासा हैं ।

लेकिन उन्हो ने तो अर्गानाइजेशन के शुद्धीकरण के लिए विशेष महाधिवेशन के माग किए हैं आपको मालुम हैं की नही ?
–ये कोइ नई बात नही हैं । अक्टोवर में हुई अधिवेशन में आर्थिक और सांगठनिक रिर्पोट पास नही हुवा था । उसको पास करवाने के लिए विशेष महाधिवेशन किया जाएगा उसी समयका निर्णय हैं । अभी कुलजी ने तो अभी बोला हैं । जो निर्णय हुवा हैं वही बोल रहे हैं वो । विशेष महाधिवेशन करवाने के लिए तारिख तय करने के जिम्मेवारी मुझे सौपा गया हैं । मैने महाधिवेशन मिडलइस्ट मे किया जाए कह के मित्र लोगसे बात भी कर चुके हैं । ये बात भी कुलजी को मालुम हैं । 

आप पर आरोप हैं कि उन्होने विशेष महाधिवेशन के अवाज उठाने के बाद आप लोगो ने ये निर्णय पहले हो चुके हैं बोले हैं ?
–नही ये गलत बात हैं । मै माइन्युट भी देखा सकता हुँ । माइन्युट होचुके विषय में उन लोगो ने बात उठाना कितने जायज हैं आप ही बताइयें । 

कहा जाता हैं कि एनआरएन के भितर आर्थिक भ्रष्टाचार हुवा हैं इस विषय पर फेस टु फेस बैठक में छलफल भी नही किये क्यु ?
–ये मुद्दों पर बहस नही हुवा ये बात नही हैं । फेस टु फेस बैठक में इस मुद्दो पर बहुत जोरतोड के साथ चर्चा हुई । लेकिन जो बात बाहर आया हैं उस पर विश्वास नही कर सकतें हैं । कहां कहां भ्रष्टारचार हुवा हैं, भ्रष्टाचार हुवा है कि नही, जदी हुवा हैं तो किसने किया हैं लगायत के विषय मे छानविन किया जाएगा और उसके लिए तयारी चल रहा हैं ।
 

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