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क्रिकेट में विज्ञान : भारतीय बॉलर जसप्रीत बुमराह की विशेष घातक गेंद का वैज्ञानिक  विश्लेषण

person access_timeFeb 24, 2020 chat_bubble_outline0

क्रिकेट प्रेमियों ने अक्सर 'कमेंटेटर' को कहते सुना होगा -  एक बार फिर बुमराह पैवेलियन छोर से  गेंदबाज़ी करते हुए,   विकेट के 'ऑफ साइड'  से 'स्ट्राइकर इन्ड' में बैट्समैन फिंच खेलने को तैयार।  बुमराह की इस गेंद को समझने में बैट्समैन  फिंच बुरी तरह नाकाम रहे, गेंद ठप्पा खाने क़े बाद सीधा विकेटकीपर धोनी के हाथो में। बुमराह की इस  ऑफ स्पिन गेंद ने गजब का उछाल लिया। 'रिवर्स मैग्नस इफेक्ट' के कारण गेंद ठप्पा खाने के बाद' स्पिन' होती हुयी हवा में उछली, बैट्समैन के समझ पाने से पहले गेंद सीधा धोनी के 'ग्लब्स' में जा पहुंची।

अब जरुरी नहीं की हर क्रिकेट प्रेमी भौतिक विज्ञान की समझ रखता हो। उसके लिए 'कमेंटेटर' का बयां करना कि गेंद 'रिवर्स मैग्नस इफेक्ट' के कारण हवा में दूर  तक उछली, समझ से परे की बात होती है। चलिए आज आपको बताते है बुमराह की गेंद में जो 'रिवर्स मैग्नस इफेक्ट' की चर्चा होती है आखिर वो क्या बला है?


'रिवर्स मैग्नस इफ्फेक्ट' से पहले 'मैग्नस इफ़ेक्ट' के बारे में समझिये।

'मैग्नस इफेक्ट' क्या है ? इसे ऐसे समझिये - जब भी कोई बॉल  किसी भी 'फ्लूइड' से  (जैसे की हवा) होकर गुजरती  है और अगर वह बॉल 'स्पिन' कर रही होती है तो उसपर एक छद्म प्राकृतिक बल लगता है इसीको  'मैग्नस इफेक्ट'  कहते हैं। इसे ऐसे भी समझने का प्रयास करे, कोई भी वस्तु जब  गोलाई में चक्कर काटती  है तो उसपर भी एक प्रकार का छद्म बल काम करता है इसे 'सेंट्रीफ्यूगल फ़ोर्स' कहते है।

 

पृथ्वी की अक्षीय गति इसका अच्छा उदहारण है। अक्ष में गोल घूमने के कारण पृथ्वी गोल नजर आती है। पर गोल घूमने के कारण ही पैदा हुए 'सेंट्रीफ्यूगल फ़ोर्स' के कारण यह पूरी गोल नजर नहीं आती। अब यह तो भगवान ही जाने कि  पृथ्वी  गोल है या गोल घूमने की वजह से गोल नजर आती है? या फिर  पृथ्वी पूरी तरह गोल है और 'सेंट्रीफ्यूगल फ़ोर्स' के कारण पूरी गोल नजर न आकर कुछ और नजर आती है।  'सेंट्रीफ्यूगल फ़ोर्स' की भांति 'मैग्नस इफ़ेक्ट'  की वजह से  'स्पिन' कर रही गेंद  या तो आगे झुकेगी या हवा में दूर तक उड़ेगी।

 

इस स्थिति में गेंद पर जो बल लगता है उसकी गणना करने के लिए मार्टिन कुत्ता (Martin Kutta) और निकोलाई जकौस्की (Nikolai Zhukovsky) ने एक सिद्धांत बनाया जिसको कुत्ता-जकौस्की सिद्धांत (Kutta–Joukowski theorem) कहते हैं।



इस सिद्धांत के अनुसार गेंद को इस बल की वजह से प्रति यूनिट लम्बाई पर जो  'लिफ्ट' मिलती है उसकी गणना ऐसे की जा सकती है -

FL=pvG

p = यह हवा का घनत्व है।


v = यह बॉल की गति है।


G = यह बॉल के घूमने की वजह से जो 'वोर्टेक्स' बनता है उसकी शक्ति है।


G=2πr2ω


ω  इसकी एंगुलर (कितनी स्पिन है) गति है।


इस समीकरण में अगर आप हर चीज जोडेंगें तो बॉल को कितनी  'लिफ्ट' मिलेगी उसकी गणना कर सकते हैं। इसी 'लिफ्ट' को ही 'मैग्नस इफ़ेक्ट'  कहते हैं।


'मैगनस इफ़ेक्ट'  होता क्यों है? इसे समझने के लिए नीचे का चित्र देखिये। जो तीर  वाली लाइन है वो हवा है। बॉल अगर 'स्पिन' कर रही है तो एक तरफ की वायु की गति तेज हो जायेगी और दूसरी तरफ की वायु की गति धीमी हो जाएगी। अगर 'फॉरवर्ड स्पिन' है तो इसी वजह से बॉल को 'लिफ्ट' मिलती है।


अब चलिए जानते है 'रिवर्स मैग्नस इफ़ेक्ट'  क्या है? 'मैगनस इफ़ेक्ट'  में बॉल की  गति और उसकी 'स्पिन' का बहुत महत्व है। बॉल की  गति और उसकी 'स्पिन' की गति का एक ऐसा अनुपात होता  जब बॉल  ऊपर उठने की वजाय  नीचे झुक जाती है। इसकी वजह असल में हवा के अंदर एक 'टर्बुलेन्स' होता है। 'टर्बुलेन्स' की वजह से हवा की 'लिफ्ट' बॉल के आगे लगती  है थोड़ी दूरी पर। और बॉल ऊपर उठने की  जगह  नीचे  झुक जाती है। इसमें बॉल की गति और उसके 'स्पिन' की गति के अनुपात का बहुत महत्व  होता है।


इसका जसप्रीत बुमराह  से क्या सम्बन्ध है ? भारत के गेंदबाज बुमराह के 'स्पिन' और गेंद फेंकने की गति ऐसी है कि वो 'रिवर्स मैग्नस इफ़ेक्ट' उत्पन्न कर सकते हैं।


बुमराह क़े गेंद फेंकने की गति 145 किलोमीटर प्रति घंटा है और इनके  'स्पिन' की गति 1000 घुमाव प्रति मिनट के लगभग होता है।
आप नीचे के दो चित्र देखिये। इनमे सिर्फ 'टर्बुलेन्स' का अंतर है और इसी की वजह से एक बॉल  ऊपर उठती है और दूसरी नीचे जाती है। और जैसा की ऊपर बताया है इसमें जो 'लिफ्ट' होती है वो बॉल के कितनी आगे लगेगी उसकी वजह से ही  बॉल  की दिशा में परिवर्तन हो जाता है।

 

इसका इतना महत्व क्यों है: अगर कोई फ़ास्ट बॉलर है और  आप बैटिंग कर रहे हैं तो आपको सोचने का मौका नहीं मिलता है। बैट्समैन 'प्रैक्टिस'  और 'इंस्टिंक्ट' से  'बैटिंग' करते हैं। बॉल को गेंदबाज के हाथ से निकल कर बल्लेबाज तक जाने में बहुत कम समय लगता है। अगर बॉल को 'स्पिन' कराके बॉलर 'पिच' पर 'बाउंस' करने की जगह को बदल देता है तो बल्लेबाज को बड़ी परेशानी होती है।

 

अगर सिर्फ 'मैगनस इफ़ेक्ट' रहता तो गेंद हवा में ज्यादा समय  बिताती और बल्लेबाज के लिए आसानी होती । लेकिन 'रिवर्स मैगनस इफ़ेक्ट'  की वजह से गेंद  हवा में  बहुत कम समय रहती है और ऐसा सिर्फ जसप्रीत बुमराह  ही कर सकते हैं। इस प्रभाव की वजह से बॉल बहुत जल्दी 'डिप' करती है जबकि बैट्समैन इसकी उम्मीद  नहीं करते हैं। इसलिए वो ऐसी बॉल को ठीक से खेल नहीं पाते हैं और आउट हो जाते हैं।

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