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प्रदेश 2 में काम से ज्यादा तडक भडक

person access_timeFeb 05, 2020 chat_bubble_outline0

–डा.सुरेन्द्र लाभ, राजनीतिक विश्लेषक
४० वर्ष तह प्रध्यापक पेसा रह चुके डा.सुरेन्द्र लाभ कहि न कहि नेपाल सरकार के नीति और अनुसन्धान मे सहयोग पहुँचा रहे हैं । समाज कल्याण परिषद् में काम करचुके लाभ देश के राजनीति एवं अर्थ नीति में अपना दखल रखते हैं । अपने विचार विभिन्न अखबार के जरिए दे रहे लाभ से रातोपाटीका संवाददाता ने किए बातचितका कुछ अंशः

अभि देश में जो राजनीतिक घटनाक्रम जो देखा गया है उसको आप कैसे विश्लेषण करते हैं ?
–मधेशी होने के नाते अगर कहना पडा तो मधेश में तीन बार आन्दोलन हो चुके हैं । सन् २००७, २००८ और २०१६ मे मधेश आन्दोलन हुवा । वो आन्दोलन क्यु हुवा, किस के लिए हुवा, इसको बातको पहला समझना चाहिए । वो एक मुक्तिका आन्दोलन था, सामानता और पहिचानका आन्दोलन था । लेकिन उस आन्दोलन से जनताको जो पाना था वो नही पासके । लेकिन नेताको पद मिला, पैसा मिला, इच्चजा मिली, अर्थात नेता लोगोंको सब कुछ मिला । जो चतुर जनता थे उसने अपने चतुराई से कुछ पालीया महज सोझा सिधा जनता देखते रहगए । फुटपाथ पर बैठे लोगों ने आंदोलन का फायदा उठाया । लेकिन जो लोग ईमानदार हैं वे केवल आंदोलन करने के लिए जाने जाते हैं । नेता का कहना है कि वे सड़क पर उतर आए । इन लोगों को कुछ नहीं मिला । यानी लोगों में एक तरह का असंतोष है ।

ये असन्तुष्टियां हिमाल और पहाड में भी हैं कि सिर्फ मधेश मे देखाई दे रहे हैं ?
नही ये असन्तोष पूरे देश में व्यापक रूप से फैला हुआ है । लेकिन मधेश ने कुछ ज्यादा असन्तोष देखा गया है । बार–बार आंदोलन में आने वाली भूमि मधेस है । भेदभाव, असमानता, और उत्पीड़न के खिलाफ विद्रोह हुवा था । इसलिए मधेशीयोंका इच्छा थोड़ी अधिक है और वो स्वभाविक भी हैं । दूसरी ओर इतने उभर के आन्दोलन नही हुइ । मधेशियों ने तन मन धन से साथ आन्दोलन मे लगे हुवे थे । असमानता और भेदभाव को समाप्त करने के लिए आन्दोलन किया था, समान अधिकार प्राप्त के लिए आन्दोलन किया गया था । लेकिन वो आकांक्षा पुरा नही होने के कारण से असन्तुष्टियां ज्यादा देखाई दे रहे हैं । भिन्नता और असमानता अन्यत्र मौजूद है लेकिन मधेस में जो असमानता हैं वो दुसर जगह  नहीं है । पहाड़ी के दलितों की तुलना में मधेस में अधिक समस्या है । पहाड़ी की महिलाओं, मधेस की महिलाओं, जनजातियों की तुलना में मधेश में अधिक समस्या है । अर्थात, पहाड़ों की तुलना में मधेस में भेदभाव का गड्ढा गहरा है । जब तक गड्ढे को भरने का काम नहीं होता, तब तक इस तरह का असंतोष जारी रहेगी ।

मधेश में असन्तोष गढा गहरा होने का कारण क्या हो सकता हैं ?
–इस में दोनो दोषी हैं । केन्द्रीय सत्ता तो दोषी हैं ही लेकिन तर स्थानीय सत्ता भी कम दोषी नही हैं स्थानीय और राज्य स्तर के नेताओं में भी दोष हैं । अब तो सब दोष केन्द्र सरकारको देनेको नही मिलेगा । क्यु की केन्द्रका बहुत सारा अधिकार अब राज्य और स्थानीय में जा चुका हैं । लेकिन अधिकार निचे तक जाने के बाद भी जनता घाउ मे मलहम लगाने के काम नही हो रहा हैं । ग्याप और गढा को नही भर पा रहे हैं । उस के लिए कोही प्रयास भी नही देखाई दे रहे है । इसि लिए असन्तोष के भागीदारी जितना केन्द्र के सरकार हैं उतना हीं राज्य और स्थानीय सरकार भी हैं । 

आप केन्द्र सरकार को दोषी कैसे देखा सकते हैं ? 
–केन्द्र सरकार ने पहाड और मधेश के बीच में जो दुरीयां हैं उसको मिटाना चाहिए था । मधेश और पहाड को लेकर जो मनोवैज्ञानिक गढा और जो ग्याप हैं उसको हटाने की प्रयास सरकार द्वारा नही की गई । अभि भी आप देखेगें तो मधेश और पहाड के बीच में असमानता हैं । देशका सभी जनता समान हैं ये बात पंचायतकाल के संविधान में भी समेटा गया था । लेकिन जो संविधान में लिखा गया हैं वो व्यवहार में नही दिखाई दे रहे हैं । सोच में परिवर्तन नही होन तक संविधान में जो भी परिवर्तन हो जाए लेकिन मधेशका समस्या समाधान नही होगा । इसिलिए अभिका आवश्यकता सोच में परिवर्तन लानेका हैं । मधेशीयों को देखते ही ये भारतीय हैं, काला चहरा देखा तो ये इण्डियन हैं जो सोच नेपाली में हैं उसको बदलना परेगा । मधेश और मधेशीयों का देखने का जो नजरिया हैं जो माइण्ड सेट हैं उस में परिवर्तन लाना बहुत आवश्यक हैं । मधेश और मधेशीयों का देखने के नजिरीया पहाड के ग्रामिण क्ष्ोत्र से ज्याद शहर में हैं । 

प्रदेश २ में ज्याद समस्या क्यु देखाई देते हैं ? 
–समस्या सीर्फ प्रदेश २ मे नही बल्की हरेक प्रदेश में हैं । लेकिन जो समस्या प्रदेश २ में हैं वैसे समस्या और कही नही हैं । औरों प्रदेश में समस्या होते हुवे भी वहाँ पर विकास निर्माणका काम सब हो रहा हैं लेकिन प्रदेश २ मे वो सब नही देखाई दे रहे हैं । प्रदेश २ में भाषण, गन्थन, मन्थन ज्यादा हैं । मुख्यमंत्री और मंत्री ज्यादातर उद्घाटन, गाष्ठी, शिल्यानाश में ही व्यस्त रहते हैं । काम से ज्यादा उन लोगा तडक भडक ज्यादा हैं । 

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