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विचार/दृष्टिकोण

राजनीति बहुत हो गई, अब महामारी की तरफ ध्यान जाये access_timeजेठ १, २०७८

रातोपाटी काठमांडू। नए वर्ष 2078 के आने के साथ ही इस छोटे से देश में कोरोना महामारी का प्रकोप एकाएक चरम पर पहुंच गया। अभी देश में चारों तरफ से ऑक्सीजन के हाहाकार की खबरे ही मिल रही हैं। बीमारों को अस्पताल में उपचार न मिल पाने के कारण उन्हें अकाल में मृत्यु...

सम्पदा नंबर 1 : व्यक्ति कि धरहरा ? access_timeबैशाख २७, २०७८

'हमने साझा संकल्प किया तो धुल झाड़ता हुआ धरहरा फिर से उठ खड़ा होगा। '(11 जेठ 2072, नया पत्रिका) शायद इस विचार का लाक्षणिक अर्थ होगा। भग्न धरहरा को यहाँ एक प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिस की गई है। इसी कारण धूल झाड़ते हुए धरहरा के उठने का प्रसंग...

ओली देश और जनता के साथ खतरनाक खेल खेल रहे हैं access_timeबैशाख २३, २०७८

कोविड- 19 के कारण देश में गंभीर महामारी की स्थिति बनने की अवस्था है। अभी से ही देश के अस्पतालों में ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, शैया तथा आवश्यक औषधियों का अभाव आरम्भ हो गया है। ये प्रारंभिक अवस्था है। अगर ये स्थिति बढ़ती गई तो कितनी ही भयानक अवस्था होगी ? इसे सोच पाना भी...

पश्चिम बंगाल जनादेशः ममता की सरकार तीसरी बार access_timeबैशाख २१, २०७८

एजेंसी। भारत के पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के चुनाव नतीजों ने साबित कर दिया कि लालच, पैसे, झूठे वादों, ताकत या धमका कर सत्ता हासिल नहीं की जा सकती। सत्ता में वही आ पाएगा जिसे जनता चाहेगी। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी तीसरी बार सरकार बनाएं...

टूटती सांसों को जोड़ने वाली ऑक्सीजन गैस की खोज की दिलचस्प कहानी access_timeबैशाख १८, २०७८

प्राचीन समय में गैस का केवल एक ही रूप माना जाता था- वायु या हवा। वायु (Air) को भौतिक विज्ञान का विषय माना था तथा रसायन विज्ञानियों को इसमें कोई रुचि नहीं थी। वायु की धारणा के साथ मनुष्य का वास्ता सबसे पहले  बेल्जियम के वैज्ञानिक वान हेमोंट(1577- 1644) ने...

कोविइडियट access_timeबैशाख १७, २०७८

(डॉक्टर अव्यक्त अग्रवाल मेडिकल प्रेक्टिशनर है। पिछले एक वर्ष से कोविड का इलाज कर रहे है। स्वयं भी संक्रमित होकर बाहर आ चुके है। फेसबुक पर लेखों और वीडियो द्वारा स्वास्थ्य जागरूकता सन्देश देते है।)   कोविइडियट आपके और मेरे परिवार में भी हो सकते है, मित्रों मे...

हिन्दू सेंटीमेंट को खींचते हुए प्रधानमंत्री केपी ओली, राप्रपा से खुलते एजेंडे access_timeबैशाख १३, २०७८

रातोपाटी काठमांडू। राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी द्वारा जबरजस्त रूप में आगे बढ़ाया हुआ हिन्दुत्व का एजेंडा खिसकने की जैसी अनुभूति होने लगी है। राप्रपा के एजेंडे को एमाले अध्यक्ष कामरेड केपी ओली के द्वारा छीनने की चेष्टा किये जाने की बात करते हुए राप्रपा के नेता चिंता...

अल्बर्ट आइन्स्टाइन (Albert Einstein) : 20 वी सदी के महानतम वैज्ञानिक access_timeचैत २, २०७७

अलबर्ट आइंस्टाइन मानव इतिहास के जाने-माने वैज्ञानिक अल्बर्ट आइन्स्टाइन (Albert Einstein) 20 वीं सदी के प्रारंभिक बीस वर्षों तक विश्व के विज्ञान जगत पर छाए रहे। अपनी खोजों के आधार पर उन्होंने अंतरिक्ष, समय और गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत दिये। वे सापेक्षता के सिद्धांत...

जिंदगी जिंदादिली का नाम है मुर्दादिल क्या खाक जिया करते हैं access_timeपुस ४, २०७७

काठमांडू। कहते हैं न कि जीवन कोई सीधी रेखा नहीं ये तो टेढ़ी मेढ़ी रेखाओं का ऐसा संगम है जहाँ हर दिन कुछ न कुछ ऐसा होता ही रहता है जो कभी मनुष्य को आनंद-उत्साह और उमंग से भर देता है तो कभी कुछ ऐसा भी होता है कि एक अच्छी खासी जिंदगी जी रहा इंसान मानों हर तरह ...

भौतिक विज्ञान को अनिश्चित कर देने वाले वर्नेर हाइजेनबर्ग access_timeमंसिर २१, २०७७

गणित में बेहद रूचि रखने वाले वर्नर हाइजेनबर्ग (Werner Heisenberg) भौतिकी की ओर अपने स्कूल के अंतिम दिनों में आकृष्ट हुए और फिर ऐसा कर गये जिसने प्रचलित भौतिकी की चूलें हिला दीं। वे कितने प्रतिभाशाली रहे होंगे और उनके कार्य का स्तर क्या रहा होगा, इसका अंदाज इस ब...

बिहार चुनाव परिणाम मेरी दृष्टि में, हारे तो सिर्फ नीतीश और सोनिया है access_timeकात्तिक २९, २०७७

लगभग सभी राजनीतिक विश्लेषकों, पंडितो, महाघाघ पंडितो, 'प्री पोल' और 'पोस्ट पोल' के हवा हवाई वैज्ञानिकों एवं मोदी विरोध के लिए ही जीवित रह रहे स्वनामधन्य महानुभावो के अनुमान, भविष्वाणी तथा मनगढंत सारे कयासों पर अस्वीकृति का ठप्पा लगते हुए बिहार की...

अनुभवी पिता की अनोखी सोच access_timeअसोज २, २०७७

समय बदला है, बहुत तीब्र गति से बदला है लोगों के आचार-विचार, खान-पान, जीवन यापन, जीवन शैली सब में परिवर्तन आया है। अगर किसी चीज में परिवर्तन नहीं आया तो वो है मां-बाप का अपनी संतान के उज्जवल भविष्य के लिए चिंतित होना। जरूर है की समय के साथ साथ उज्जवल भविष्य की...

नेपाल-भारत संबंध : मनभेद और मतभेद को भूल कर आगे बढ़े access_timeसाउन ३२, २०७७

15 अगस्त 2020 को भारत अपनी स्वतंत्रता की 74 वीं वर्षगांठ मना रहा है। भारत के ऐतिहासिक पन्नों पर यह वर्ष आत्मनिर्भर भारत को समर्पित है, यद्यपि प्रारंभ से ही भारत अपने आत्मनिर्भर अभियान को योजनापूर्वक आगे बढ़ा रहा है। किंतु इस वर्ष वैश्विक महामारी कोविड-19 कोरोना के चलते...

चिंतन access_timeसाउन ११, २०७७

हर समय का अपना अंदाज होता है। उस समय की घटनाएँ भी अपने ही किस्म के होते हैं, जिसके लिए वह काल हमेशा याद किया जाता है। विश्व के इतिहास के पन्ने ऐसी कालजयी घटनाओं से भरे मिलते हैं। जिनमें कई दुःखदायी और त्रासदीपूर्ण हैं तो कई सुखदायी भी। विस्तार में न जाकर एक-...

भारत-नेपाल विवाद और कालापानी का सच access_timeअसार १६, २०७७

नवम्बर 1814 से मार्च 1816 तक नेपाल (जिसे उस समय गोरखा अधिराज्य कहा जाता था) और भारत पर शासन कर रही ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच युद्ध चला जिसमें नेपाल को पराजय का सामना करना पड़ा। 4 मार्च 1816 को सम्पन्न सुगौली संधि के साथ इस युद्ध का समापन हुआ और संधि के फलस्वरूप ने...

कोरोना वायरस प्रारम्भ से अब तक : वैज्ञानिक शोध-खोज access_timeअसार १०, २०७७

किसी महामारी के फैलने की जांच जासूसी पड़ताल जैसी ही होती है। किसी जासूसी जांच में सबूतों के गायब होने से पहले अपराध की जगह पर पहुंचना होता है, प्रत्यक्षदर्शियों से बात करनी होती है। इसके बाद जांच की शुरुआत होती है। सबूतों की कड़ियों को जोड़ते हुए अगले वारदात ...

अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस और योगासन access_timeअसार ८, २०७७

प्राचीन काल में ऋषि–मुनियों के द्वारा अपने को स्वस्थ रखने और आत्मा को परमात्मा के साथ जोड़ने हेतु योगाभ्यासों का सहारा लिया करते थे। भगवान शंकर योग के प्रवर्तक और योगीश्वर माने जाते हैं तो भगवान श्रीकृष्ण, जिन्होंने योग क्री व्याख्या विभिन्न रूप में की है, योगेश्वर...

बुढ़ापे का जीवन access_timeजेठ २८, २०७७

जब मेरे मित्रजन किसी मीटिंग में मेरी ओर संकेत करते हुए ‘यह बूढ़ा’ या ‘बुढवा’ कहते हैं तो बहुत बुरा लगता है। लगता है कि उनके बाल नोच लूँ या बत्तीसी निकाल दूँ। पर अहिंसात्मक शैली में उनसे प्रतिवाद करते हुए कहता हूँ- ‘अगर मेरे सफे...

विश्व पर्यावरण दिवस :  2020 access_timeजेठ २४, २०७७

मनुष्य और प्रकृति का अन्योन्याश्रित संबंध है। अन्योन्याश्रित संबंध से भी अगर ये कहें की मनुष्य प्रकृति की ही जीती जागती रचना है तो भी शायद कोई अतिशयोक्ति न होगी। सभी जानते हैं कि मनुष्य की देह में 70 प्रतिशत पानी ही होता है इसी तरह कुछ और मात्रा में अन्य प्राकृतिक तत्व...

नरेन्द्र मोदी को पशुपतिनाथ का एक पत्र access_timeजेठ १७, २०७७

अनु. सहयोगी- शोभा काफ्ले खतिवडा तथा गूगल   सम्माननीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी ! आराध्य देव पशुपतिनाथ की ओर से ढेर सारी शुभकामनाएँ !!!  मैं पशुपतिनाथ ! आप मेरे अनन्य और प्रिय भक्त ! जो बार-बार नेपाल आते वक्त मेरा दर्शन किये बिना नहीं लौटते...