हिंदी संस्करण

वेदना उपाध्याय

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया access_timeभदौ १, २०७८

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःख भाग्भवेत हम हिन्दू प्राचीन महान ऋषि मुनियों की संताने- ऐसे ऋषि ऐसे मुनि जिन्होंने अपने प्रेम की धार धरती के उन समस्त चर अचर जीव जंतुओं पर दिखाई जिन्हें नेत्रों से देखा जा सकता था, जिन्हें ...

कोरोना का मचा तांडव मनुज हुआ लाचार access_timeअसार २१, २०७८

कोई दो साल से समाज में फैले कोरोना ने यूँ तो सीधे सीधे देखते हुए भी तांडव मचा रखा है। इकाई दही सैकड़ा की संख्या को पार करके इससे मरनेवालों की संख्या लाख नहीं लाखों में पहुँच चुकी है। ये ऐसी रणचंडी बनी संसार के चौराहे पर खड़ी है जो मानों की सदियों सदियों की...

अनुभवी पिता की अनोखी सोच access_timeअसोज २, २०७७

समय बदला है, बहुत तीब्र गति से बदला है लोगों के आचार-विचार, खान-पान, जीवन यापन, जीवन शैली सब में परिवर्तन आया है। अगर किसी चीज में परिवर्तन नहीं आया तो वो है मां-बाप का अपनी संतान के उज्जवल भविष्य के लिए चिंतित होना। जरूर है की समय के साथ साथ उज्जवल भविष्य की...

"अभीप्सा की दलदल" access_timeसाउन २६, २०७७

पृथ्वी पर परमात्मा की एक ही तो श्रेष्ठ, सुन्दरतम उर्ध्वमुखी, विकासमुखी, जिज्ञासु राग-अनुराग से ओतप्रोत रचना है मानव- श्रेष्ठ मानव व्याप्त हैं जिसमें अनंत अनन्त संभावनाएं सृष्टि रुपी बगीचे की ऐसी कली जो जब आ जाती है   अपनी सकारात्मक, सृज...

विश्व पर्यावरण दिवस :  2020 access_timeजेठ २४, २०७७

मनुष्य और प्रकृति का अन्योन्याश्रित संबंध है। अन्योन्याश्रित संबंध से भी अगर ये कहें की मनुष्य प्रकृति की ही जीती जागती रचना है तो भी शायद कोई अतिशयोक्ति न होगी। सभी जानते हैं कि मनुष्य की देह में 70 प्रतिशत पानी ही होता है इसी तरह कुछ और मात्रा में अन्य प्राकृतिक तत्व...

बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर access_timeबैशाख २६, २०७७

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वरः गुरुर्साक्षात परंब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः ये हिन्दू दर्शन, धर्म-संस्कृति अपने आप में अपूर्व है जो ऐसे उदाहरणों और नमूने किरदारों से भरी है जो अनंत काल से आज तक, जहाँ समय, समाज और व्यक्ति में कितने ही परिवर्तन आये, पर व...

सफलता हासिल करने के लिए जरूरी हैं समय का सही सदुपयोग access_timeबैशाख २२, २०७७

भले ही मनुष्य एक विवेकशील प्राणी है पर भी उसे अपने विवेक को विकसित करने, अन्य लोगों से खुद को अलग पेश करने, अपने एक सौम्य और आकर्षक व्यक्तित्व के निर्माण के लिए कुछ प्रयत्न तो करने ही पड़ते हैं, बिना प्रयत्न यहाँ कुछ नहीं मिलता। वो कहावत है न.. उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति का...

कोरोना वैक्सीन access_timeबैशाख १६, २०७७

कोरोना संक्रमण विरुद्ध बनाई गई वैक्सीन का मानव ट्रायल पूरा हो चुका है| इंग्लॅण्ड की ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी और जेनरल इंस्टिट्यूट के सहकार्य में बनी इस वैक्सीन की पहली डोज लेनेवाली महिला एलिसा ग्रानाटो साथ ही इस वैक्सीन के सफल होने पर भी विश्वस्त हैं|   कोभिड...

खुशी..खुशी..खुशी..!!! access_timeचैत ८, २०७६

ढूँढ रहा मन हर पल खुशियाँ खुश रहने के रस्तों को जन्मसिद्ध अधिकार सभी का ढोने का इन बस्तों को हम सनातन धर्मी अपनी अलग सोच अलग विचार के लिए भी जाने जाते हैं यूँ तो हम किसी भी विशेष दिन के इंतजार में रहते ही नहीं क्योंकि हमारी तो धारणा ही है पल पल को जिओ ...

होली : हिन्दुओं का पवित्र त्यौहार access_timeफागुन २७, २०७६

परमात्मा की इस अनंत सृष्टि में मनुष्य ही एक ऐसा प्राणी है जिसके पास ज्ञान, विवेक, बुद्धि-विचार जिज्ञासा और कौतूहल जैसे गुण प्रकृति ने उसे वरदान स्वरुप प्रदान किये हैं। यही वह वरदान है जिसके चलते परमात्मा की सृष्टि में मानव अन्य प्राणियों से श्रेष्ठ हो सका है। अपने विव...

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस access_timeफागुन २५, २०७६

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलः क्रिया मनुस्मृति का ये श्लोक ये स्पष्ट रूप से बता देता है कि हमारे समाज में आदिकाल से ही स्त्रियों के प्रति कैसा व्यवहार और हमारी कैसी धारणाएं थीं। जहाँ स्त्रियों की पूजा अर्थात उनका सम्मान ...