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बिना किसी सुरक्षा के कोरोना के विरुद्ध पुलिस फ्रंटलाइन में

person access_timeMar 26, 2020 chat_bubble_outline0

एक भी पुलिस जवान के संक्रमित होने से हो सकती है भयावह स्थिति

 

काठमांडू। कोरोना वायरस की महामारी के बीच सरकार के लॉकडाउन की घोषणा के बाद इसके सशक्त ढंग से कार्यान्वयन के लिए सरकार द्वारा व्यापक पुलिस बल का परिचालन किया गया है। सरकार ने प्रत्येक चौक-चौक और गांवों में भी पुलिस बल को तैनात करके सवारी साधन के आवागमन पर रोक लगाई है। अत्यावश्यक सेवा और वस्तु के अतिरिक्त अन्य आवागमन के साधनों पर रोक लगाने के लिए तैनात किया गया पुलिस बल कितना सुरक्षित हैं?


रातोपाटी द्वारा ये देखने के लिए की पुलिस द्वारा किस तरिके से चेक जाँच की जाती है और सुरक्षा के क्या उपाय अपनाये गए हैं, काठमांडू के विभिन्न स्थानों में जाकर इसे जानने का प्रयास किया। रातोपाटी ने अपने अनुसन्धान के क्रम में देखा गया कि कोरोना वायरस संक्रमण का खतरा पुलिस बलों को सबसे अधिक है। सडकों में डटे मुस्तैदी से ड्यूटी कर रहे पुलिस बलों द्वारा आवश्यक मात्रा में सुरक्षा के उपायों को नही अपनाया गया है।


अधिकांश पुलिस कर्मचारियों के हाथों में पंजे नही हैं और कितनें ही पुलिस जवानों ने तो मास्क भी नहीं पहने थे। जिन्होंने मास्कों का प्रयोग किया भी था उनके मास्क भी सामान्य किस्म के कपडे के मास्क थे, जो संक्रमण रोकने में असक्षम हैं। पुलिस जवानों को सवारी साधन में सवार यात्रियों, चालकों तथा पैदल यात्रियों के निकट जाकर बातें करते हुए भी देखा गया। इसी तरह किसी न किसी तरीके से, कागज देखने व अन्य कामों के लिए भी उन्हें लोगों को छूना पडता है।

कम से कम एक मीटर की दूरी कायम करना आवश्यक है, लेकिन पुलिस जवानों में एक मीटर की दूरी कायम करनेवाला दृश्य नही देखा गया। कितने ही जिद्दी स्वभाव के लोग मोटरसाइकल जैसे वाहनों को चलाने का कार्य भी कर रहे है, जिन्हें पकड़कर नियंत्रण में भी लेना पड रहा है। ऐसे समय में आवश्यक दूरी कायम नही की जा सकती।


दूसरी तरफ कोरोना संक्रमण के बीमार लोगों को लाने और रखने के स्थान शुक्रराज ट्रपिकल तथा संक्रमण रोग अस्पताल में तैनात पुलिस जवानों की सुरक्षा अवस्था अत्यन्त दयनीय है।


जब रातोपाटी की टीम टेकु अस्पातल पहुँची तो दो पुलिस जवान अस्पताल के गेट पर डटे थे। उन लोंगो ने पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिभ इक्युपमेन्ट) तो लगाएं थे लेकिन उनके हाथों में  पंजे नही थे।


उन लोगों ने मास्क तो लगाए थे लेकिन वे मास्क न तो एन 95 मास्क था न ही सर्जिकल मास्क। वह सामान्य कपडे का मास्क था, जो पर्याप्त सुरक्षा प्रदान नही कर सकता। वहां आनेवाले रोगियों को आवश्यकता पडने पर गाडी से नीचे उतारने और बेड तक ले जाने की भी जरूरत पड सकती है। इस हालत में सबसे ज्यादा खतरा उन पुलिस कर्मचारियों को ही होगा।


पुलिस को संक्रमण होने से स्थिति भयावह होगी


अभी पुलिस और स्वास्थ्यकर्मी ही कोरोना वायरस के विरुद्ध सबसे अधिक कार्यरत हैं। वे लम्बे समय तक अस्पताल व बैरेक में रहते हैं। पुलिस के जवानों को खाना खाने के समय तथा सोने के समय बैरेक में ही जाना पडता है। अभी सरकार ने पुलिस जवानों को छुट्टी नही दी है। सरकार के द्वारा इनके भोजन और सोने के स्थान की भी समुचित व्यवस्था नहीं की जा सकी हैं।


इस स्थिति में यदि किसी एक कर्मचारी को भी कोरोना का संक्रमण होता हैं तो इसका मतलब हैं कि उससे सम्पूर्ण पुलिस संगठन ही संक्रमित हो सकता हैं।

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