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कोरोना का रोना !

person access_timeMar 25, 2020 chat_bubble_outline0

नमस्कार दोस्तों,

पिछले काफी समय से शैक्षिक क्षेत्र में शुरू किए कुछ कार्यों के कारण आप सभी से दूरी बनी हुई थी। इस बीच विश्व कोरोना वायरस से आतंकित बन चुका है। इसलिए, अपने सामाजिक दायित्व के निर्वहन हेतु, मैं कोरोना से जुड़ी कुछ मूलभूत जानकारियां संक्षेप में आपके साथ साझा कर रहा हूँ।


कोरोना वायरस हवा में प्रोटीनयुक्त आवरण में कैद ‘आरएनए’ के कण हैं जिनका आकार एक मीटर के अरबवें हिस्से तक होता है। आनन-फानन में तैयार चलताऊ मास्क इस छोटे जीव को आपके अंदर जाने अथवा बाहर आने से रोकने में 100% सक्षम नहीं हैं। इसलिए बेहतर क्वालिटी का मास्क उपयोग में लाएं। इनसे भी सुरक्षा की पूरी गारंटी नहीं है।


फिलहाल हम नहीं जानते कि कोरोना बाहरी वातावरण में कितनी देर जीवित रह सकता है, शायद कुछ घण्टे अथवा कुछ दिन। इसलिए बाहरी चीजों को छूने से परहेज करें। हाथों को अवश्य धोएं और हाथों को मुंह पर लगाने अथवा नाखून चबाने से परहेज करें। आप रोगी हैं अथवा नहीं इसका हिसाब न करे। सभी जन खांसते/छींकते वक़्त मुंह पर रुमाल लगाएं।


अगर कोरोना आपकी सांस के द्वारा आपके फेफड़ों में दाखिल हो जाता है तो यह सबसे पहले आपके फेफड़ों के रक्षात्मक आवरण “एपीथीलियल कोशिकाओं” को निशाना बनाता है। किसी कोशिका में दाखिल होने के बाद कोरोना कोशिका की आंतरिक मशीनरी को हाइजैक करके अपनी असंख्य कॉपी तैयार करता है, तत्पश्चात उस बंधक कोशिका की हत्या कर लाखों की संख्या में तैयार हुए कोरोना अन्य कोशिकाओं को संक्रमित करने के मिशन पर निकल पड़ते हैं।


आपका इम्यून सिस्टम कोरोना से लड़ने के लिए कई प्रकार की फाइटर कोशिकाओं को भेजता है जो इन कोरोना वायरस को ढूंढ कर खत्म करने का कार्य करती है। अगर कोरोना की तादात हद से ज्यादा बढ़ चुकी है तो इम्यून सिस्टम आपको बचाने के लिए Mass Destruction का आदेश सुना देता है। इस दौरान इम्यून कोशिकाएं नये-नये एंजाइन्म के द्वारा बड़े पैमाने पर कोशिकाओं का संहार करती हैं जिसमें कोरोना के साथ-साथ बड़ी संख्या में स्वस्थ कोशिकाएं भी मारी जाती हैं।


अधिकतर केसेज में आखिरकार इम्यून सिस्टम की ही जीत होती है पर यह कोरोना भी कम दुष्ट नहीं। ये कोशिश करते हैं कि इम्यून सिस्टम की फाइटर कोशिकाओं को ही संक्रमित कर सकें। इस तरह फाइटर कोशिकाएं भ्रमित हो आपस में ही मार-काट करने लगती हैं। ऐसे कई केसेज में आखिरकार कोरोना इम्यून सिस्टम पर भारी पड़ फेफड़ों के रक्षा कवच “एपिथिलियल कोशिकाओं” को चट कर जाते हैं। रक्षा कवच के हटते ही गैस एक्सचेंज को अंजाम देने वाली “अल्वीओलाई परत” अनावृत हो जाती है। तब शरीर में मौजूद दूसरे बैक्टीरिया मौके का फायदा उठाते हैं और अल्वीओलाई में मौजूद Air-transportation packets के सहारे रक्त में घुस जाते हैं और द्रुत वेग से अपनी संख्या बढ़ाते हुए पूरे शरीर पर कब्जा कर लेते हैं। हवा के आवागमन हेतु मौजूद पैकेट्स बैक्टीरिया के द्वारा बन्द हो जाने के कारण रोगी सांस लेने में कठिनाई का अनुभव करने लगता है। और अंततः उसकी मृत्यु हो जाती है।


मैं आपको बता दूँ कि कोरोना का कोई इलाज संभव नहीं है। कमजोर इम्यून सिस्टम के कारण बुजुर्गों पर यह आफत ज्यादा भारी है। किसी भी महामारी में सबसे ज्यादा मायने यह रखता है कि शुरुआती दौर में संक्रमण की रफ़्तार को कितना धीमा किया जा सकता है। जाहिर है कि किसी भी देश में बुनियादी मेडिकल सर्विस सीमित होती है। अगर शुरुआती दौर में मरीजों की संख्या बेहद बढ़ जाए तो स्वास्थ्य तंत्र का ढांचा चरमरा जाता है। रोग के फैलने की रफ्तार सीमित रहे तो रोगियों का उचित इलाज भी संभव है और साथ ही साथ शरीर को समय मिलता है कि हमारे शरीरों के आंतरिक इम्यून सिस्टम इस रोग पर विजय प्राप्त कर सकें।


इसलिए लॉक-डाउन का सख्ती से पालन करें, और दूसरों से भी करवाएं। अन्यथा भारत जैसे देश में लापरवाही विनाश के उन आंकड़ों को जन्म दे सकती है जो हमारे लिए किसी बुरे ख्वाब से कम नहीं होंगे।


मैंने अपनी पुस्तक महामानव के आखिरी अध्याय में यह आशंका जताई थी कि बहुत जल्द किसी सूक्ष्म जीवाणु के जरिए मानवता के अंत की शुरुआत हो सकती है। मांसाहार की वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के मद्देनजर यह मेरा व्यक्तिगत आकलन था कि किसी सूक्ष्म जीव के द्वारा मानवों के संहार की संभावनाएं सबसे अधिक हैं। बस उम्मीद करता हूँ कि मेरी आशंका निर्मूल सिद्ध हो।
I hope, i wasn’t being prophetic in my words

Stay Healthy, Stay Home
And As Always
Thanks For Reading

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