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कोरोना वाइरस संकट : कैसे और कब होगा अंत ?

person access_timeMar 21, 2020 chat_bubble_outline0

न्यूयॉर्क ।कोरोना वाइरस के संक्रमण के संकट के कारण अभी विश्व ही मानों ठप्प होने की अवस्था में है ।जिन स्थानों पर दैनिक रूप में भीड़ हुआ करती थी वे अभी शून्यवत हो गए हैं ।विद्यालय और कॉलेजों के बंद होने के साथ - साथ यात्राओं पर भी बैन लगाया जा रहा है ।संसार के सारे ही व्यक्ति किसी न किसी रूप में इससे प्रभावित दिखाई दे रहे हैं ।
 

   इस वायरस के सम्बन्ध में बेजोड़ वैश्विक प्रतिक्रिया दिखाई पड़ी है ।अब इन समस्त अवस्थाओं के बीच एक प्रश्न उठता ही है कि आखिर इसका अंत कब और कैसे ? आम जनजीवन अपनी सामान्य अवस्थाको पायेगा आखिर कब ?

ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के अनुसार आगामी १२ सप्ताहों में कोरोना के कहर से ब्रिटेन को मुक्ति मिल सकेगी ।

  अगर उनकी बात को तूल दिया जाय तो आगामी तीन महीनों में कोरोना वायरस का संक्रमण घट सकेगा परन्तु फिर भी इसकी जड़ को ही उखाड़कर फेकना  संभव नहीं दिखाई देता ।सम्बंधित विज्ञों का मानना  है कि इसे समाप्त होने में अधिक समय लगेगा ।उनका कहना  है कि इससे पूर्ण मुक्ति के लिए १ वर्ष का भी समय लग सकता है ।

बड़े समुदायों तथा मुल्कों के लिए सभी चीजों को बंद करने की नीति लम्बे समय तकके लिए संभव नहीं दिखती है ।इसके अलावा इस समस्या से सामाजिक और आर्थिक नुकसान भी विध्वंशकारी रूप में ही होने की भी बड़ी संभावना है ।

संसार के देश अब 'एक्जिट स्ट्रेटेजी' खोज रहे हैं ताकि प्रतिबंधों को हटाया 
जा सके और सारी चीजों को सामान्य रूप दिया जा सके परन्तु दूसरा सच ये भी है कि कोरोना वायरस पर नियंत्रण पाया नहीं जा पा रहा है ।प्रतिबन्ध को हटाने के साथ ही कोरोना के संक्रमण के तीब्र रूप से बढ़ सकने का त्रास भीउतना ही ज्यादा बना हुआ है ।

एडिनबरा विश्व विद्यालय के संक्रामक रोग महामारी विज्ञान के प्रोफ़ेसर मार्क 
वूल  हाउस का कहना है -'अभी हमारी सबसे बड़ी समस्या  इससे बाहर निकलने की नीति को लेकर है कि हम इससे कैसे निजात पाएं ।'
एक्जिट स्ट्रेटेजी  ब्रिटेन मात्र न होकर विश्व के किसी भी मुल्क के पास नहीं है वूलहाउस काकहनाहै ।

इस संकट से बाहर निकलने के मुख्य तीन रास्ते हैं :
१, टीका 
२,संक्रमण से बचने के लिए व्यक्तियों में प्रतिरोधात्मक क्षमता का विकास 
३,अपने समाज व व्यवहार को स्थाई रूप से परिवर्तित करना ।
इन तीनों में किसी भी उपाय से वायरस फैलने की क्षमता को घटाया जा सकता है ।
  
टीके कब तक ?
इसके टीको द्वारा व्यक्तिको इतनी क्षमता मिल सकेगी कि व्यक्ति इस वायरस के प्रभाव से बीमार नहीं होगा ।लगभग ६०%जनसंख्या को रोग मुक्त कराने के लिए उनकी प्रतिरोधात्मक क्षमता का  विकास करना आवश्यक है ऐसी अवस्था में कोई भी वाइरस महामारी न बन सकेगा ।

इसी सप्ताह अमेरिका में कोरोना वाइरस के टीकों का शोध किया गया और एक महिला पर इसका परीक्षण किया गया ।इस परीक्षण में कोई भी परीक्षण प्रथम मनुष्यों पर न किये जाने के नियम को छूट दी गई और पहली वार ही इसका प्रयोग मनुष्य पर  हुआ ।

यदि सारी चीजें सामान्य रहती हैं तो भी इसके टीकों के विकास  के लिए १२ से १८ महीने का समय लगेगा ।किसी प्रतीक्षार्थी के लिए ये बहुत लम्बा समय है ।तब जबकि सारा विश्व ही एक प्रतिबंधात्मक स्थिति से गुजरकर कोरोना को रोकने के प्रयत्न में जुटा है ।ऐसी अवस्था में इतना समय कहाँ से आएगा ; ये मूल विषय है । प्रोफ़ेसर वूल हाउस के अनुसार टीकों की प्रतीक्षा करने को रणनीति का नाम नहीं देना चाहिए ।ये कोई रणनीति नहीं है ।

मनुष्य में प्राकृतिक प्रतिरक्षा का सृजन कैसे ?
ब्रिटेन की इस समय की सबसे बड़ी रणनीति है कि कोरोना का संक्रमण जितना हो सके कम फैले का प्रयत्न ताकि अस्पतालों पर अधिक बोझ न हो क्योंकि अभी की अवस्था में अस्पताल के विशिष्ट कक्ष खाली ही नहीं है, अगर कोरोना पर नियंत्रण किया जा सका तो प्रतिबन्ध को कुछ ढीला किया जा सकता है ।परन्तु यदि इसकी अवस्था यथावत ही रही तो इस पर और भी कठोर प्रतिबन्ध लगाने  पड़ेगे  ।
ब्रिटेन के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार सर पेट्रिक भेलेन्स का कहना है कि हरेक चीज पर रोक लगाना संभव ही नहीं ।

   इस वाइरस से प्रभावित होने की स्थिति में  (प्राकृतिक रूप से )अनजाने ही मनुष्य ,में  प्रतिरोधात्मक शक्ति का विकास हो सकता है परन्तु इसके लिए काफी लम्बा समय लग सकता है ।
   
इम्पीरिअल कॉलेज लंदन के प्रोफ़ेसर नील फर्गुसन कहते हैं -'हम लोग एक स्तर पर संक्रमण को दबाने की बात कर रहे हैं हम आशा करते हैं की छोटे स्तर पर ही लोग इससे संक्रमित होवें । 

उनके अनुसार अगर ये दो वर्षों से अधिक जारी रहा तो देश का एक बड़ा हिस्सा हीइससे संक्रमित हो सकता है जिससे मनुष्य में प्रतिरोधात्मक क्षमता का विकास हो भी सकता है ।
और दूसरे रास्ते क्या ?
प्रोफ़ेसर वूल हाउस कहते हैं कि तीसरा विकल्प है हमारे व्यवहार को ही सदा के लिए परिवर्तित करना जिससे संक्रमण का स्तर कम हो ।इसमें कुछ  तो ऐसे उपाय हैं जो कि लागू भी होचुके हैं ।

हमको  बीमार की  प्रथमतः पहचान करनी  होगी और उसके बाद उनके संपर्क  में आये हुए लोगों को खोजने की प्रक्रिया को अपनाया गया था परन्तु इसने काम नहीं किया ।

एक दूसरा तरीका कि रोगी का उपचार अस्पताल में ही हो जिससे ये कम घातक हो ।विशिष्ट कक्षों की व्यवस्था को बढाकर भी संक्रमण को घटाने का उपाय किया जा सकता है ।

ब्रिटेन के मुख्य चिकित्सा सलाहकार क्रिस भीटी के अनुसार सबसे उत्तम उपाय इसके टीके ही हैं । उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये शीघ्र ही मिल सकेंगे ।

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