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शब्दवाणों की गंगा : तू दो कह मैं चार कहूं

person access_timeFeb 28, 2021 chat_bubble_outline0

काठमांडू। राजनीतिक जगत भी बड़ी सनसनीखेज खबरों से भरा रहता है। कई बार कुछ बाते कही एक अंदाज से जाती हैं पर उनका अर्थ दूसरे ही तरह से निकाल लिया जाता है।
अभी संसद विघटन, रिट प्रक्रिया, अदालत के निर्णय से वातावरण ठंडा भी नहीं हो पाया था कि एक और नया मामला और मामला भी सनसनीखेज। बताया गया है कि नेकपा प्रचंड माधव समूह के नेता रघु जी पंत ने ओली समूह की नेतृ कोमलवली पर कुछ कटाक्ष कर दिया है। वैसे शब्द सुनने में- पढ़ने में बड़े अभद्र जान पड़ते हैं। चर्चित रघुजी पंत ने कह दिया कि कोमल वली साड़ी को जरा सा ऊपर सरकाकर ओली को पैरों की पिंडलियाँ दिखाकर नेकपा की केंद्रीय सदस्य बनी है। वैसे उन्होंने कुछ ऐसी बातें भी कहीं जो सोचनीय है- जैसे वर्षों से कम्युनिष्ट पार्टी में लगी हुई महिलाएं अभी तक न तो केंद्रीय सदस्य हो पाई हैं और न ही उन्हें चुनाव लड़ने को टिकट ही मिला है। वे बूढी हो चली हैं, उनके चेहरों पर झुर्रियां पड़ गई हैं,उनके बाल सफ़ेद हो गए हैं परन्तु ये जो साड़ी उठा उठाकर गीत गाती हैं 'पोइल जान पाऊं' इन्हें तो जुम्मा जुम्मा में सारे अधिकार मानो बख्शीश में मिल गए।  

खैर जो भी हो इस किस्म की शब्दावली का प्रयोग शोभनीय तो कतई नहीं है।  

उधर नेतृ कोमल वली अभी किसी काम के सिलसिले में दांग में हैं, ने बताया है कि वे कानूनी परामर्श कर रही हैं तथा काठमांडू आते ही इस पर केस फायल करेगी। वैसे जानने योग्य बात है की उनके साथ पूरा महिला मंडल भी है।  

जो है देश की राजनीति एक तरफ ठंडे होने का नाम नहीं ले पाती कि दूसरी और स्वतः ही भभक उठती है।

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