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अन्तर्वार्ता

नेकपा महासचिव का प्रस्ताव : सचिवालय सदस्यों द्वारा किया जाय त्याग स्थायी कमेटी के अंदर से ही खोजा जाय नया नेतृत्व

''आधुनिक विज्ञान ने फूटी हुई हांडी को जोड़ने के लिए नए रसायन का आविष्कार कर लिया है''

person access_timeDec 04, 2020 chat_bubble_outline0

काठमांडू। सत्तारूढ़ दल नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी के अंदर का संघर्ष चरम पर पहुँच गया है। ये शक्ति संघर्ष वास्तव में कहाँ से शुरू हुआ तथा कहाँ जाकर इसका अंत होगा, इस विषय पर आम लोगों की गंभीर रूचि है। नेकपा महासचिव विष्णु पौडेल के अनुसार नेकपा की पुरानी और नई पीढ़ी के बीच स्प्रिंग में समस्या है। उनका कहना हैं कि अब पुरानी पीढ़ी से नयी पीढ़ी में नेतृत्व हस्तान्तरण ही इस समस्या का समाधान है। नेकपा के किसी भी हाल में टूटने का दावा करनेवाले पौडेल का कहना है कि किसी के द्वारा इसे तोड़ने कि चेष्टा किये जाने पर भी ये नहीं टूट सकती। प्रस्तुत है महासचिव के साथ कि गई टेलीफोन बातचीत का सम्पादित अंश...

दो अध्यक्षों के फरक फरक प्रतिवेदन के सार्वजनिक होने की अवस्था में आज तक में नेकपा की यात्रा किधर के लिए तय हुई है एकता या कि विभाजन?

अभी कि परिस्थिति में मैं पार्टी को विभाजन की तरफ खींचे जाने कि कोशिस को भी देख पा रहा हूँ परन्तु पार्टी के अंदर एकता की पक्षधर जो शक्ति है वह पार्टी का विभाजन किसी भी हाल में होने नहीं देंगी। आज की तारीख में आते आते तक भी विभाजन की कोई सम्भावना नहीं है।  

नेकपा को विभाजन की ओर ले जाने का काम किसके द्वारा किया जा रहा है?

उस तरफ अभी न जाया जाय। मुझे उस तरफ जाने के लिए बाध्य न करें। कौन कौन का उच्चारण करने पर समस्या समाधान के लिए किये गए प्रयास कमजोर पड़ जायेंगे। इस कारण किसकी क्या भूमिका रही है इस विषय पर हम आंतरिक रूप से विचार करेंगे और निष्कर्ष पर पहुंचेंगे। आप विश्वस्त रहे नेकपा पार्टी का विभाजन नहीं होगा।

पार्टी की एकता होने के वक्त से लेकर दोनों अध्यक्षों के बीच होनेवाले बहुत सारे समझौतों सहमतियों के आप साक्षी रहे हैं, स्वाभाविक है कि आपको बहुत सारी बातें मालूम है बिना किसी टाल मटोल के बताएं कि पार्टी में विवाद आने में कौन अधिक दोषी है?

नेकपा में विवाद आने में, उस विवाद के उत्कर्ष में पहुँचाने के प्रश्न का जवाब जनता और कार्यकर्त्ता सबको मालूम हो चुका है। मेरा भी इस विषय पर अपना मूल्याङ्कन है। कहाँ से कैसे विवाद शुरू हुआ कैसे इसने इतना भयावह रूप लिया। परन्तु ये विषय पार्टी में ही चर्चा का विषय है अभी तक पहले इसकी चर्चा पार्टी में ही करूँगा फिर अगर जरुरत हुई तो आप सब लोगों के साथ भी इसे बाटूंगा।  

स्पष्ट कहें न पार्टी के अंदर आई अभी की समस्या क्या है और कैसे इसका समाधान किया जा सकेगा? कोई न कोई तो सूत्र अवश्य ही होगा।

समाधान का कोई एक सूत्र नहीं वरन समाधान के कई विकल्प हैं इस किस्म के अंतर्विरोध में क्रिया-प्रतिक्रिया होती है। इसी किस्म की क्रिया-प्रतिक्रया के फलस्वरूप समस्याओं का जन्म हुआ। अभी भी क्रिया और प्रतिक्रिया का दौर ख़त्म नहीं हुआ है। ये भी सत्य है की यहाँ अत्यंत अस्वस्थ, अमर्यादित, अराजनीतिक आरोप और लांछनाओं के स्तर तक अंतर्विरोध प्रकट हो चुका है। मुझे लगता है की अब जहाँ से पहले क्रिया शुरू हुई थी उसी स्थान से समस्या का समाधान खोजना होगा।  

एक अध्यक्ष ने दूसरे अध्यक्ष के प्रतिवेदन को आरोप और लांछना पत्र की संज्ञा दी है, साथ ही कहा है कि अगर ये पत्र वापस नहीं हुआ तो पार्टी विभाजन वहीँ से आरम्भ होगा। यदि प्रचंड द्वारा प्रतिवेदन वापस नहीं लिया गया तो क्या पार्टी विभाजन निश्चित है?

आपके द्वारा किया गया अनुमान तथा हमारी पार्टी की समस्त पंक्ति की अपेक्षा और पार्टी के अंदर के एकता पक्षधर लोगों की शक्ति का मूल्याङ्कन करते हुए मैं यही कहूंगा कि पार्टी एकता अक्षुष्ण रहेगी।  



परन्तु हमेशा झंझट ही होते रहना, पार्टी कमेटी के द्वारा किये गए निर्णय का कार्यान्वयन न करने की अवस्था ही अगर बनी रहेगी तो पार्टी की एकता के अक्षुष्ण होने न होने से क्या फर्क पड़ता है?

अबकी एकता प्रक्रिया, समस्या का समाधान करके पार्टी एकता को अक्षुष्ण रखने के स्थान पर वापस आने पर हम पार्टी एकता के कुछ महत्वपूर्ण आधारों का निर्माण भी करेंगे, जिसके कारन इस प्रकार के अस्वस्थ आरोप-प्रत्यारोप में उतरने की बातों का अन्त्य होगा।

तात्पर्य की नेकपा में नए आधारों पर नए किस्म की एकता होने जा रही है इसे मानाने से होगा?

खास करके विगत में हुई कमी-कमजोरियां, गल्तियां, समाज की नजर में अत्यंत आलोचित होने की प्रवृत्ति और समस्याएं पार्टी के आंतरिक जीवन में दिखाई दे रही हैं। इस किस्म की प्रवृत्तियों की पुनरावृत्ति न होने की किस्म से हम समस्याओं का समाधान करेंगे।  

पार्टी कमेटी की बैठक करने के लिए भी नेताओं को निवेदन देने की जरुरत होने की, खुद के द्वारा किये गए निर्णयों को खुद ही न मानने की प्रवृत्ति दिखाई दे रही है। इन दृष्टांतों के आधार पर नेकपा में अभी किस किस्म की सांस्कृतिक विकास हो रहा है?

इस विषय पर अभी मैं विस्तार से बात नहीं कर सकता परन्तु जहाँ तक मेरा मानना है- मुझे लगता है कि बैठक के लिए पार्टी में निवेदन दिए जाने की अवस्था नहीं आई है।

नेताओं द्वारा बैठक कि मांग किये जाने पर स्वीकार न किये जाने पर अध्यक्ष और प्रधानमंत्री ने उस पर आदेश पारित तो किया?

मैं फिर भी कहना चाहता हूँ कि पार्टी के अंदर की आंतरिक समस्याएं हमारे काबू में ही हैं। हमारे द्वारा इस पर नियंत्रण किया न जा सकना, एकता को बचा न पाना, मर्यादा की सीमाओं को तोड़कर आरोप-प्रत्यारोप लगाए जाने की स्थिति तक नहीं पहुंची हैं। इस कारण मेरी समझ में पार्टी की बैठक होकर और पार्टी की बैठक के लिए ही हस्ताक्षर होने की अवस्था नहीं आई है।

परन्तु नेताओं ने तो यही किया है?

अब अधिक उस तरफ न जाएँ।  

आपके बहुत सारे नेता-कार्यकर्त्ता चिंतित हैं कि नेकपा ढाई वर्षों में ही फूटी हुई हाँडी की तरह हो गया। फूटी हुई हांड़ी जुड़ती ही नहीं ये जानते हुए भी उसे जोड़ने का प्रयास हो रहा जैसा भी दिखाई दे रहा है। ऐसा कौन सा रसायन है जिससे फूटी हुई हांडी जुड़ सकेगी।  

पहली बात तो आपके द्वारा प्रयोग किया गया बिम्ब यथार्थ को प्रतिबिम्वित कर रहा है जैसा मुझे नहीं लगता। दूसरी बात जो अपने रसायन की बात की तो आधुनिक विज्ञान में सच ही ऐसे ऐसे आधुनिक रसायनों का आविष्कार हो चुका है जिससे टूटी हुई हाड़ियों को जोड़ा जा सकता है।

क्या शनिवार की बैठक में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली उपस्थित होंगे?

होंगे,  क्यों नहीं होंगे? बुधवार की बैठक में भी अध्यक्ष सहभागी नहीं हुए, उन्होंने सहभागी होना ही नहीं चाहा कहकर जो प्रचार किया गया है वह यथार्थ नहीं है। बुधवार की बैठक में अपनी कार्य व्यवस्तता के कारण मैं नहीं आ पाऊँगा उन्होंने पहले ही कहा था।  

एक घंटे समय स्थगित किये जाने के बाद भी न आने पर शनक होने का स्थान तो है?

वे आएंगे इस लिए समय बढ़ाया भी नहीं गया है। जिस वक्त बैठक तय की गई थी उसी समय उन्होंने व्यस्तता के कारण खुद के न आ पाने की बात कही थी।  

अध्यादेश, संकटकाल और संसद विघटन का भय दिखाकर अध्यक्ष ओली द्वारा नेताओं को साइज में रखने का प्रयास किये जाने की बात उनके ही कितने व्यवहारों से इंगित होता है? आप छिपाने की चेष्टा क्यों कर रहे हैं?

ये नितांत गलत और कपोल कल्पित बाते है। केपी शर्मा ओली लोकतंत्र के लिए सारी जिंदगी को समर्पित करनेवाले नेता हैं उनके द्वारा जीवन में कोई भी अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक यात्रा की जाएगी इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। हाँ हो सकता है सहमति-असहमति होगी परन्तु संसद विघटन, संकटकाल और दल विभाजन किये जाने के प्रचार आधारहीन तथा अविश्वास जनक हैं।  

नेकपा में अंतर्विरोध बढ़ने के पीछे सैद्धांतिक राजनीतिक कारण हैं कि व्यक्तिगत टकराव? आप क्या कहेंगे।  

नेकपा में नयी पीढ़ी और पुरानी पीढ़ी के बीच स्प्रिंग है। यहाँ पुरानी पीढ़ी हमेशा नेतृत्व में बने रहना चाहती है तथा नई पीढ़ी पर अविश्वास करने की स्थिति है। यही मूल समस्या है। हम लोगों को इसी विन्दु पर खड़े होकर चर्चा करनी चाहिए, मेरा दृष्टिकोण है। जब तक हम लोग नई पीढ़ी में सत्ता हस्तान्तरण करने के बिंदु पर नहीं पहुँच जाते ये समस्याएं यथावत ही रहेंगी। इसी कारण मैंने स्टष्ट रूप से कहा है कि अब हम लोगों के सामने सचिवालय के बाहर से नेतृत्व की खोज करने की अवस्था आ चुकी है। इसके लिए हम सचिवालय से सम्बद्ध मित्रों को भी योगदान करना होगा। मूलतः स्थायी कमेटी से नए नेतृत्व का प्रवन्ध करने के हिसाब से आगे बढ़ना होगा। इससे ही अभी हमारी समस्या का समाधान होगा।

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