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प्रधानमंत्री की अनिच्छा के कारण नहीं हो सकी संवैधानिक निकाय में नियुक्ति

person access_timeSep 16, 2020 chat_bubble_outline0

रातोपाटी संवाददाता

 

काठमांडू। नेपाली कांग्रेस द्वारा प्रधानमंत्री की अनिच्छा के कारण संवैधानिक निकायों में पद पूर्ति न हो सकने का आरोप लगाया गया है।

प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली द्वारा तुरंत किये जानेवाले कामों को प्राथमिकता में न रखकर प्राथमिकता में न आनेवाले कामों पर खूब क्रियाशीलता दिखाई जा रही है का आरोप कांग्रेस ने लगाया है। लम्बे समय से रिक्त संवैधानिक आयोगों के पद पूर्ति पर ध्यान न दिया जाना सरकार और प्रधानमंत्री की कमजोरी बताते हुए इसका अपयश प्रतिपक्षी को नहीं दिया जाना चाहिए, कांग्रेस प्रवक्ता विश्वप्रकाश शर्मा ने कहा है। 

अच्छे कामों का यश सरकार द्वारा लिए जाने की चेष्टा स्वाभिक होने पर भी, काम में ढिलाई, नहीं किये जा सकनेवाले और नहीं किये गए कामों के सन्दर्भ में प्रतिपक्ष को दोषी दिखाना ओली की प्रवृत्ति होने की बात उन्होंने कही। 

13 संवैधानिक आयोगों में से अभी 10 आयोगों में 39 पद रिक्त हैं। प्रतिपक्षी दल द्वारा बार्गेनिंग किये जाने के कारण पदपूर्ति में ढिलाई होने की बात का प्रचार हो रहे समय में शर्मा ने लम्बे समय से प्रदेशों का नामाकरण तक भी कर न सकने वाला सत्तारूढ़ दल संवैधानिक निकायों में पदपूर्ति न किये जा सकने का प्रचार नहीं करना चाहिए। 

उन्होंने कहा- ''प्रदेशों का नामाकरण नहीं हो सका है। नेकपा की ही सरकार है तो क्या हुआ क्यों अभी तक प्रदेशों का नामकरण नहीं हो सका? कितने ही विश्व विद्यालयों में नेतृत्व रिक्त है।  बहुत सारे संवैधानिक निकायों के पद रिक्त हैं। ये निर्णय करनेवाली संवैधानिक परिषद

में अलग अलग क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व होने पर भी सत्तारूढ़ दल के निकटस्थों का ही बहुमत है।  इस कारण प्रतिपक्ष के कारण ये निर्णय न हो सका का इल्जाम लगाना गलत है।''

अभी तक भी मधेशी, दलित और आदिवासी जनजाति आयोगों को अध्यक्ष नहीं मिल सके हैं।  इन आयोगों में अध्यक्ष के साथ 4 और पदाधिकारियों के रहने की व्यवस्था है। किसी भी नियुक्ति के वक्त ये पद हमें चाहिए कहकर कांग्रेस ने अभी तक कोई विनती नहीं की है। 

संवैधानिक परिषद की व्यवस्था के अनुसार राज्य के महत्वपूर्ण अंगों पर नेतृत्व के चयन के समय सभी का साझा स्वामित्व होना चाहिए कि धारणा कांग्रेस की होने पर भी अपने दल के द्वारा किसी प्रकार की कोई बार्गेनिंग नहीं किये जाने की बात को शर्मा ने स्पष्ट किया।

व्यक्ति कि योग्यता, क्षमता और मर्यादा कैसी होनी चाहिए जैसी बात पर कांग्रेस द्वारा स्पष्ट धारणा रखी जाने पर भी ये पद हमें देना ही होगा अन्यथा हम निर्णय नहीं होने देंगे ऐसा हम लोगों ने कभी भी नहीं कहा है,शर्मा ने बताया।

रविवार नवीन घिमिरे का कार्यकाल समाप्त होने के बाद वहां पद रिक्त है। आयुक्त राजनारायण पाठक घूसकांड में संलग्न मिलने पर उन्होंने इस्तीफ़ा दिया था। निर्वाचन आयोग में इला शर्मा और सुधीर शाह का कार्यकाल समाप्त होने के बाद वहां कोई भी नियुक्त नहीं हो सका है।  प्रवक्ता शर्मा ने इतने आयोगों के पदाधिकारी विहीन होने पर भी उस तरफ ध्यान नहीं दे पानेवाली सरकार महामारी के साथ जूझने में भी अक्षम है, बताया है।

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