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नीद का अंक गणित और बीज गणित

person access_timeFeb 29, 2020 chat_bubble_outline0

बहुत से लोंगो का प्रश्न होता है हमे कितना सोना चाहिए? प्रश्न निसन्देह महत्वपूर्ण है क्योकि देख्ने मे आया है कि अधिकतर लोगों मे  इसके बारे में बहुत ही अधिक गलतफहमिया व्यप्त है। आज इसी बारे मे कुछ चर्चा -


स्लीप आर्किटेक्चर: इस  प्रश्न के  उत्तर  से पहले एक बहुत जरूरी बात जान लीजिये। हम कितने घंटे सोते हैं उससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि हम सोने के दौरान किन किन अवस्थाओं में कितना समय बिताते हैं? जब हम सोते हैं तो सोने की इन चार स्टेज से गुजरते हैं।


स्टेज 1 - जब हम सोना शुरू करते हैं मतलब जागृति से नींद की अवस्था में जाते हैं इसे स्टेज 1 कहते हैं। अपेक्षाकृत हल्की नींद की इस छोटी अवधि (कई मिनटों तक) के दौरान, आपके दिल की धड़कन, श्वास, और आंखों की गति धीमी हो जाती है, और आपकी मांसपेशियां कभी-कभार हल्का आराम करती हैं। आपके जागृति अवस्था के दिमागी पैटर्न की अपेक्षा आपकी मस्तिष्क तरंगें धीमी होने लगती हैं।


स्टेज 2 : नींद की यह स्टेज, गहरी नींद में प्रवेश करने से पहले हल्की नींद की अवस्था है। इसमे आपके दिल की धड़कन और श्वास धीमी होती जाती है और मांसपेशियां और भी ज्यादा आराम अनुभव करने लगती हैं। आपके शरीर का तापमान गिरना शुरु हो जाता है और आंखों की गति रुक जाती है। 'ब्रेन वेव एक्टिविटी'  और भी धीमी हो जाती है।

स्टेज 3 : यह स्टेज गहरी नींद की अवस्था है और इसी अवस्था की नीद की वजह से हम तरो ताज़ा महसूस करते हैं। इस नीद दौरान आपके दिल की धड़कन और सांस की गति बहुत धीमी हो जाती है। आपकी मांसपेशियों को भरपुर आराम मिलता है। एस अवस्था की नीद से कभी कभी आपको जागना मुश्किल हो सकता है। इस अवस्था मे मस्तिष्क की तरंगें और भी धीमी हो जाती हैं।


स्वपन स्टेज (REM स्टेज) : नीद मे  हमारी  आंखें बंद पलकों के पीछे तेजी से चलती हैं। 'मिक्स्ड फ़्रीक्वेंसी ब्रेन वेव एक्टिविटी' जागने के करीब हो जाती है। हमारी श्वास तेज और अनियमित हो जाती है, और  हृदय की धड्कन की दर और रक्तचाप का स्तर जागने के स्तर के करीब आ जाते हैं। हम अधिकांश सपने REM नींद के दौरान ही देखते हैं। इस दौरान हमारे हाथो और पैरो की मांसपेशियां अस्थायी रूप से लकवाग्रस्त हो जाती हैं।


आप किसी भी सोने की लैब में अगर रात भर सोयेंगें तो वो आपका हिप्नोग्राम बना कर आपको दिखा सकते हैं। हम कितने घंटे सोते हैं उससे अधिक यह महत्वपूर्ण है कि हम किस स्टेज में कितना समय गुजारते हैं? हर चक्र लगभग 90 मिनट का होता है। जैसे जैसे भोर होती है हम अधिक समय REM की स्टेज में व्यतीत करते हैं और अधिकतर सपने देखते हैं। REM स्टेज हमारे लिए बहुत जरूरी है। अगर किसी व्यक्ति को कम REM की नींद ही आती हो तो उसको बातों को याद करने में परेशानी होगी क्योंकि हमारी दीर्घकालीन स्मृतिया इसी वक्त बनती है।


कितनी नींदी जरूरी है?

 

ज्यादा नींद लेने से पहले जान लीजिये क़ि 'नेशनल स्लीप फाउंडेशन के हिसाब से कम या ज्यादा नींद किसे कहते हैं। देखिये हर व्यक्ति की नींद की जरूरत अलग अलग होती है। इस लिए 'नेशनल स्लीप फाउंडेशन' इसको रेंज के हिसाब से बताते हैं।


उम्र के हिसाब से हमको कितने घंटे सोना चाहिए :


नवजात से तीन महीने के बच्चे: 11 घंटे से 19 घंटे तक। वैसे तो औसत 14 से 17 घंटे है लेकिन 11 से 19 घंटे भी हो सकता है।

4 महीने से 11 महीने के बच्चे : वैसे तो औसत रूप से 12 घंटे से 15 घंटे तक सोना चाहिए लेकिन कुछ बच्चे 10 घंटे से 18 घंटे तक सोते हैं।

एक साल से दो साल के बच्चे : औसत रूप से 11 घंटे से 14 घंटे तक लेकिन 9 घंटे से 18 घंटे की नींद भी ठीक है।

3 साल से 5 साल के बच्चे : औसत रूप से 10 घंटे से 13 घंटे तक लेकिन 8 घंटे से 14 घंटे तक की नींद भी ठीक मानी जाती है।

6 साल से 13 साल के बच्चे : ऐसे बच्चों को 9 घंटे से 11 घंटे तक सोना चाहिए। कुछ बच्चे 7 घंटे से 12 घंटे तक भी सोते हैं। किशोरों और किशोरियों को 8 घंटे से 10 घंटे तक सोना चाहिए लेकिन कुछ लोग 7 घंटे से 11 घंटे तक भी सोते हैं।

14 से 17 साल के लोग : इस उम्र के लोगों को औसत रूप से 8 घंटे से 10 घंटे तक सोना चाहिए लेकिन 7 घंटे से 11 घंटे तक भी चलता है।

18 साल से 25 साल तक : आप मे से बहुत से पाठक इसी उम्र समुह के होंगे,  उनको औसत रूप से 7 घंटे से 9 घंटे तक सोना चाहिए। कुछ लोग वैसे 6 घंटे से लेकर 11 घंटे तक भी सोते हैं।

26 से 64 साल के उम्र वाले: बाकी सभी लोगों को 7 घंटे से लेकर 9 घंटे तक सोना चाहिए लेकिन कुछ लोग जेनेटिक्स की वजह से 6 घंटे से 10 घंटे तक भी सोते हैं।

65 साल के ऊपर के लोगों को : यह बुढ़ापे के दिन हैं और आपको 7 घंटे या 8 घंटे सोना चाहिए लेकिन कुछ लोग 5 घंटे से 9 घंटे तक सोते हैं।

ज्यादा नींद किसे कहेंगें ?

देखिये कोइ व्यक्ति सिर्फ 4 घंटे सोता हैं। निसन्देह यह कम है। आपके कई मित्र होंगे जो 8 घंटे सोते होंगे। यह कुछ हद तक हमारी बायोलॉजी पर भी निर्भर करता है। अब मान लीजिये हम किसी ऐसे इंसान का उदाहरण देते हैं जिसकी उम्र 18 साल से 25 के बीच हो। उसकी नीद को ज्यादा नींद इन हालातों में कहेंगें -

वो 11 घंटे से ज्यादा सोता हो।
उनको सोने के बाद थकावट महसूस होती है।

अगर आपका हिप्नोग्राम ठीक है फिर भी थकावट है और बहुत अधिक नींद आती है तो आपको अधिक सोने की समस्या है।

ज्यादा नींद का शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है?

ऊपर की जानकारी बहुत जरूरी थी क्योंकि लोग बिना जाने समझे किसी की नींद को कम या ज्यादा बता देते हैं। सबके नींद लेने का समय अलग अलग होता है। हिप्नोग्राम बहुत जरूरी है इसको समझने के लिए। अगर किसी को हिप्नोग्राम के सही होने के बावजूद अधिक नींद आती है तो मेटाबोलिक सिंड्रोम की समस्या हो सकती है।

बहुत खतरनाक और जानलेवा बीमारी की शुरुआत है मेटाबोलिक सिंड्रोम। अधिक नींद आने से या तो यह हो सकता है या इसके होने से अधिक नींद आ सकती है। अक्सर जो लोग काउच पोटैटो होते हैं उनको यह बीमारी होती है। इसको डॉक्टर लैब में खून का टेस्ट करके आपको बता सकते हैं। जिनकी तोंद निकली हो उनको अपने खून की जांच करवा लेनी चाहिए। क्योंकि इसका लक्षण है पेट के आस पास ज्यादा चर्बी का होना।


इसकी वजह से आपको यह सब बीमारियां हो सकती हैं :


मधुमेह : इसकी शुरुआत असल में मेटाबोलिक सिंड्रोम से ही होती है।

इन्सुलिन रेजिस्टेंस:ऐसे लोगों को मिठाई खाने के बाद में खून से शुगर को हटाने वाली इन्सुलिन की समस्या होती है।

दिल की बीमारी: दिल की बीमारी की शुरुआत भी इसी कारण से हो सकती है।

हाइपरटेंशन: अगर किसी का ब्लड प्रेशर बहुत अधिक हो तो समझ लीजिये उसमे भी यह समस्या  है।

कैंसर: इसकी वजह से कैंसर भी हो सकता है।

जैसे क़ि आपने  उपर पढा,  ये सब बीमारियां जान लेवा हैं। अगर किसी को बहुत अधिक नींद आती हो और नींद के बाद भी थकावट होती हो तो डॉक्टर से मिलना बहुत जरूरी है। डॉक्टर से मिलकर अपने खून की जांच करवा लें। और अगर हो सकता हो तो अपना हिप्नोग्राम निकलवा लें।

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