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शब्द और उसका नियतार्थ (नियत+अर्थ)

person access_timeAug 09, 2020 chat_bubble_outline0

मुक्तिबंधु  
काठमांडू। मैं यहाँ शब्द के निहितार्थ की बात नहीं कर रहा। किसी भी शब्द का निहितार्थ तो शब्दकोष में बड़ी आसानी से मिल ही जाता है परन्तु नियतार्थ किसी शब्दकोष में नहीं मिलता। उसे तो वक्त की नियत में ही खोजना पड़ता है। नियत उसके व्यवहार में मिलनेवाली भी चीज है।  

इसी श्रावण 30 गते सवेरे कोविड- 19 की अद्यावधिक जानकारी देने के क्रम में स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता प्राध्यापक डॉ जागेश्वर गौतम ने कहा ''अभी कोविड- 19 के संक्रमितों की संख्या 'यथेष्ट' है।'' इस वाक्य में उपयोग किये गए 'यथेष्ट' शब्द ने मुझे बहुत झकझोरा। यथा+इष्ट= यथेष्ट अर्थात चाह के अनुसार,  बास्तव में ये संस्कृत शब्द है। इस शब्द के अर्थानुसार प्रस्तुत वाक्य का तात्पर्य होता है 'अभी देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या सरकार द्वारा चाही गई मात्रा में ही बढ़ा है। 'प्रा डॉ गौतम जी के कहने का तात्पर्य यही है तो अब प्रश्न उठता है- 'सरकार द्वारा चाही गई मात्रा कितनी है? इतनी ही या इससे भी अधिक ? अधिक यही तो कितनी अधिक ? आज की सरकार देश में कोरोना संक्रमितों की कितनी संख्या चाहती है ?

यथेष्ट शब्द का मूल, व्युत्पत्ति और इसका निष्पाद्य अर्थ अगर कोई दूसरा ही है तो शायद सरकार को इसे सप्रमाण स्पष्ट करना होगा ! अन्यथा सरकार का आधिकारिक प्रवक्ता। वह भी जन साधारण न होकर असाधारण जन। प्राध्यापक हुए । विद्यावारिध किये हुए, हर बार प्रवचन करने के क्रममें स्वयं को ही ''मैं प्रा डॉ जागेश्वर गौतम '' कहते आ रहे प्रबुद्ध व्यक्ति द्वारा अभिव्यक्त वाक्य में व्यक्त शब्द। उनके द्वारा अर्थ को न जानकर 'यथेष्ट' शब्द का प्रयोग किया गया होगा ऐसा नहीं माना जा सकता। अगर किसी दूसरे का लिखा भी पढ़ा है तो भी तोते की तरह बिना समझे ही पढ़ दिया होगा ये भी नहीं कहा जा सकता। बिना समझे ही पढ़ दिया होगा कहने पर उनके नाम के साथ खड़ी दो दो पगड़ियां अपमानित होंग। कहीं ऐसा तो नहीं कि कोरोना के फैलते जाने पर सरकार ने ही नेपाली शब्दों के अर्थ ही बदल दिए हों ? अगर ऐसा भी है तो जनता को तो इन बातों से सुसूचित होना चाहिए। मात्र यथेष्ट शब्द का ही अर्थ बदला है कि और शब्दों के ही अर्थ बदले गए हैं ? जनता को जवाब चाहिए।

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