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वुहान सर्वेक्षण में दिखे भयावह नतीजे : कोरोना मुक्त हुए 90% लोगों में फेफड़ों की समस्या

person access_timeAug 07, 2020 chat_bubble_outline0

रातोपाटी संवाददाता
 
एजेंसी। एक अध्ययन के दौरान कोरोना संक्रमितों के सम्बन्ध में दहलाने वाले परिणाम बाहर आये हैं। इस अध्ययन की रिपोर्ट में कहा गया हैं कि कोरोना संक्रमित जो स्वस्थ होकर अपने घर कामकाज पर लौट चुके हैं उनमें प्रत्येक 100 में से 90 लोगों को अभी भी फेफड़ों की समस्या बनी हुई है। इसी तरह ठीक हो चुके लोगों में से 5% में फिर से पॉज़िटिव नतीजा भी देखा जा रहा है जिसके कारण उन्हें फिर से क्वरेंटीन में रखने की व्यवस्था की गई है, चीनी सरकारी संचार माध्यम ग्लोबल टाइम्स में प्रकाशित समाचार में उल्लेख है।  

उहाना विश्व विद्यालय के झोंगनान अस्पताल ने अस्पताल के इंटेंसिव केयर यूनिट के निर्देशक पेंग झियोंग के नेतृत्व में पिछली अप्रैल से इधर 100 बीमारों को निरंतर फ़ॉलोअप किया जा रहा है। एक वर्ष के कार्यक्रम के अंतर्गत पहले चरण का कार्यक्रम जुलाई में समाप्त होने का मीडिया रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है। इन 100 बीमारों की औसत आयु 59 वर्ष है।

पहले चरण के परिणामानुसार इन 100 बीमारों में से 90 बीमारों के फेफड़े अभी भी क्षतिग्रस्त अवस्था में ही हैं। जिसका तात्पर्य है कि इन लोगों के फेफड़ों के वेंटिलेशन और गैस एक्सचेंज कार्य अभी भी स्वस्थ व्यक्तियों के स्तर तक नहीं पहुँच सका है।  

पेंग की टीम ने इन बीमारों को 6 मिनट तक चलकर परीक्षण किया था जिसके अनुसार ये व्यक्ति 6 मिनट में केवल 4 सौ मीटर ही चल सके थे जबकि स्वस्थ व्यक्ति इतने समय में 5 सौ मीटर तक चलता है। दोंग जिमिन अस्पताल के डॉ लियांग तेंगसियओ के अनुसार ठीक हो चुके कुछ
मरीज अस्पताल से डिस्चार्ज होने के तीन महीनों बाद भी ऑक्सीजन मशीन का सहारा लेने को बाध्य हैं।  

लियांग की तीन ठीक हो चुके 65 वर्ष की उम्र से ऊपर की उम्र के लोगों का भी फ़ॉलोअप कर रही है। मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि बीमारों को डिप्रेसन तथा कुछ हद तक लोक लाज का भी सामना करना पड़ रहा है। ठीक हो चुके बीमारों ने बताया कि परिवार के सदस्य उन लोगों के साथ एक ही टेबल पर बैठकर खाना खाना पसंद नहीं करते। रिपोर्ट में भी उल्लेख है कि ठीक हो चुके बीमारों में से आधे की संख्या में ही लोग अपने अपने कामों पर लौटे हैं।

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