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कोरोना वायरस

कोरोना वायरस प्रारम्भ से अब तक : वैज्ञानिक शोध-खोज

person access_timeJun 23, 2020 chat_bubble_outline0

किसी महामारी के फैलने की जांच जासूसी पड़ताल जैसी ही होती है। किसी जासूसी जांच में सबूतों के गायब होने से पहले अपराध की जगह पर पहुंचना होता है, प्रत्यक्षदर्शियों से बात करनी होती है। इसके बाद जांच की शुरुआत होती है। सबूतों की कड़ियों को जोड़ते हुए अगले वारदात से पहले हत्यारे को पकड़ लिया जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर की तमाम कोशिशों के बावजूद कोरोना महामारी का प्रकोप लगातार फैल रहा है और यह महामारी हर दिन हजारों लोगों की जान ले रहा है।

किसी वायरस का हमारे स्वास्थ्य पर क्या असर होगा और यह कितनी तेजी से फैलेगा, इसे समझने के लिए वायरस की शुरुआत के बारे में जानना जरूरी होता है। लेकिन कोरोना वायरस शुरुआत से ही लोगों को अचरज में डालता रहा है। जब दुनिया 2020 के आगमन पर जश्न की तैयारी में जुटी थी तब चीन के वुहान सेंट्रल हॉस्पीटल के आपातकालीन विभाग के डॉ. ली वेनलियांग को सात मरीज मिले। ये सबके सब फेफड़े की बीमारी न्यूमोनिया से पीड़ित थे। इन सबको क्वारंटीन किया गया।

30 दिसंबर को अपने सहकर्मियों के साथ प्राइवेट वीचैट मैसेजिंग ऐप पर डॉक्टर ली वेनलियांग ने आशंका जताई कि क्या सार्स (सीवर एक्यूट रिस्पेरटरी सिंड्रोम) का नया दौर आ चुका है? सार्स भी कोरोना वायरस का एक रूप है। पहली बार यह चीन में ही 2003 में सामने आया था। इसके बाद यह 26 देशों में फैला और इसकी चपेट में आठ हजार से ज्यादा लोग आए थे।  हालांकि डॉ. ली ने जिस बीमारी की पहचान की थी, वह सार्स का दूसरा चरण नहीं था बल्कि कोविड-19 वायरस (सार्स-कोव-2) का पहला चरण था।

चीनी मीडिया के मुताबिक अपने सहकर्मियों के बीच इस बीमारी के फैलने की चेतावनी देने के तीन दिन बाद डॉ. ली को पुलिस ने आठ अन्य लोगों के साथ अफवाह फैलाने के आरोप में हिरासत में ले लिया। काम पर लौटने के बाद डॉ. ली कोविड-19 से संक्रमित हो गए। महज 34 साल के डॉ. ली की मौत सात फरवरी को हो गई। परिवार में उनकी गर्भवती पत्नी और एक बेटा है।



कैसे हुई संक्रमण की शुरुआत

वुहान शहर के नए हिस्से में स्थित है हुवान सीफूड मार्केट। छोटे छोटे दुकानदारों से भरा यह बाजार हर तरह के मांस, मछलियों के लिए एक तरह से हब है। दिसंबर, 2019 के अंतिम सप्ताह में डॉक्टरों और नर्सों ने जब इस बीमारी के फैलने की चेतावनी देनी शुरू की तब स्वास्थ्यकर्मियों ने सबसे पहले कोरोना महामारी का इस बाजार से कनेक्शन देखा, ज्यादातर संक्रमित मरीज हुआनान सीफूड मार्केट में काम करने वाले लोग थे। 31 दिसंबर को वुहान के स्वास्थ्य आयोग ने अपनी पहली रिपोर्ट बीजिंग प्रशासन को सौंपी। अगले दिन बाजार को क्वारंटीन कर दिया गया।

आज, वैज्ञानिक एकमत होकर यह मान रहे हैं कि सीफूड मार्केट में कोरोना संक्रमण तेजी से फैला। लेकिन कोरोना का पहला मामला इस बाजार से निकला, यह नहीं कहा जा सकता। हालांकि बाजार में जब लोगों और जीवित जानवरों के सैंपल लिए गए थे तब वे सब कोविड-19 संक्रमित थे। 

वुहान में ही हुए मेडिकल रिसर्च के मुताबिक, इंसानों में कोरोना वायरस का पहला मामला, सीफूड मार्केट में संक्रमण फैलने से चार सप्ताह पहले ही सामने आ चुका था। वुहान के एक बुजुर्ग आदमी में एक दिसंबर, 2019 को कोरोना वायरस के लक्षण मिला था और इस बुजुर्ग का सीफूड मार्केट से कोई लिंक भी नहीं निकला था।

प्रोफेसर एंडरसन ने बताया, "जब हमने पहला सीक्वेंस देखा तभी हमें मालूम हो गया कि यह कोरोना वायरस का ही एक रूप है और सार्स से 80 प्रतिशत मिलता जुलता भी था।" दरअसल, कोरोना वायरस, वायरसों का एक बड़ा परिवार है। इनमें सैकड़ों की पहचान हो चुकी है और यह सुअर, ऊंट, चमगादड़ और बिल्लियों में पाए जाते हैं। कोविड-19 कोरोना वायरस परिवार का सातवां प्रारूप है जो जानवरों से इंसानों तक पहुंचा है।

प्रोफेसर एंडरसन बताते हैं, "हमारा दूसरा सवाल यही है कि हम इसका इलाज कैसे कर सकते हैं- इसके लिए टेस्ट कराना और वायरस संक्रमण के फैलने के तरीकों को समझना जरूरी है।" एंडरसन के मुताबिक, "हमारा तीसरा सवाल यह है कि हम इसके लिए वैक्सीन कैसे विकसित कर सकते हैं? इन सबका जवाब वायरस के जेनेटिक्स के ब्लू प्रिंट से ही मिलता है।"

दुनिया भर के साथ कोविड-19 का पहला जेनेटिक सीक्वेंस साझा करने के दो दिनों के भीतर स्थानीय अधिकारियों ने प्रोफेसर जैंग की लेबोरेटरी को बंद कर दिया और उनके रिसर्च लाइसेंस को रद्द कर दिया गया। चीनी मीडिया के मुताबिक इसकी कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई गई लेकिन प्रोफेसर जैंग की टीम के अध्ययन ने दुनिया भर के वैज्ञानिकों को रास्ता दिखा दिया था। प्रोफेसर एंडरसन ने बताया, "कोविड-19 के पहले जीनोम सीक्वेंस के बिना हम कोई अध्ययन शुरू नहीं कर पाते। इसके लिए उन वैज्ञानिकों को धन्यवाद है जिन्होंने अविश्वसनीय तेजी से इतनी महत्वपूर्ण जानकारी दुनिया को मुहैया कराई।"

कोविड-19 की रोकथाम के लिहाज से दुनिया का सबसे कामयाब देश 5.1 करोड़ की आबादी वाला दक्षिण कोरिया साबित हुआ है। दक्षिण कोरिया ने अपने यहां संक्रमितों के संपर्क में आने वाले लोगों का पता लगाने के लिए एक छोटी सी सेना तैयार कर ली और यही उसकी कामयाबी की सबसे बड़ी वजह रही।

कांटैक्ट ट्रेसर की इस सेना में शामिल लोग कोविड-19 संक्रमित और हाल फिलहाल उनके संपर्क में आए लोगों का पता लगाते थे। इसका पता लगाने के बाद वे लोगों को सेल्फ आइसोलेशन में भेजते या फिर यह तय करते कि क्या पूरी इमारत या फिर संस्था को क्वारंटीन किए जाने की जरूरत है। यह सब अस्पतालों, केयर होम और दफ्तरों के साथ किया गया।



जनवरी और फरवरी में दक्षिण कोरिया में कोरोना संक्रमण के कुछ ही मामले सामने आए और संक्रमण फैलने के खतरे को यह देश टालने में कामयाब रहा। लेकिन फरवरी के अंत में महज कुछ ही दिनों के अंदर दक्षिण कोरिया के एक शहर में कोरोना संक्रमण के हजारों मामले सामने आ गए। डायेगो शहर में कोरोना संक्रमण महज एक मरीज के मूवमेंटस से फैला। मरीज नंबर 31 के नाम से कुख्यात इस मरीज को दक्षिण कोरिया का सुपर स्प्रेडर कहा जाता है।

मरीज 31, 17 फरवरी को कोरोना से संक्रमित हुईं। लेकिन कांटैक्ट ट्रेसरों की टीम ने उनके संपर्क में आए सभी लोगों का पता लगा लिया। 10 दिनों के भीतर में वह एक हजार से ज्यादा लोगों के संपर्क में आई थीं। लेकिन हर शख्स का पता लगाकर उन्हें सेल्फ आइसोलेशन में रखा गया। इससे खतरा ज्यादा नहीं बढ़ा।

डायेगो शहर की महामारी रोग टीम के डिप्टी प्रोफे़सर किम जोंग यून शहर में कांटैक्ट ट्रेस करने वाली सेना के सर्वेसर्वा हैं। उनके मुताबिक इस काम के लिए ज्यादातर पूर्व सरकारी कर्मचारियों और जूनियर डॉक्टरों की तैनाती होती है। वे बताते हैं कि मरीज 31 की तरह ही टाल मटोल करने वालों से सामना होने पर कठोर तौर तरीके अपनाने होते हैं जिनमें क्रेडिट कार्ड के लेन देन की जांच, फोन और जीपीएस हिस्ट्री की जांच इत्यादि शामिल है। प्रोफेसर किम बताते हैं, "मरीज 31 ने हमें पहले नहीं बताया था कि वह शिनचेओनजी चर्च की सदस्य हैं। यह हमारी टीम ने बाद में पता लगाया।"

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