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विश्व पर्यावरण दिवस :  2020

person access_timeJun 05, 2020 chat_bubble_outline0

मनुष्य और प्रकृति का अन्योन्याश्रित संबंध है। अन्योन्याश्रित संबंध से भी अगर ये कहें की मनुष्य प्रकृति की ही जीती जागती रचना है तो भी शायद कोई अतिशयोक्ति न होगी। सभी जानते हैं कि मनुष्य की देह में 70 प्रतिशत पानी ही होता है इसी तरह कुछ और मात्रा में अन्य प्राकृतिक तत्व।

  
तुलसीदास ने तो कहा ही था मानव देह की निर्मिति पर....

 

गगन, समीर, अनल, जल, धरनी
इनकहि नाथ सहज जड़ करनी


प्रकृति की हर एक चीज मानव के लिए हितकारी एवं आवश्यक है परन्तु अनेक किस्म की शोधों, खोजों, अन्वेषणों और प्रयोगों के आधार पर मनुष्य नित प्रति प्रकृति के नियमों के विरुद्ध काम करता ही जा रहा है, वह निरंतर इसका दोहन कर रहा है परिणाम स्वरुप समय समय पर मनुष्यों को उसके कोप का भाजन भी बनना पड़ता है। कभी अनावृष्टि, कभी अतिवृष्टि, कभी ओले, कभी तूफान, कभी भूकंप तो और न जाने किन किन तरीकों से प्रकृति अपने कोप को व्यक्त करती है। 

अभी सारे संसार में छाई कोरोना संक्रमण महामारी जिससे सारा संसार त्रस्त है। वे देश जिनका आसुरी कभी अस्त ही नहीं होता जहाँ कभी रात ही नहीं आती जहाँ मानों आराम हराम है वे बड़े ही उत्साही, कर्मठ, क्रियाशील देश भी मानों घर रुपी बिलों में दुबके पड़े हैं। एक और मनुष्य घरों में दुबका तो दूसरी ओर प्रकृति खुद ने खुद को साफ-सुथरा, सजीव और जीवंत कर लिया। इससे ये तो विदित हो ही गया किए अगर मनुष्य की बेवजह दखलअंदाजी न हो तो सृष्टि का सब कुछ संतुलित रह सुन्दरतम तरीके से चल सकता है। 

 

सब जानते हैं कि मानव प्रकृति की संतान है पर फिर भी वह उस पर विजय पाने को मानों व्याकुल ही रहता है। मनुष्य द्वारा प्रकृति और पर्यावरण के साथ की गई विभिन्न भूलों के फलस्वरूप, उसकी रक्षा के हेतु से विचारवान लोगों ने प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने हेतु से सन 1972 संयुक्त राष्ट्र संघ की पहल में विश्व पर्यावरण दिवस की नीव रखी गई।  

 

सन 1972 से विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने 5 जून 1972 को विश्व पर्यावरण दिवस मनाने की नींव रखी। तब से लगातार हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है।

विश्व पर्यावरण दिवस मनाने की शुरुआत स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में हुई। यहां 1972 में पहली बार पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किया गया था जिसमें 119 देशों ने भाग लिया था। 

विश्व में लगातार बढ़ते प्रदूषण के कारण इस दिन को मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य है लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना। 
 

विश्व में जब पहली बार पर्यावरण दिवस मनाया गया था तब भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भारत की प्रकृति और पर्यावरण के प्रति अपनी चिंताओं को जाहिर किया था। 

इस साल मनाया जाने वाला पर्यावरण दिवस पिछले सालों से अलग होगा। इस वर्ष लॅाकडाउन की वजह से काफी मात्रा में प्रदूषण कम हो गया है। पिछले वर्षों तक जहां हम पर्यावण को लेकर अधिक चिंता में थे इस साल हमारी चिंताएं थोड़ा कम है क्योंकि वातावरण शुद्ध हो गया है। इसलिए इस बार का पर्यावरण दिवस पिछले वर्षों से अलग होगा।

लॅाकडाउन का पर्यावरण पर साकारत्मक प्रभाव पड़ा है। हमारी जिम्मेदारी है कि हम अब अपनी प्रकृति का ख्याल रखें। 

विश्व पर्यावरण दिवस को तब ही सफल बनाया जा सकता है जब हम पर्यावरण का ख्याल रखेंगे। हर व्यक्ति को ये समझना होगा कि जब पर्यावरण स्वच्छ रहेगा तब ही इस धरती पर जीवन संभव है।

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