हिंदी संस्करण

कल 1 जून को गंगा दशहरा यानि गंगा का पृथ्वी पर अवतरण का दिन

person access_timeMay 31, 2020 chat_bubble_outline0

एजेंसी। हम हिन्दुओं की संवेदनशीलता, सरलता, सहजता तथा समस्त विराट सृष्टि के प्रति सद्भाव के व्यवहार ने उसे प्रकृति का प्रेमी तथा पुजारी भी बना दिया है; हो भी क्यों नहीं आखिर सारा अखिल संसार उसी परम ब्रह्म परमात्मा का अलग अलग वस्तुओं के रूप में निखरनेवाला उसी का तो नूर है। कहानी कहती है की कपिलमुनि के श्राप से जलकर भस्म हो गए अपने दस हजार पुरखों के उद्धार के लिए महाराज भगीरथ गंगा को पृथ्वी पर लाये थे और तब से पावन सलिला गंगा-पापमोचिनी भागीरथी, कल्याणी, जाह्नवी पृथ्वी पर निरंतर प्रवाहित हो जन जन के मन को पावन करने में लगी है।  
 

हम गंगा को माँ का सम्बोधन दे कर इस पतितपावनी को सम्मान देते हुए प्रातः ही स्मरण करते हैं। हमारे समाज में गंगा सहित अन्य 6 नदियों के प्रति भी सम्मान में हम प्रातः स्नान के समय मंत्रोच्चार ही करते हैं-

गंगे च यमुने चैव गोदावरी, सरस्वती
नर्वदे, सिंधु, काबेरी जल स्नानं दिने-दिने

 

गंगा दशहरा हिन्दुओं का पावन पर्व है इस दिन लोग गंगास्नान करने के लिए जाते हैं जहाँ तहाँ गंगा के साथ साथ अन्य नदियों के तटों पर लोगों की भीड़ देखते ही बनती है। नदियों के तटों पर लोगों की भीड़ से तो मेला लग ही जाता है साथ ही इस दिन छोटे मोटे व्यापारी नदियों के तटों पर अपने तरह तरह के खोमचे लगाकर वहां की रंगत और भी बढ़ा देते हैं। बच्चों के लिए तो ये खास रोमांच का दिन ही होता है। बाहर निकलो, खेलो कूदो, खाओ पियो और धमाचौकड़ी मचाओ।

इस बार ये पर्व 1 जून को पड़ रहा है। शास्त्रों में कहा गया है कि गंगा स्नान और पूजा करने से न सिर्फ पापों से मुक्ति मिलती है बल्कि इसका अनंतकाल तक इसका पुण्य फल मिलता है। मान्यता है गंगा दशहरे के दिन गंगा स्नान करने से मनुष्यों के 10 तरह के पाप खत्म हो जाते हैं।
 

ग्रंथों में दस प्रकार के पाप का वर्णन किया गया है जिसमें काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह, मत्सर, ईर्ष्या, ब्रह्महत्या, छल-कपट, परनिंदा है। इसके अलावा अवैध संबंध, बिना बात जीवों को कष्ट देना, असत्य बोलने और किसी को धोखा देने से जैसे पाप भी गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान करने से धुल जाता है। 

गंगा स्नान करते समय सबसे पहले अपने ईष्ट देवता और सूर्य को प्रणाम कर गंगा नदी में डुबकी लगाएं। नहाने के बाद सूर्य देव को जल चढ़ाएं। गंगा स्नान से पहले स्वयं को अच्छी तरह से जल से धोए। फिर गंगा में डुबकी लगाएं। स्नान करते समय इस बात का ध्यान रखे कि नदी में शरीर का मेल साफ न करें।
गंगा स्नान के बाद शरीर को पोंछना नहीं चाहिए। बल्कि प्राकृतिक रूप से शरीर का सुखने देना चाहिए।
 

सूतक काल में कभी भी गंगा स्नान नहीं करना चाहिए।
अगर गंगा तट पर जाना संभव न हो तो विशेष दिनों में घर पर नहाने की बाल्टी में गंगाजल की कुछ बूंदे डालकर नहाएं।

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