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सरकार द्वारा पार्टी में चर्चा किये बिना एमसीसी पारित करने पर होगा हंगामा

person access_timeMay 26, 2020 chat_bubble_outline0

काठमांडू। सत्तारूढ़ दल नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी (नेकपा) के वरिष्ठ नेता झलनाथ खनाल ने अमेरिकी आर्थिक सहयोग मिलेनियम चैलेंज कॉर्पोरेशन (एमसीसी) समझौता अगर पार्टी में चर्चा किये बिना ही संसद में ले जाया गया तो कोई बड़ी ही दुर्घटना होने की चेतावनी दी है। रातो पाटी के साथ संक्षिप्त बातचीत करते हुए उन्होंने कहा- 'पार्टी में चर्चा किये बिना ही ऐसे ही एमसीसी आगे नहीं बढ़ सकती और अगर इसके विपरीत ढंग का प्रयोग करके इसे आगे बढ़ाने की कोशिस की गई तो दुर्घटना होने की बड़ी संभावना है।'

 

''पार्टी में बातचीत के बिना ये बात आगे बढ़ ही नहीं सकती है। पार्टी की कमेटी द्वारा निर्णय किये जाने के बाद ही इसे आगे बढ़ाया जायेगा, बढ़ाना चाहिए। इसके आलावा अन्य किसी ढंग से इसे अगर आगे बढ़ाया गया तो दुर्घटना होगी" नेता खनाल का कहना है। उन्होंने कहा कि जहाँ तक संभव हो सकता है इसकी चर्चा केंद्रीय कमेटी में ही होनी चाहिए परन्तु अगर हालातों के कारण ऐसा संभव न हो सके तो स्थाई कमेटी में चर्चा करके उसके निर्णयानुसार ही आगे बढ़ सकने की बात उन्होंने बताई।


"केंद्रीय कमेटी की बैठक का अभी आयोजन अगर नहीं किया जा सकता है तो स्थाई समिति की बैठक का आयोजन करके उसमें इस विषय पर गंभीरतापूर्वक चर्चा की जानी चाहिए और स्थाई कमेटी की बैठक में जो निर्णय किया जायेगा वही बात पार्टी की भी आवाज होगी। पार्टी का निर्णय भी वही होगा, ऐसा नेता खनाल का दावा है। प्रस्तुत है नेता खनाल के साथ किया गया संक्षिप्त साक्षात्कारः


प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली ने संसद में ही खड़े होकर कहा है कि एमसीसी संसद से ही पारित होगा। परन्तु आपके नेतृत्व में रहे कार्यदल के द्वारा अध्ययन करके पेश किये गए प्रतिवेदन पर अभी तक क्यों गंभीर रूप से चर्चा नहीं की जा सकी है ?

 

सबसे पहली बात तो पार्टी की दूसरी केंद्रीय कमेटी की बैठक ने कार्यदल बनाकर इसके सम्बन्ध में अध्ययन किया है जिसका प्रतिवेदन हमारे द्वारा पेश किया जा चुका है। वह प्रतिवेदन हमारे द्वारा दो अध्यक्षों को दिया गया है। अब उस प्रतिवेदन के सम्बन्ध में पार्टी कमेटी में विचार-विमर्श होगा। वास्तव में तो यदि इसकी चर्चा केंद्रीय कमेटी में की जाय तो अधिक उत्तम बात है। स्थाई समिति की बैठक द्वारा जो निर्णय किया जायेगा वही पार्टी की भी आवाज होगा। पार्टी का निर्णय भी वही होगा और उसे ही हम कार्यान्वयन में ला सकेंगे।  

प्रतिवेदन प्रस्तुति का समय ही काफी लम्बा हो गया है फिर भी अभी तक कोई चर्चा नहीं। उधर एमसीसी समझौते के अनुसार आषाढ़ 16 गते के अंदर ही इसके कार्यान्वयन में जाने की बाध्यता है। अब इतने छोटे समय में कब पार्टी में विचार विनिमय होगा और कब पार्टी का निर्णय कार्यान्वयन में आएगा ?

 

इस समय के अंदर अगर काम न किया गया तो अब दूसरा समय नहीं आएगा, समय सीमा होती है कहने की बात ही नहीं है। समय तो निरंतर है। अभी कोरोना महामारी के कारण सारा संसार आक्रांत हो रहे होने की अवस्था है। जिसके कारण कुछ बाते स्थगित हुई हैं। इसी लिए इस बात पर भी फिर से पुनर्विचार करके, विचार विमर्श करके ही हम क्या कर सकते हैं के निर्णय में हम पहुँच सकते हैं। हमारी पार्टी की ओर से पार्टी कमेटी द्वारा चर्चा करके निर्णय करने के बाद ही कहीं इसका निर्णय हो सकेगा।

सरकार इसी अधिवेशन के द्वारा एमसीसी पास करने की तैयारी में है की घोषणा स्वयं प्रधानमंत्री कर चुके हैं। यदि पार्टी में इस पर चर्चे हुए बिना ही ये संसद की कार्यसूची में समविष्ट हो गया तो आप क्या करेंगे ?

 

आपको कैसे पता चली कार्यसूची में जाने की बात ?


प्रधानमंत्री के द्वारा ही कहे जा चुकने पर भी विश्वास  न करें ?


पार्टी में विचार-विनिमय हुए बिना ये बात आगे बढ़ ही नहीं सकती। पार्टी कमेटी के द्वारा निर्णय किये जाने के बाद ही ये आगे बढ़ेगा, बढ़ाना चाहिए। इसके आलावा अन्य कोई रास्ता अगर अपनाया जाता है तो दुर्घटना होगी।

  
सरकार इसे आगे बढाकर सांसदों पर व्हिप भी तो जारी कर सकती है ?

 

ऐसी आप कल्पना ही न करें। ये सरकार पार्टी की सरकार है। पार्टी निर्णय करके जो निर्देशन दे सरकार को उसके अनुसार ही चलना चाहिए। उसके विपरीत अगर सरकार चलने की चेष्टा करेगी तो ये भी दुर्घटना में जाने की बात ही होगी। 

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