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सफर

(हास्य व्यंग्य)

person access_timeMay 26, 2020 chat_bubble_outline0

कोरोना का कहर जारी है। इसकी लपेट में आने वालों की संख्या निरंतर बढ़ती ही जा रही है। लॉकडाउन की अवधि भी समान रूप से बढ़ ही रही है। और यह तब तक बढ़ते रहने की संभावना है जब तक ‘बड़े भैया’ इसे पूरी तरह उठा नही देते या अपने लोगों के घर वापसी का सिलसिला बंद नही होता। अब तो संसार भर के देशों की यह राय बनती जा रही है कि यह संक्रमण जल्दी समाप्त होने वाला नहीं है। इसके टीके आने में समय लगेगा। अतः अब इसे ज्यादा खीचना देश के हित में नही है। देश की अर्थव्यवस्था तो तबाह हो ही गयी है। खेतीपाती और अन्य उत्पादन भी ठप्प हो गये तो देश कैसे चलेगा। अतः उत्पादन बढ़ाने के लिए भी अब हमें इसके साथ ही जीने की आदत डालनी चाहिए। हाँ तो जनाब, भाई साहब, भाभीजी, बहनजी, अब आप हम सबको इसके साथ जीने की आदत डालने के लिए तैयार हो जाना चाहिये।

(भले ही कोरोना का वाइरस गले पड़ जाय, मौत गला दबोच ले। वैसे भी कोई जब घर से बाहर निकलता है तो उसे आज तक बाहर जाने से कोई रोक सका है क्या, भले ही हर वक्त मौत का साया उसका पीछा करता रहता हो, मोटर एक्सीडेन्ट के रूप में या अन्य किसी प्रकार की दुर्घटना के बहाने। कोई तैरते हुए डूब जाता है या नदी की तेज धार उसे बहा ले जाती है। पर आदमी जिस तरह मौत का खयाल किए बिना बेधड़क नदी में छलाँग लगाता है या मोटर, मोटर साइकिल, स्कूटर या साइकिल सड़क पर दौड़ाता है उसी तरह अब बेधड़क कोरोना के साथ जीने की आदत डालने की जरूरत आ गई है।)

अभी तक तो घर के अंदर ही बैठे थे परन्तु अब घर से बाहर निकलना है, काम पर जाना है, इसके साथ जीने की आदत डालनी है तो सुरक्षित रहने के लिए थोड़ी-बहुत सावधानी तो बरतनी ही होगी। अतः सोसल डिस्टेंशिंग रखते हुए किसी को हग मत कीजिए, किसी से हाथ मत मिलाइए, सेनेटाइजर साथ लेकर चलिए, भीड़वाली बस या माइक्रो से जहाँ तक हो सके यात्रा मत कीजिए, मुँह पर मास्क लगाकर नाक और मुँह को ढके रखिए आदि आदि।

मुझे पता है मुंह पर मास्क लगाने पर बहुत से लोगों को अनेक दिक्कते झेलनी पड़ सकती है। पर दिक्कत की चिंता मत कीजिए। क्योंकि जान है तो जहान है। मैं जानता हूँ पान खानेवाले, तम्बाकू खानेवाले, धूम्रपान करनेवालों को मास्क से बड़ी समस्या होगी क्योंकि उन्हें हर जगह पर पिच-पिच थूकने के अपने बुनियादी हक से वञ्चित होना पड़ेगा। लेकिन चिंता मत कीजिए। यह वञ्चना थोड़ी देर के लिए है। अतः बरदास्त कर लीजिए। जिंदगी सही सलामत रही तो सिगरेट या बीड़ी के कई डिब्बों को खोलकर उसे निकालने और दियासलाई की आग से झुलसाते रहने का सौभाग्य मिलता रहेगा। पान के बीड़े कतरते रहने का अवसर भी मिलता रहेगा। यात्रा भर के लिए आप जिस बुनियादी अधिकार से वञ्चित रहेंगे घर या ऑफिस पहुँचने पर उससे स्वतः विभूषित हो जायेंगे। फिर बीबी के संग पकौड़े के साथ, पकौड़े न मिले तो भुजिया के साथ ही सही, चाय का लुत्फ उठाने के बाद बैग में रखे पान के बीड़े को निकालकर मुँह में डालते हुए चबाते रहें जिस प्रकार बकरा पत्ते चबाता रहता है। (यहाँ बकरी का जिक्र नही कर रहा हूँ क्योंकि वह स्त्रीलिंग है।)


स्कूल, ऑफिस आदि में काम पर जाने वाली मैडम, मैम आदि को भी मास्क लगाने से होनेवाली परेशानी से मैं वाकिफ हूँ क्योंकि इससे लिपस्टिक से रँगे लाल-गुलाबी होठों की सुंदरता को ढक जाती है पर चिंता मत कीजिए बहिनजी काले मास्क के कारण आपके ऊपर कोई बुरी नजर नही डाल पाएगा। अगर ‘गोरे गोरे मुखड़े पर काला काला चश्मा’ सुंदरता में चार चाँद लगा सकता है तो काला काला मास्क अपनी जादूगरी क्यों नही दिखा सकता ? और हाँ, अगर किसी की नजर पड़ भी गयी तो ‘बुरी नजर वाले तेरा मुँह काला’ की कहावत चरितार्थ हो जायगी। इसलिए मास्क लगाने से मत डरिये।


पर परेशानी की बात एक ही है। थके-मादे घर के अंदर घुसते ही सबसे पहले बाथरूम में दस्तक देने की जरूरत पड़ेगी क्योंकि क्या पता भायरस नाम का मनचला कपडों पर चिपककर बैठा हो। इसलिए पहले कपड़े उतारकर उन्हें वाशिंग मशीन के अंदर डालिए। फिर थोड़ा सा डिटरजेंट और पानी डालकर स्वीच ऑन कीजिए और जब तक मशीन अपना काम करे आप अपने बदन को साबुन से मलते रहें। यदि मेरे जैसे कुछ लोगों के पास वाशिंग मशीन न हो तो उन्हें थोड़ी सी तो मशक्कत करनी ही पड़ेगी अपनी ही सुरक्षा के लिए, लेकिन भाई साहब, यह काम कल के लिए या पत्नीजी के लिए मत छोडि़ए। यदि वायरस ने उनकी कलाइयों को पकड़ लिया तो आपके ऊपर दूसरी आफत आ सकती है। इसलिए रोटी बेलने के बदले भाई साहब अपने कपड़े खुद धोइए। इससे आपकी पत्नी तो खुश होंगी ही, आपके अंदर आत्मनिर्भरता का भी विकास होगा, जिसकी आज देश को भी सबसे अधिक आवश्यकता है।


और जनाब ! जब बाहर निकलेंगे तो सिर्फ अपने काम से ही मतलब रखियेगा। मटरगश्ती को तब तक ताक पर रख दें जब तक इसके टीके बाजार में आ नही जाते। वैसे हजारों वैज्ञानिक और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोग इसकी खोज अनुसन्धान में लगे हैं। सभी ट्यूब में कोई न कोई तरल द्रव डालकर उसे हिलाते हुए दिखायी पड़ते हैं। अतः आशा की किरणें दिखायी पड़ रही है। भगवान इन्हें जल्दी कामयाबी प्रदान करे।


वैसे हमारे योगाचार्य लोग भी कुछ न कुछ नुस्खा बताते ही रहते हैं। गौमूत्र और गोबर के उपयोग के अलाबा अब यह कहा जा रहा है कि जब तक टीके न आ जाय हम सब तुलसी के पत्ते से बना काढ़ा पीते रहें। इसे पीने में किसी को हिचक नही होनी चाहिए क्योंकि एक तो यह मीठा होता है और दूसरा हमें कोरोना के साथ जीने की आदत डालने में यह मददगार हो सकता है।  अतः काढा पीते रहें और सिगरेट, बीड़ी, पान, खैनी आदि से दूर रहें क्योंकि कोरोना को तंबाकू की गंध बहुत पसंद है। शराब का तो वह दीवाना है। अतः इन सब चीजों से मतलब न रखें। अगर इनकी खुशबू से कोरोना खिंचा चला आया तो जनाब 14 दिन तक अकेले किसी अस्पताल में पड़े रहना होगा। उस पर पान, खैनी आदि सब बंद।


और हाँ, अगर आप मेरी ही तरह बसों से यात्रा करने वालों में से हों तो जहाँ तक हो सके बसों की यात्रा से बचें। यात्रा करनी ही हो तो किसी के साथ चिपककर बैठने के आनंद को भुला दें, क्योंकि इससे भी आपको, आपके परिवारजन को हानि पहुँच सकती है। याद रखें जान है तो जहान है।

तो जनाब ! जिंदगी के सफर में निकलना है तो सुरक्षा के उपाय तो अपनाने ही होंगे, आदतें बदलनी ही होगी और आत्मनिर्भर बनना ही होगा। वरना कोरोना जीने नही देगा।

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