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बच्चों में गंभीर और दुर्लभ बीमारी दिखने से बढी चिंता

person access_timeMay 20, 2020 chat_bubble_outline0

एजेंसी। अमरीका और ब्रिटेन के कुछ बच्चों में इन दिनों एक गंभीर और दुर्लभ बीमारी देखने को मिल रही है। इस बीमारी का सम्बन्ध कोरोना वायरस संक्रमण से है। ये बीमारी कुछ बच्चों के लिए गंभीर मुश्किलें पैदा कर सकती है और उन्हें आईसीयू में भर्ती कराने की नौबत भी आ सकती है।

 

ब्रिटेन में अब तक क़रीब 100 बच्चे इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं। अध्ययन बताते हैं कि यूरोप में अन्य जगहों पर भी बच्चों में ऐसी ही बीमारी के लक्षण देखे जा रहे हैं। माना जा रहा है कि जिन बच्चों का प्रतिरक्षा तंत्र (इम्यून सिस्टम) कोरोना वायरस पर देर से प्रतिक्रिया दे रहा है, उनमें इस बीमारी की चपेट में आने की आशंका ज़्यादा है। ये बीमारी ‘कावासाकी डिज़ीज़’ से मिलती-जुलती है।

 

कावासाकी बीमारी की वजह से बच्चों की रक्त कोशिकाएं फूल जाती हैं और उनके पूरे शरीर पर लाल चकत्ते निकल आते हैं। बच्चों को तेज़ बुख़ार आता है और उनकी आंखें भी लाल हो जाती हैं।

 

अप्रैल में, ब्रिटेन में नेशनल हेल्थ सर्विस के डॉक्टरों से कहा गया था कि वो इस ख़तरनाक बीमारी के बारे में पता लगाएं। इससे पहले लंदन में आठ बच्चे बीमार पड़ चुके थे और उनमें से एक (14 साल) की मौत भी हो चुकी थी।

 

बीमारी के प्रमुख लक्षण

 

इन सभी बच्चों को लंदन के एवेलिना चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था और सबमें लगभग एक जैसे लक्षण थे। जैसे- तेज़ बुख़ार, बदन पर लाल चकत्ते, लाल आंखें, शरीर में सूजन और दर्द। बच्चों को फेफड़ों या सांस से जुड़ी कोई बीमारी नहीं थी लेकिन इनमें से सात को वेंटिलेटर पर रखना पड़ा था।

 

डॉक्टरों का कहना है कि ये एक ‘नई बीमारी’ है जो कावासाकी डिज़ीज शॉक सिन्ड्रोम से मिलती जुलती है। आम तौर पर पाँच साल से कम उम्र के बच्चों को होता है। इसके लक्षण हैं: शरीर पर चकत्ते आना, गले की ग्रथियों में सूजन, होठों का सूखना और फटना।

 

लेकिन ये नई बीमारी बड़ी उम्र के बच्चों (14-16 साल) को भी प्रभावित कर रही है। इसकी वजह से कुछ बच्चों को गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं।

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