हिंदी संस्करण

सबसे बड़ा भय क्या है?

person access_timeMay 01, 2020 chat_bubble_outline0

इंसान अपने रक्षण के लिए मुख्यतः दृश्यशक्ति अर्थात 'विजन’ पर आश्रित है। चूंकि प्रकाश की अनुपस्थिति हमारी देखने की क्षमता को छीन लेती है इसलिए अंधेरे से भय हम इंसानों की रगों में है। पूर्वकाल में जंगली जानवरों के बीच जीवन काटते इंसानों के लिए रात्रि का अंधकार सबसे आतंकित करने वाला अनुभव होता था, जब जाहिर तौर पर वे आसपास मौजूद नरभक्षी जानवरों की मौजूदगी का एहसास नहीं लगा पाते थे। यही कारण है कि लाखों पीढ़ियां बीत जाने के बावजूद अंधेरे से थोड़ा-बहुत भय पृथ्वी के हर इंसान के 'डीएनए' में मौजूद है।


भय इंसानी जीवन का चालक है। हर इंसान किसी न किसी चीज से डरता ज़रूर है, जैसे कि अंधेरा, भयावह आवाजें इत्यादि। पर अंधेरा एक अंधे को भयभीत नहीं कर सकता, और उसी तरह, भयावह आवाजें एक बहरे इंसान को आतंकित नहीं कर सकतीं। विकृत चेहरे एक नवजात को डरा नहीं सकते। शेर का सामना एक पागल को भयभीत नहीं कर सकता। तो क्या इस दुनिया में ऐसा कोई डर है जो संसार के हर व्यक्ति को समान रूप से भयभीत कर सके। चलिए, आज भय के संसार में डुबकियां लगाते हैं।


सबसे पहले जाने भय आखिर है क्या ? देखा जाए तो मृत्यु की प्रत्येक संभावना/आंशका जीव में भय के रूप में परिणत होती है। आप शेर से डरते हैं क्योंकि आपका मस्तिष्क जानता है कि शेर आपसे ज्यादा ताकतवर है। आप विकृत चेहरों, अजीबोगरीब आवाजों से डरते हैं क्योंकि आपके पूर्व अभ्यस्त (Pattern Loving)  दिमाग को अनिश्चितता असहज करती है। दिमाग में "एमिगडला" नामक ग्रंथि हमारे भय को नियंत्रित करती है और किसी भी ख़तरे के सामने आ जाने पर हमारे भीतर भय का संचार कर हमें लड़ने अथवा भागने के लिए प्रेरित करती है। इसी को प्रसिद्ध 'Fight Or Flight Response' कहा जाता है।


यहां मैं आपको बता दूँ कि इंसानी दिमाग को कृत्रिम रूप से भयभीत भी किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, अगर आपकी स्क्रीन पर 10 वस्तुएं बारी-बारी से फ़्लैश करें जिनमें एक बेहद खूबसूरत गुड़िया भी हो, और हर बार गुड़िया के सामने आते ही आपको कृत्रिम रूप से बिजली के झटके दिए जाएं तो आपका मस्तिष्क बेहद तेजी से इस 'पैटर्न' को सीख आपके भीतर गुड़िया के प्रति भय विकसित कर देगा। और अगली बार गुड़िया के सामने आने पर, बिना बिजली के झटके के भी, आप बेहद भयभीत महसूस करेंगे। ऐसा कई प्रयोगों में साबित किया जा चुका है।


तो क्या भय सिर्फ़ इंसानी दिमाग की एक काल्पनिक उपज मात्र है? क्या हो, अगर किसी व्यक्ति के दिमाग से 'एमिगडला' को ही निकाल दिया जाए? तो क्या वह व्यक्ति भय का अनुभव करेगा? किस्मत से ऐसे कुछ व्यक्ति मौजूद हैं जिनकी 'एमिगडला' किन्ही न किन्ही 'जेनेटिक डिसऑर्डर' के कारण नष्ट हो चुकी हैं। और ऐसे व्यक्ति, असाधारण रूप से किसी भी भय का अनुभव नहीं करते। अप्रिय स्थिति आ जाने पर उन्हें यह पता होता है कि यह स्थिति उनके लिए ठीक नहीं है, पर पसीना, तेज धड़कने, अथवा भय से संबंधित कोई भी 'केमिकल एक्टिविटी' उनके शरीर में दर्ज नहीं होती है।


यही कारण है कि बहुत समय तक वैज्ञानिकों को लगता रहा कि इस दुनिया में ऐसा कोई डर नहीं जो हर व्यक्ति को समान रूप से भयभीत कर सके, खासकर उन व्यक्तियों को, जिनके भीतर भय को उत्पन्न करने वाली ग्रंथि 'एमिगडला' ही उपस्थित नहीं। पर नहीं यह लम्बे समय तक सच नहीं रहा। फिर एक दिन, वैज्ञानिक संसार ने एक ऐसे भय का साक्षात्कार किया जो 'एमिगडला' से हीन व्यक्तियों को भी समान रूप से आतंकित कर सकता है। और निर्विवाद रूप से यही दुनिया का सबसे बड़ा भय है। जानते हैं क्या?



तो मित्रों ! उस भय का नाम है "रक्त में कार्बन-डाई-ऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाना" अर्थात दूसरे शब्दों में, शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाना। वैज्ञानिकों ने जब 'एमिगडला' खो चुके व्यक्तियों को सघन 'कार्बन डाई ऑक्साइड' में कुछ देर सांस लेने को कहा तो 'एमिगडला' न होने के बावजूद आतंक तथा भय के वही भाव उनमें देखे गए जो एक सामान्य व्यक्ति में मौजूद होते हैं। शायद इसका कारण यह है कि रक्त में 'कार्बन-डाई-ऑक्साइड' की मात्रा भांपने तथा श्वसन को सुचारू रूप से अंजाम देने के कार्य मस्तिष्क के उन प्राचीन हिस्सों द्वारा किए जाते है जो 'एवोल्यूशन' के इतिहास में सबसे पहले उत्पन्न हुए थे अर्थात 'एमिगडला' से भी पहले। और पर्याप्त ऑक्सीजन न मिलने के कारण वे स्वतंत्र रूप से शरीर में भय का संचार करने में समर्थ होते हैं।


तो तकनीकी रूप से कहा जा सकता है कि "डूबना" अथवा "दम घुटना" इस दुनिया की सबसे डरावनी चीजें हैं। और ऐसा लाज़िमी भी है। आप खाने के बिना दो महीने, पानी के बिना एक हफ़्ता जीवित रह सकते हैं पर सांस लिए बिना महज कुछ मिनटों में आपकी मस्तिष्क की कोशिकाएं मरने लगती हैं, और बहुत जल्द आप तकनीकी रूप से मर चुके होते हैं।

कमेन्ट

Loading comments...