हिंदी संस्करण
प्रणय दिवस विशेष

कविता - बंग सुन्दरी

person access_timeFeb 14, 2020 chat_bubble_outline0

पहली मुलाकात के बाद उसनें 'भैलेन्टाइन डे' पर कार्ड भेज मुलाकात की स्मृतिया ताजी करा दी। एक कवि प्रत्युत्तर मे कविता लिखने के अतिरिक्त और कर ही क्या सकता था ? 22-23 वर्ष पूर्व लिखी गई यह कविता अप्रकाशित थी। अब जब काठमाडूं से हिन्दी मे रातोपाटी ने अपना संस्करण आरम्भ किया है तो सोचा इस कविता को प्रकाशित किया जाए। आशा है यह कविता नायिका रिन्कू सेन तक पहुँचेगी।

 

हे बंग सुन्दरी तेना नमन...

तू आयी निज द्वार आज

कृतकृत्य हुआ जीवन,

हे बंग सुन्दरी तेरा नमन...

 

तू सम्मुख है विमुख ही होगी

मेरी पीडा बस इतनी सी

कितनी नन्ही मेरी लघुता

मेरी निजता मेरी लसता

ठहर जरा मैं पा लूँ दर्शन,

हे बंग सुन्दरी तेरा नमन...

 

भरकर नीर निज नयनो में

तेरी छाया रखता हूँ

किंचित नही प्रमाद मेरे में

शेषेरे कविता बंग सुकन्ये

अब न तेरा मेरा मिलन

हे बंग सुन्दरी तेरा नमन

कमेन्ट

Loading comments...