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नरेन्द्र मोदी जी ने दीया जलाने और घण्टी बजाने को क्यों कहा होगा?

person access_timeApr 12, 2020 chat_bubble_outline0

भारतीय उपमहाद्वीप लगायत लगभग सारा विश्व इस वक्त नोवेल कोरोना वायरस द्वारा उत्पन्न कोविड- 19 नामक महाविनाशक संक्रमण से जूझ रहा है। चीनके वुहान से शुरु हुआ यह जीवाणु संसार के प्रायःसभी देशों मे पहुँच चुका है और चीन सहित यूरोप व अमेरिका में इसने अपनी शक्ति को प्रदर्शित किया है। इसकी शक्ति कितनी है और कबतक रहेगी, अनुमान लगाना मुस्किल है। आर्थिक, भौतिक एवं वैज्ञानिक क्षेत्र में असीमित उपलब्धि हासिल करनेवाले, जल, थल, नभ में अपना प्रभुत्व कायम रखने का ख्वाब देखनेवाले और इस धरती से परे ग्रहों-नक्षत्रों पर अपना दावा करनेवाले विश्व के महाशक्ति राष्ट्र इस समय कोरोना का तांडव नृत्य देखने के लिए विवश हैं। इनकी सारी शक्तियाँ कोरोना के प्रभाव के सम्मुख शून्य हो गई है।


कोरोना का फैलाव इतना व्यापक और निर्दयी है कि यह किसी को नहीं छोड रहा। जाति -जनजाति, देश-धर्म, अमीर-गरीब सब पर अपना अधिकार जमाकर घात कर रहा है। कडी सुरक्षा के घेरे में रहनेवाले विशिष्ट व्यक्ति, नेता, अभिनेता, कलाकार से लेकर सभी लोग इसके शिकार हो रहे हैं। वैज्ञानिक और विविध अनुसन्धान के क्षेत्र में उच्चतम उपलब्धि हासिल करनेका दावा करनेवाला मानव इस वायरस विरोधी टीका अथवा दवा खोज निकालने में अभी तक असफल है और इसके सामने सिर झुकाए निरीह बनकर बैठा है।


इस क्रूर वायरसको फैलने से रोकने के लिए विश्वके तमाम देश अनेक उपाय कर रहे हैं। नेपाल, भारत लगायत के अधिकांश देशों ने जनता के चलने-फिरने पर पावन्दी (लकडाउन) लागू कर सभीको अपने-अपने घर पर ही रहने की सलाह दी है। यथासम्भव घर पर रहें, दूरियाँ बनाए रखें, नियमित रुप से अपनें हाथोंको साबुन लगा कर अच्छी तरह से धोएँ और अन्य सभी उपचारात्मक विधियों को अपनाएँ जिन्हें विशेषज्ञों ने पालन करने का आदेश दिया है या कहें कि उपचार के रुप में आम लोगों को यही बताया गया है।


लगभग तीन हप्ते से सरकार द्वारा जारी किया गया लॉकडाउनको मानकर लोग अपने घर पर बैठे हैं। इतने  लम्बे  समय से घर बैठे लोग निश्चित ही उकटा गए होंगें, वे मासूम व निरीह बने होंगे। घर बैठे लोग अकेला महशूश कर रहे होंगे और जितनी जल्दी हो सके उन्मुक्त आकाश में उडना चाहते होंगे अथवा घरके बाहर स्वच्छन्द रुप से विचरण करना चाहते होंगे। दिन भर कितने ही क्रियाकलापों में रमनेवाले लोग आज घर की चारदीवारी में सिमटकर रह गए हैं। अभी टीवी, फेसबूक, इनटरनेट, किताब आदि के साथ अपना समय व्यतीत कर रहे हैं।


इस तरह चुपचाप घर पर बैठे लोग निराश ना बने, अकेलापन महशूश ना करें इसके लिए उत्तरदायी सरकार जनता का एकाकीपन दूर करने के लिए कुछ न कुछ करती रहती है। इस मामले मे भारतीय सरकार खासकर प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी जी खरे उतरे हैं। इसी का नतीजा है दिया जलाने और घण्टी बजाने का कार्यक्रम।


दिया जलाना और घण्टी बजाना मात्र मनोरञ्जन कराने के उदेश्य से अथवा जनता अकेली नहीं है,  सरकार उनके साथ हर क्षण है- ए दिखाने के लिए मात्र भी नही है। इसके अलावा जैसे कि हम कहते हैं- जनता के समक्ष ऐक्यभाव प्रदर्शन करने / कराने के लिए ऐसा कार्यक्रम किया है तो इसमे भी पूर्णता नही है। मेरे विचार में प्रधानमन्त्री मोदी उच्च आध्यात्मिक और सांस्कृतिक सोच रखनेवाले व्यक्ति हैं। उनकी जीवनशैली, रहनसहन, खानापान, बोलने और कार्य करने की जो तरीके हैं वह यही दर्शाता है। वह पूर्णतः आध्यात्मिक भावों से युक्त हैं इसीलिए उन्होंने जनता से दिया जलाने और घण्टी बजाने का आग्रह किया है।


हमारे नेपाल खासकर पहाडी क्षेत्रो में हरेक श्रावण संक्रान्ति के दिन सदियों से एक त्यौहार मनाया जाता है। इस त्यौहार के दिन सन्ध्याकाल में जाँता, ढेकी, ओखल चलाते हैं और शङ्ख घण्टी, थाली, सूप आदि एकसाथ बजाते हैं और शतबरी (Asparagus) नामक वनस्पतिको जलाकर आगन के छोरपर खडे होकर नीचे की ओर फेक देते हैं और जोरजोर से कहते है कि सब किसिम के चर्म रोग व्याधि इसी के साथ चली जाए। ऐसा करने से वर्ष भर गाँव में ऐसी कोई रोग व्याधि नही आएगी- ऐसा जनविश्वास है।


पूर्वोत्तर भारत के साथ ही अन्य कई जगहों पर इस तरह की कई परम्पराएँ है। विविध साँस्कृतिक / धार्मिक परम्परा और मूल्य मान्यताओं की जानकारी रखनेवाले प्रधानमन्त्री मोदी जी इन बातों को भलीभांति जानते हैं।


अब रही दीया जलाने की बात। दीया स्वयं प्रकाशका, ज्ञानका, सद्भावका, सकारात्मकता का और सम्पन्नता का द्योतक मात्र नही है अपितु रोग व्याधी नाशक, शत्रु नाशक और भय नाशक भी है। जब हम प्रातः और सायंकाल घर में दीप प्रज्ज्वलित करते हैं, तब उसमे जल अर्पण करके एक मन्त्र पढकर दीप को नमस्कार करते हैं। मन्त्र है- शुभं भवतु कल्याणं आरोग्यं सुख सम्पदः । सर्वशत्रु / रोग / भय विनासाय दीपज्योति नमोस्तुतेः ।। इसका अर्थ है - हे दीप ज्योती ! हमारे घर में शुभ हो, कल्याण हो, आरोग्य हो, सुख सम्पन्नता हो, हमारे शत्रु / रोग / भयका नास हो।  दीप प्रज्ज्वलन में ए जो निहितार्थ हैं इस बात से भी प्रधानमन्त्री मोदी जी अनभिज्ञ नही हैं। और  दूसरा कारण देखिए कि प्रधानमन्त्री जी ने 5 अप्रैल के दिन साँझ 9 बजे का समय क्यूँ चुना ? और 9 मिनेट तक दीप जलाए रखने की सल्लाह क्यों दी ? क्योंकि-  दो तीन दिन पहले ही नवरात्र समाप्त हुआ था। माता दुर्गा की आराधना, उपासना करने की यह पवित्र नौ दिन के तुरुन्त बाद प्रधानमन्त्री जी ने 9 बजे से 9 मिनट तक दीप जलाने की सलाह देकर प्रकारान्तर से उन्होंने आदि शक्ति स्वरुपा माता दुर्गा से आशीवार्द माँगा कि हे माते ! हम सब आपकी सन्तान हैं, आप दया और वात्सल्यकी खान हैं, कोरोना के कारण हम पर जो बीत रही है, सारी मानव जाति पर जो आपत्ति आई हुई है इससे हमारी रक्षा करें, सम्पूर्ण मानव जाति का कल्याण करें।


तीसरा- उस 5 अप्रैल के दिन रविबार था और द्वादशी तिथी थी। हरेक द्वादशी तिथि के दिन सायंकाल में प्रदोष रहता है। इस प्रदोष के दिन भगवान नारायण की पूजा करनी थी “वैद्यो नारायणो हरिः’’ नारायण हरि जैसे वैद्य व चिकित्सक इस धरातल में नही है और हो भी नही सकते।

इस यथार्थ के जानकार प्रधानमन्त्री जी ने उस सन्ध्या में दीया जला के और जलाने की सलाह देकर सारे देशवासियों से भगवान नारायण की भी आरती की और करवाई`। इस तरह जनताको घण्टी, थाली बजाने और दिया जलाने की सलाह देकर प्रधानमन्त्रीजी ने कई उद्देश्यों को  एक ही साथ हासिल किया और करवाया। समस्त मानव हितके लिए किया गया, देखने में सामान्य यथार्थ में महान ऐसा अनुष्ठान सम्पन्न करना आम आदमियों की सोच से परे की बात है। इस रहस्य को मोदी जैसे पहुंचे हुए व्यक्ति ही सोच, समझ और कर सकते हैं।

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