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विचार/दृष्टिकोण

कहर कोरोना का (हास्यव्यंग्य) access_timeचैत १६, २०७६

आज सारा विश्व कोरोना के भय से काँप रहा है। हर ओर त्रास, मौत और शोक का साया छाया हुआ है। अणु और परमाणु के विनाशकारी प्रभावों से वाकिफ मानव जाति, विशेषतः वैज्ञानिक वर्ग भी शायद इस बात से परिचित नही थे कि कोविड–19 नामका यह क्षुद्रतम जीव (वायरस) कभी प्रकट हो...

कोविड- 19 संक्रमण : क्या यह विषाणु मल के द्वारा भी फैल सकता है? access_timeचैत १५, २०७६

स्कन्द शुक्ला आज-कल ढेरों लोग कोविड-19 और उसके कारण सार्स-सीओवी 2 को लेकर दुविधा की स्थिति से गुज़र रहे हैं। चारों ओर से तरह-तरह की ख़बरें आ रही हैं, कुछ भ्रमकारी, कुछ भयकारी, कई आशाकारी और आश्वस्तिकारी भी। किन्तु इतनी विविधता-भरी बातों को देखकर एक प्रश्न क़रीब...

कोरोना काल में कुछ स्फुट बातें, बैठकर तसल्ली से, पूर्वाग्रहमुक्त होकर सोचने के लिए access_timeचैत १५, २०७६

क्यूबा में समाजवाद की अपनी समस्याएँ, गतिरोध, अड़चनें और चुनौतियाँ हैं, निश्चित ही हैं; पर अभी भी वहाँ समाजवाद का वास्तविक लोक-कल्याणकारी ढाँचा क़ायम है, जिसके चलते व्यापक जन-समुदाय की पहलकदमी बनी हुई है और सत्ता बुर्जुआ देशों की तरह, समाज से 'एलियनेटेड' ...

कोविड-19 के विश्वव्यापी महामारी का रूप लेने के बाद क्यूबा के व्यवहार ने दिखला दिया कि समाजवाद का वैश्विक मानवतावाद क्या होता है access_timeचैत १४, २०७६

कोरोना काल में कुछ स्फुट बातें, बैठकर तसल्ली से, पूर्वाग्रहमुक्त होकर सोचने के लिए : .क्यूबा में समाजवाद की अपनी समस्याएँ, गतिरोध, अड़चनें और चुनौतियाँ हैं, निश्चित ही हैं; पर अभी भी वहाँ समाजवाद का वास्तविक लोक-कल्याणकारी ढाँचा क़ायम है, जिसके चलते व्यापक जन-...

कोरोना से बचाव access_timeचैत १४, २०७६

वर्तमान कोविड-19 महामारी के समय लोग जानवरों को लेकर भी सशंकित और चिन्तित हैं। अनेक लोग आमिष भोजन करते हैं और ढेरों के पास कोई-न-कोई पालतू जीव है। ऐसे में इनसे सम्बन्धित प्रश्नों का मन में उठना स्वाभाविक है। विश्व-स्वास्थ्य-संगठन इस समय पशु-मण्डियों, मांस-मण्डि...

कोरोना का रोना ! access_timeचैत १३, २०७६

नमस्कार दोस्तों, पिछले काफी समय से शैक्षिक क्षेत्र में शुरू किए कुछ कार्यों के कारण आप सभी से दूरी बनी हुई थी। इस बीच विश्व कोरोना वायरस से आतंकित बन चुका है। इसलिए, अपने सामाजिक दायित्व के निर्वहन हेतु, मैं कोरोना से जुड़ी कुछ मूलभूत जानकारियां संक्षेप में आप...

कोरोना कहर और फैलती अफ़वाहे access_timeचैत १०, २०७६

- स्कन्द शुक्ल कोरोना-पैंडेमिक : जब जनता ज्ञान की सत्ता में मानवीय मूल्यों का ह्रास देखती है , तब वह षड्यन्त्रों ( कॉन्सपिरेसी-सिद्धान्तों ) में विश्वास कर बैठती है। विश्व-परम्परा में ज्ञान-सत्ता को सदैव राजसत्ता से ऊपर माना जाता रहा है : संस्कृत-सुभाषित ' विद्वत्...

खुशी..खुशी..खुशी..!!! access_timeचैत ८, २०७६

ढूँढ रहा मन हर पल खुशियाँ खुश रहने के रस्तों को जन्मसिद्ध अधिकार सभी का ढोने का इन बस्तों को हम सनातन धर्मी अपनी अलग सोच अलग विचार के लिए भी जाने जाते हैं यूँ तो हम किसी भी विशेष दिन के इंतजार में रहते ही नहीं क्योंकि हमारी तो धारणा ही है पल पल को जिओ ...

कोरोना से कौन से व्यक्ति अत्यधिक प्रभावित होगें, एक ज्योतिषीय विश्लेषण access_timeचैत ७, २०७६

सम्पूर्ण विश्व इस समय कोरोना नामक वायरस की चपेट में है और इस भयानक महामारी ने प्लेग जैसी महामारी की यादें ताज़ा कर दी हैं। हजारों लोग इस वायरस की चपेट में आकर अपनी जान गंवा चुके है। वैसे तो विश्व के सभी देश अपने अपने स्तर पर इस बीमारी से लड़ने के उपाय खोज...

मेरी प्रथम नेपाल यात्रा access_timeचैत ६, २०७६

मेरी नेपाल यात्रा किसी फिल्म के कथानक जैसी ही है। वर्ष 2013 में  कुम्भपर्व के पावन अवसर पर मै प्रयागराज की यात्रा पर था, कुम्भ स्नान के पश्चात वाराणसी वापसी के लिए प्रयाग से मैं जिस बस पर चढ़ा उसी बस में नेपाल से आए हुए श्री भरत शर्मा भी चढ़े। औपचारिक परिचय के द...

दुनिया में कोरोना access_timeचैत ५, २०७६

अमेरिका के ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ में प्रकाशित डैन ज़ैक के लेख का हिंदी अनुवाद पिछले कुछ दिनों से दुनिया 'माइक्रोस्कोप' के नीचे घूम रही हैं। नग्न आंखों से दिखाई न देने वाला एक वायरस हमारी वास्तविक शक्ति और कमज़ोरियो को उजागर कर रहा है। यह ...

सत्य की खोज में भटकता नायक access_timeचैत ३, २०७६

सत्य की खोज में निकले इस आख्यान के नायक ने न थकने और न रुकने की प्रतिज्ञा ली थी। कहाँ कहाँ नहीं पहुंचा वह, पहाड़ी गुफाओ में, वन जंगल के दुर्गम प्रांतो में ! नदी के किनारे हज़ारो कि मी लम्बी यात्राएं भी की उसने की। पर सभी स्थानों में उसे ‘अपनी तरह के’...

कोरोना का कहर access_timeचैत १, २०७६

कोरोना वायरस को लेकर  दो  नए अपडेट हैं- एक ये कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे वैश्विक महामारी घोषित कर दिया है। दूसरा ये कि इसके कारण इटली एक 'कम्प्लीट लॉकडाउन' में चला गया है। अगर हम कोरोना वायरस को एक वैश्विक महामारी की तरह देखते हैं और ...

भारत का 'ब्लैक होल' access_timeचैत १, २०७६

अंतरिक्ष के 'ब्लैक होल' के बारे में आपने सुना होगा। यह अंतरिक्ष की सबसे जटिल संरचना होती है। 'ब्लैक होल ऑफ़ कोलकता'  भारतीय इतिहास की रूह कंपा देने वाली एक घटना है। आज जानिये भारत के इस 'ब्लैक होल' के बारे में। दरअसल, कोलकात...

जियें तो जियें कैसे ? access_timeफागुन २७, २०७६

आजकल के हालातों का देखते हुए धड़कता हुआ दिल बैठा जा रहा है। अवसर भले ही होली जैसे महोत्सव का क्यों न हो। रंग और गुलाल बरसाने का क्यों न हो। परन्तु जब माहौल में हर ओर भय और त्रास हो, वहाँ उत्साह और उमंग बने तो बने कैसे? न तो किसी से हाथ मिला सकते हैं, न गले लग...

होली : हिन्दुओं का पवित्र त्यौहार access_timeफागुन २७, २०७६

परमात्मा की इस अनंत सृष्टि में मनुष्य ही एक ऐसा प्राणी है जिसके पास ज्ञान, विवेक, बुद्धि-विचार जिज्ञासा और कौतूहल जैसे गुण प्रकृति ने उसे वरदान स्वरुप प्रदान किये हैं। यही वह वरदान है जिसके चलते परमात्मा की सृष्टि में मानव अन्य प्राणियों से श्रेष्ठ हो सका है। अपने विव...

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस access_timeफागुन २५, २०७६

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलः क्रिया मनुस्मृति का ये श्लोक ये स्पष्ट रूप से बता देता है कि हमारे समाज में आदिकाल से ही स्त्रियों के प्रति कैसा व्यवहार और हमारी कैसी धारणाएं थीं। जहाँ स्त्रियों की पूजा अर्थात उनका सम्मान ...

नफ़रत बोती हुई सोशल मीडिया access_timeफागुन २४, २०७६

इंसानी रिश्तों का आधार उनके बीच का संवाद होता है, लेकिन बदलते दौर के साथ ज़िंदगी भाग दौड़ वाली हो गयी, जीविका के लिए पलायन होने लगा और इसी के साथ अपनों से दूरियाँ भी बढ़ गई। साथ ही साथ दूर-दराज़ के लोगों से सम्पर्क करने की समस्या भी होने लगी। ऐसे में समाज...

संविधान, समाज और महिलाएं access_timeफागुन २३, २०७६

हमारे लिए महिलाएं केवल एक “महिला” व्यक्तित्व न होकर सृष्टि कीऐसी रचना है जो सृष्टि की पूर्णता का महत्वपूर्ण हिस्सा है जो पुरुष का आधा हिस्सा है जिसके बिना पुरुष की पूर्णता संभव नहीं। वे आधे–आधे हिस्से हैं;  जिनके बिना हम पूर्ण नही हो पातें। श...

फागुन का महीना और इसका ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व access_timeफागुन १९, २०७६

वर्ष का हर महीना बहुजातीय, बहुधार्मिक और बहुभाषिक राष्ट्र के लिए महत्वपूर्ण होता है। नेपाल के संदर्भ में ऐतिहासिक और धार्मिक कारणों से फागुन महीने का विशेष महत्व है। क्योंकि राजनीतिक संदर्भ में इसी महीने देश राणा शासकों के 104 वर्षों के निरंकुश शासन से म...