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विचार/दृष्टिकोण

जिंदगी जिंदादिली का नाम है मुर्दादिल क्या खाक जिया करते हैं access_timeपुस ४, २०७७

काठमांडू। कहते हैं न कि जीवन कोई सीधी रेखा नहीं ये तो टेढ़ी मेढ़ी रेखाओं का ऐसा संगम है जहाँ हर दिन कुछ न कुछ ऐसा होता ही रहता है जो कभी मनुष्य को आनंद-उत्साह और उमंग से भर देता है तो कभी कुछ ऐसा भी होता है कि एक अच्छी खासी जिंदगी जी रहा इंसान मानों हर तरह ...

भौतिक विज्ञान को अनिश्चित कर देने वाले वर्नेर हाइजेनबर्ग access_timeमंसिर २१, २०७७

गणित में बेहद रूचि रखने वाले वर्नर हाइजेनबर्ग (Werner Heisenberg) भौतिकी की ओर अपने स्कूल के अंतिम दिनों में आकृष्ट हुए और फिर ऐसा कर गये जिसने प्रचलित भौतिकी की चूलें हिला दीं। वे कितने प्रतिभाशाली रहे होंगे और उनके कार्य का स्तर क्या रहा होगा, इसका अंदाज इस ब...

बिहार चुनाव परिणाम मेरी दृष्टि में, हारे तो सिर्फ नीतीश और सोनिया है access_timeकात्तिक २९, २०७७

लगभग सभी राजनीतिक विश्लेषकों, पंडितो, महाघाघ पंडितो, 'प्री पोल' और 'पोस्ट पोल' के हवा हवाई वैज्ञानिकों एवं मोदी विरोध के लिए ही जीवित रह रहे स्वनामधन्य महानुभावो के अनुमान, भविष्वाणी तथा मनगढंत सारे कयासों पर अस्वीकृति का ठप्पा लगते हुए बिहार की...

अनुभवी पिता की अनोखी सोच access_timeअसोज २, २०७७

समय बदला है, बहुत तीब्र गति से बदला है लोगों के आचार-विचार, खान-पान, जीवन यापन, जीवन शैली सब में परिवर्तन आया है। अगर किसी चीज में परिवर्तन नहीं आया तो वो है मां-बाप का अपनी संतान के उज्जवल भविष्य के लिए चिंतित होना। जरूर है की समय के साथ साथ उज्जवल भविष्य की...

नेपाल-भारत संबंध : मनभेद और मतभेद को भूल कर आगे बढ़े access_timeसाउन ३२, २०७७

15 अगस्त 2020 को भारत अपनी स्वतंत्रता की 74 वीं वर्षगांठ मना रहा है। भारत के ऐतिहासिक पन्नों पर यह वर्ष आत्मनिर्भर भारत को समर्पित है, यद्यपि प्रारंभ से ही भारत अपने आत्मनिर्भर अभियान को योजनापूर्वक आगे बढ़ा रहा है। किंतु इस वर्ष वैश्विक महामारी कोविड-19 कोरोना के चलते...

चिंतन access_timeसाउन ११, २०७७

हर समय का अपना अंदाज होता है। उस समय की घटनाएँ भी अपने ही किस्म के होते हैं, जिसके लिए वह काल हमेशा याद किया जाता है। विश्व के इतिहास के पन्ने ऐसी कालजयी घटनाओं से भरे मिलते हैं। जिनमें कई दुःखदायी और त्रासदीपूर्ण हैं तो कई सुखदायी भी। विस्तार में न जाकर एक-...

भारत-नेपाल विवाद और कालापानी का सच access_timeअसार १६, २०७७

नवम्बर 1814 से मार्च 1816 तक नेपाल (जिसे उस समय गोरखा अधिराज्य कहा जाता था) और भारत पर शासन कर रही ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच युद्ध चला जिसमें नेपाल को पराजय का सामना करना पड़ा। 4 मार्च 1816 को सम्पन्न सुगौली संधि के साथ इस युद्ध का समापन हुआ और संधि के फलस्वरूप ने...

कोरोना वायरस प्रारम्भ से अब तक : वैज्ञानिक शोध-खोज access_timeअसार १०, २०७७

किसी महामारी के फैलने की जांच जासूसी पड़ताल जैसी ही होती है। किसी जासूसी जांच में सबूतों के गायब होने से पहले अपराध की जगह पर पहुंचना होता है, प्रत्यक्षदर्शियों से बात करनी होती है। इसके बाद जांच की शुरुआत होती है। सबूतों की कड़ियों को जोड़ते हुए अगले वारदात ...

अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस और योगासन access_timeअसार ८, २०७७

प्राचीन काल में ऋषि–मुनियों के द्वारा अपने को स्वस्थ रखने और आत्मा को परमात्मा के साथ जोड़ने हेतु योगाभ्यासों का सहारा लिया करते थे। भगवान शंकर योग के प्रवर्तक और योगीश्वर माने जाते हैं तो भगवान श्रीकृष्ण, जिन्होंने योग क्री व्याख्या विभिन्न रूप में की है, योगेश्वर...

बुढ़ापे का जीवन access_timeजेठ २८, २०७७

जब मेरे मित्रजन किसी मीटिंग में मेरी ओर संकेत करते हुए ‘यह बूढ़ा’ या ‘बुढवा’ कहते हैं तो बहुत बुरा लगता है। लगता है कि उनके बाल नोच लूँ या बत्तीसी निकाल दूँ। पर अहिंसात्मक शैली में उनसे प्रतिवाद करते हुए कहता हूँ- ‘अगर मेरे सफे...

विश्व पर्यावरण दिवस :  2020 access_timeजेठ २४, २०७७

मनुष्य और प्रकृति का अन्योन्याश्रित संबंध है। अन्योन्याश्रित संबंध से भी अगर ये कहें की मनुष्य प्रकृति की ही जीती जागती रचना है तो भी शायद कोई अतिशयोक्ति न होगी। सभी जानते हैं कि मनुष्य की देह में 70 प्रतिशत पानी ही होता है इसी तरह कुछ और मात्रा में अन्य प्राकृतिक तत्व...

नरेन्द्र मोदी को पशुपतिनाथ का एक पत्र access_timeजेठ १७, २०७७

अनु. सहयोगी- शोभा काफ्ले खतिवडा तथा गूगल   सम्माननीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी ! आराध्य देव पशुपतिनाथ की ओर से ढेर सारी शुभकामनाएँ !!!  मैं पशुपतिनाथ ! आप मेरे अनन्य और प्रिय भक्त ! जो बार-बार नेपाल आते वक्त मेरा दर्शन किये बिना नहीं लौटते...

सफर access_timeजेठ १४, २०७७

कोरोना का कहर जारी है। इसकी लपेट में आने वालों की संख्या निरंतर बढ़ती ही जा रही है। लॉकडाउन की अवधि भी समान रूप से बढ़ ही रही है। और यह तब तक बढ़ते रहने की संभावना है जब तक ‘बड़े भैया’ इसे पूरी तरह उठा नही देते या अपने लोगों के घर वापसी का सिलसि...

झाँसा access_timeजेठ ३, २०७७

फ्रेश होकर बाथरूम से निकला ही था कि पत्नी पूछ बैठी- ‘आज देर तक सोते रहे। तबियत तो ठीक है न?’ ‘हाँ, ठीक है। चाय पी ली क्या?’ ‘नहीं, तुम्हारे इन्तजार में बैठी हूँ। दूध थोडा सा ही है सो सोचा कि अगर एक साथ चाय बनाएंगे तो इत...

पेरेंटिंग-कॉउंसलिंग क्यों? access_timeबैशाख २८, २०७७

BOISLOCKER ROOM का मुद्दा काफी गम्भीर और अहम है इसे लोग मज़ाक बनाने और मजे लेने में इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन यह किसी भी प्रकार से मजाक का हिस्सा नहीं है। कुछ लोगों से बात हुई, उनमें से कुछ का कहना है कि बात तो हर कोई करता है कोई छुप के, तो कोई कई लोगों के ...

बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर access_timeबैशाख २६, २०७७

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वरः गुरुर्साक्षात परंब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः ये हिन्दू दर्शन, धर्म-संस्कृति अपने आप में अपूर्व है जो ऐसे उदाहरणों और नमूने किरदारों से भरी है जो अनंत काल से आज तक, जहाँ समय, समाज और व्यक्ति में कितने ही परिवर्तन आये, पर व...

कुरुक्षेत्र का उत्तरदायी कौन? access_timeबैशाख २५, २०७७

पूर्वीय सभ्यता और संस्कृति की बनावट ही ऐसी है कि यहाँ घर परिवार का अधिकतम भर स्त्रियों के कंधों पर ही होता है। पर यहाँ ऐसा भी नहीं है कि ये भार कोई जबरन उनके सिर मढ़ देता है बल्कि सदियों की परंपरा है और जिसे महिलाएं बड़े ही गौरव के साथ लेती भी हैं, प्रसन्न होती ...

‘ट्रिंग ट्रिंग’ access_timeबैशाख २३, २०७७

अभी चाय का पहला घूंट भी गले से नीचे नहीं उतरा था कि फोन की घंटी बज उठी। पत्नी कहने लगी- ‘सुबह हुई नही की घंटी बजनी शुरु। देखो तुम्हारा ही पत्रकार मित्र होगा, जो सुबह-सुबह फोन करता है।’ फोन उसके लिए भी हो सकता था। पर सुबह-सुबह ही कौन बहस कर...

सफलता हासिल करने के लिए जरूरी हैं समय का सही सदुपयोग access_timeबैशाख २२, २०७७

भले ही मनुष्य एक विवेकशील प्राणी है पर भी उसे अपने विवेक को विकसित करने, अन्य लोगों से खुद को अलग पेश करने, अपने एक सौम्य और आकर्षक व्यक्तित्व के निर्माण के लिए कुछ प्रयत्न तो करने ही पड़ते हैं, बिना प्रयत्न यहाँ कुछ नहीं मिलता। वो कहावत है न.. उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति का...

सबसे बड़ा भय क्या है? access_timeबैशाख २०, २०७७

इंसान अपने रक्षण के लिए मुख्यतः दृश्यशक्ति अर्थात 'विजन’ पर आश्रित है। चूंकि प्रकाश की अनुपस्थिति हमारी देखने की क्षमता को छीन लेती है इसलिए अंधेरे से भय हम इंसानों की रगों में है। पूर्वकाल में जंगली जानवरों के बीच जीवन काटते इंसानों के लिए रात्रि का अं...