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विचार/दृष्टिकोण

भारत-नेपाल विवाद और कालापानी का सच access_timeअसार १६, २०७७

नवम्बर 1814 से मार्च 1816 तक नेपाल (जिसे उस समय गोरखा अधिराज्य कहा जाता था) और भारत पर शासन कर रही ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच युद्ध चला जिसमें नेपाल को पराजय का सामना करना पड़ा। 4 मार्च 1816 को सम्पन्न सुगौली संधि के साथ इस युद्ध का समापन हुआ और संधि के फलस्वरूप ने...

कोरोना वायरस प्रारम्भ से अब तक : वैज्ञानिक शोध-खोज access_timeअसार १०, २०७७

किसी महामारी के फैलने की जांच जासूसी पड़ताल जैसी ही होती है। किसी जासूसी जांच में सबूतों के गायब होने से पहले अपराध की जगह पर पहुंचना होता है, प्रत्यक्षदर्शियों से बात करनी होती है। इसके बाद जांच की शुरुआत होती है। सबूतों की कड़ियों को जोड़ते हुए अगले वारदात ...

अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस और योगासन access_timeअसार ८, २०७७

प्राचीन काल में ऋषि–मुनियों के द्वारा अपने को स्वस्थ रखने और आत्मा को परमात्मा के साथ जोड़ने हेतु योगाभ्यासों का सहारा लिया करते थे। भगवान शंकर योग के प्रवर्तक और योगीश्वर माने जाते हैं तो भगवान श्रीकृष्ण, जिन्होंने योग क्री व्याख्या विभिन्न रूप में की है, योगेश्वर...

बुढ़ापे का जीवन access_timeजेठ २८, २०७७

जब मेरे मित्रजन किसी मीटिंग में मेरी ओर संकेत करते हुए ‘यह बूढ़ा’ या ‘बुढवा’ कहते हैं तो बहुत बुरा लगता है। लगता है कि उनके बाल नोच लूँ या बत्तीसी निकाल दूँ। पर अहिंसात्मक शैली में उनसे प्रतिवाद करते हुए कहता हूँ- ‘अगर मेरे सफे...

विश्व पर्यावरण दिवस :  2020 access_timeजेठ २४, २०७७

मनुष्य और प्रकृति का अन्योन्याश्रित संबंध है। अन्योन्याश्रित संबंध से भी अगर ये कहें की मनुष्य प्रकृति की ही जीती जागती रचना है तो भी शायद कोई अतिशयोक्ति न होगी। सभी जानते हैं कि मनुष्य की देह में 70 प्रतिशत पानी ही होता है इसी तरह कुछ और मात्रा में अन्य प्राकृतिक तत्व...

नरेन्द्र मोदी को पशुपतिनाथ का एक पत्र access_timeजेठ १७, २०७७

अनु. सहयोगी- शोभा काफ्ले खतिवडा तथा गूगल   सम्माननीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी ! आराध्य देव पशुपतिनाथ की ओर से ढेर सारी शुभकामनाएँ !!!  मैं पशुपतिनाथ ! आप मेरे अनन्य और प्रिय भक्त ! जो बार-बार नेपाल आते वक्त मेरा दर्शन किये बिना नहीं लौटते...

सफर access_timeजेठ १४, २०७७

कोरोना का कहर जारी है। इसकी लपेट में आने वालों की संख्या निरंतर बढ़ती ही जा रही है। लॉकडाउन की अवधि भी समान रूप से बढ़ ही रही है। और यह तब तक बढ़ते रहने की संभावना है जब तक ‘बड़े भैया’ इसे पूरी तरह उठा नही देते या अपने लोगों के घर वापसी का सिलसि...

झाँसा access_timeजेठ ३, २०७७

फ्रेश होकर बाथरूम से निकला ही था कि पत्नी पूछ बैठी- ‘आज देर तक सोते रहे। तबियत तो ठीक है न?’ ‘हाँ, ठीक है। चाय पी ली क्या?’ ‘नहीं, तुम्हारे इन्तजार में बैठी हूँ। दूध थोडा सा ही है सो सोचा कि अगर एक साथ चाय बनाएंगे तो इत...

पेरेंटिंग-कॉउंसलिंग क्यों? access_timeबैशाख २८, २०७७

BOISLOCKER ROOM का मुद्दा काफी गम्भीर और अहम है इसे लोग मज़ाक बनाने और मजे लेने में इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन यह किसी भी प्रकार से मजाक का हिस्सा नहीं है। कुछ लोगों से बात हुई, उनमें से कुछ का कहना है कि बात तो हर कोई करता है कोई छुप के, तो कोई कई लोगों के ...

बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर access_timeबैशाख २६, २०७७

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वरः गुरुर्साक्षात परंब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः ये हिन्दू दर्शन, धर्म-संस्कृति अपने आप में अपूर्व है जो ऐसे उदाहरणों और नमूने किरदारों से भरी है जो अनंत काल से आज तक, जहाँ समय, समाज और व्यक्ति में कितने ही परिवर्तन आये, पर व...

कुरुक्षेत्र का उत्तरदायी कौन? access_timeबैशाख २५, २०७७

पूर्वीय सभ्यता और संस्कृति की बनावट ही ऐसी है कि यहाँ घर परिवार का अधिकतम भर स्त्रियों के कंधों पर ही होता है। पर यहाँ ऐसा भी नहीं है कि ये भार कोई जबरन उनके सिर मढ़ देता है बल्कि सदियों की परंपरा है और जिसे महिलाएं बड़े ही गौरव के साथ लेती भी हैं, प्रसन्न होती ...

‘ट्रिंग ट्रिंग’ access_timeबैशाख २३, २०७७

अभी चाय का पहला घूंट भी गले से नीचे नहीं उतरा था कि फोन की घंटी बज उठी। पत्नी कहने लगी- ‘सुबह हुई नही की घंटी बजनी शुरु। देखो तुम्हारा ही पत्रकार मित्र होगा, जो सुबह-सुबह फोन करता है।’ फोन उसके लिए भी हो सकता था। पर सुबह-सुबह ही कौन बहस कर...

सफलता हासिल करने के लिए जरूरी हैं समय का सही सदुपयोग access_timeबैशाख २२, २०७७

भले ही मनुष्य एक विवेकशील प्राणी है पर भी उसे अपने विवेक को विकसित करने, अन्य लोगों से खुद को अलग पेश करने, अपने एक सौम्य और आकर्षक व्यक्तित्व के निर्माण के लिए कुछ प्रयत्न तो करने ही पड़ते हैं, बिना प्रयत्न यहाँ कुछ नहीं मिलता। वो कहावत है न.. उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति का...

सबसे बड़ा भय क्या है? access_timeबैशाख २०, २०७७

इंसान अपने रक्षण के लिए मुख्यतः दृश्यशक्ति अर्थात 'विजन’ पर आश्रित है। चूंकि प्रकाश की अनुपस्थिति हमारी देखने की क्षमता को छीन लेती है इसलिए अंधेरे से भय हम इंसानों की रगों में है। पूर्वकाल में जंगली जानवरों के बीच जीवन काटते इंसानों के लिए रात्रि का अं...

अगर कोरोना विषाणु के खिलाफ़ टीका आ भी जाए, तो क्या दुनिया में पर्याप्त रूप से उपलब्ध हो सकेगा? access_timeबैशाख १७, २०७७

यह प्रश्न सुख्यात विज्ञान-जर्नल नेचर अपने सम्पादकीय में पूछता है। ज़ाहिर है जिनसे वह यह सवाल कर रहा है, वे उद्योगपति और राजनेता, दोनों हैं। टीकों की माँग के अनुसार समूचे विश्व में टीके न उपलब्ध करा पाना समस्या का एक हिस्सा है, टीकों की माँग के अनुसार समूचे विश्व मे...

कोरोना वैक्सीन access_timeबैशाख १६, २०७७

कोरोना संक्रमण विरुद्ध बनाई गई वैक्सीन का मानव ट्रायल पूरा हो चुका है| इंग्लॅण्ड की ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी और जेनरल इंस्टिट्यूट के सहकार्य में बनी इस वैक्सीन की पहली डोज लेनेवाली महिला एलिसा ग्रानाटो साथ ही इस वैक्सीन के सफल होने पर भी विश्वस्त हैं|   कोभिड...

एक छोटी सी मुलाकात (हास्यव्यंग्य) access_timeबैशाख १४, २०७७

‘क्यों बड़बड़ा रहे हो? सपना देख रहे हो क्या?’ पत्नी ने सोए हुए पति को झकझोरते हुए पूछा। ‘क्या बात है’ पति आँखें मलते हुए उठ बैठा। ‘रात भर बड़बड़ाते रहे। किस पर गुस्सा उतार रहे थे और किसे कह रहे थे नामाकूल?’ ‘अच्...

एकलव्य का अंगूठा और द्रोण का गुरुत्व मेडिटरेनियन बो ड्रा के बहाने, एक पुराने क़िस्से का पुनर्पाठ access_timeबैशाख ४, २०७७

आचार्य द्रोण को छल से ऐसे किशोर का अंगूठा काटने की कोई ज़रूरत नहीं थी, जो उनके इशारे पर अपना सर काटकर रख देता। मघा पाक्षिक में रामायण पर लिख रहे मित्र गिरिजेश राव ने वाल्मीकि रामायण की चर्चा के दौरान उल्लेख किया कि, "युद्ध में हर बार राम लक्ष्मण द्वारा ग...

आगमन नव वर्ष 2077 का access_timeबैशाख २, २०७७

आज विक्रम संवत 2077 का पहला दिन है। इस प्रकार विक्रम संवत को मानने वाले देश और लोगों के लिए यह नए वर्ष के शुभारंभ होने का पहला पावन दिन है। पर देश में नये वर्ष के आगमन के अवसर पर दिखनेवाला वह जोश, उल्लास और हर्ष का हर ओर अभाव महसूस हो रहा है, जो नये वर्ष...

नरेन्द्र मोदी जी ने दीया जलाने और घण्टी बजाने को क्यों कहा होगा? access_timeबैशाख १, २०७७

भारतीय उपमहाद्वीप लगायत लगभग सारा विश्व इस वक्त नोवेल कोरोना वायरस द्वारा उत्पन्न कोविड- 19 नामक महाविनाशक संक्रमण से जूझ रहा है। चीनके वुहान से शुरु हुआ यह जीवाणु संसार के प्रायःसभी देशों मे पहुँच चुका है और चीन सहित यूरोप व अमेरिका में इसने अपनी शक्ति को...